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राजधानी दिल्ली में बिजली की खपत ने तोड़ा पिछला रिकार्ड, 22 प्रतिशत की हुई वृद्धि

दिल्ली बिजली विभाग और बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार अप्रैल 2018 में बिजली की अधिकतम मांग 5,200 मेगावाट पहुंच गयी थी. इस साल आलोच्य महीने में बिजली मांग 30 अप्रैल को 5,664 मेगावाट पहुंच गयी. 

राजधानी दिल्ली में बिजली की खपत ने तोड़ा पिछला रिकार्ड, 22 प्रतिशत की हुई वृद्धि
पिछले साल मांग 7016 मेगावाट तक पहुंच गई थी. (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसमें इस साल अप्रैल-मई में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

दिल्ली बिजली विभाग और बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार अप्रैल 2018 में बिजली की अधिकतम मांग 5,200 मेगावाट पहुंच गयी थी. इस साल आलोच्य महीने में बिजली मांग 30 अप्रैल को 5,664 मेगावाट पहुंच गयी. 

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘बीच बीच में मौसम अनुकूल रहने के बावजूद दिल्ली में बिजली की मांग 2019 में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 22 प्रतिशत तक अधिक है.’’ इस साल अप्रैल में 19 बार ऐसा हुआ जब बिजली की मांग पिछले साल के इसी महीने की तुलना में अधिक रही है.

आंकड़ों के अनुसार 22 अप्रैल 2018 को बिजली की मांग 3,828 मेगावाट थी जबकि 2019 में इसी दिन 4,558 मेगावाट थी. यह 20 प्रतिशत वृद्धि को बताता है. इसी प्रकार 25 अप्रैल 2018 को बिजली की मांग 4,438 मेगावाट थी जो इस साल आलोच्य महीने में इसी दिन 19 प्रतिशत बढ़कर 5,552 मेगावाट पहुंच गयी.

यह प्रवृत्ति मई 2019 में भी जारी है. मई महीने में अबतक 13 बार पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले बिजली की मांग अधिक रही है. दस मई 2019 को बिजली की मांग 5,985 मेगावाट पहुंच गयी जो पिछले साल आलोच्य महीने के इसी दिन 4,899 मेगावाट थी.

हालांकि 15 मई से 24 मई 2019 के दौरान बिजली की मांग पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले कम रही है. इसका कारण मौसम का अनुकूल होना है.

मई 2018 में बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 6,442 मेगावाट रही जबकि 2019 की गर्मियों में दिल्ली में अधिकतम मांग 7,400 मेगावाट तक पहुंच जाने की संभावना है. पिछले साल की गर्मियों में राजधानी में बिजली की सबसे अधिक मांग पहली बार 7000 मेगावाट के स्तर को पार करती हुई 7016 मेगावाट तक पहुंच गई थी. इन गर्मियों में 7,400 मेगावाट की बिजली की मंग वर्ष 2002 के 2,879 मेगावाट के मुकाबले 250 प्रतिशत अधिक होगी.