उस पाक महिला के खिलाफ 25 मार्च तक जबरन कार्रवाई न हो जिसे देश छोड़कर जाने को कहा गया है : कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति ए जे भंबानी की पीठ ने यह अंतरिम आदेश एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ महिला के पति की याचिका पर दिया है.

उस पाक महिला के खिलाफ 25 मार्च तक जबरन कार्रवाई न हो जिसे देश छोड़कर जाने को कहा गया है : कोर्ट
महिला (37) वर्ष 2005 में भारतीय व्यक्ति से शादी के बाद भारत आई थी.

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह 25 मार्च तक उस पाकिस्तानी महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई न करे जिसे भारत सरकार ने उसके खिलाफ रिपोर्ट मिलने पर देश छोड़ने का आदेश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति ए जे भंबानी की पीठ ने यह अंतरिम आदेश एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ महिला के पति की याचिका पर दिया है. एकल न्यायाधीश ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा था.

अंतरिम आदेश जारी करते हुए पीठ ने कहा कि वह गोपनीय सुरक्षा रिपोर्ट जिसके आधार पर महिला के खिलाफ कार्रवाई की गई 'आत्मविश्वास नहीं जगाती है.' अदालत ने याचिका पर केंद्र से जवाब दायर करने को कहा और मामले में अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की है. 

पीठ ने कहा, "सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता की पत्नी के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न की जाए. वह हर एक दिन छोड़कर नजदीकी पुलिस थाने में रिपोर्ट करेंगी और उन्हें वहां एक घंटे से ज्यादा इंतजार नहीं कराया जाएगा." अदालत ने कहा कि प्रतीत होता है कि महिला को 2007 में जारी किया गया लंबी अवधि का वीजा अब तक रद्द नहीं हुआ है.

इस पर गृह मंत्रालय की तरफ से पेश हुए केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि एक बार जब उन्हें देश छोड़कर जाने के लिये कह दिया गया तो यह उसका वीजा रद्द करने के जैसा ही है. अहलूवालिया ने यह भी कहा कि वीजा देना और रद्द करना एक संप्रभु अधिकार है और महिला को संविधान के तहत यहां रहने की इजाजत चाहने के लिए अदालत की शरण में जाने का कोई अधिकार नहीं है. पीठ ने हालांकि कहा, "कुछ भी एकपक्षीय रूप से नहीं किया जा सकता." 

 

महिला के पति मोहम्मद जावेद ने अपनी याचिका में एकल न्यायाधीश के 28 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केंद्र सरकार के सात फरवरी के आदेश को बरकरार रखते हुए उससे 15 दिनों के अंदर (22 फरवरी तक)देश छोड़कर जाने को कहा गया था. एकल न्यायाधीश ने महिला को दो हफ्तों में देश छोड़कर जाने का आदेश देते हुए कहा कि कानून के सिद्धांत में उसे यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है. महिला (37) वर्ष 2005 में भारतीय व्यक्ति से शादी के बाद भारत आई थी. वह अपने पति और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही थी.