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मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर बोले- मैं अपनी आखिरी सांस तक गोवा की सेवा करता रहूंगा

विपक्षी दल कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए सीएम पर्रिकर ने कहा कि वह पूरे होश में हैं और उनमें 'जोश' भी बहुत है.

मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर बोले- मैं अपनी आखिरी सांस तक गोवा की सेवा करता रहूंगा
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर काफी अरसे से बीमार हैं.

पणजी: गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर काफी अरसे से बीमार हैं. बीमारी के बावजूद वह पूरे जोश-खरोश के साथ सरकार चला रहे हैं. बुधवार को उन्होंने राज्य का बजट पेश किया. विपक्षी दल कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह पूरे होश में हैं और उनमें 'जोश' भी बहुत है और वह अपनी आखिरी सांस तक गोवा की सेवा करते रहेंगे. उन्होंने राज्य विधानसभा में 2019-20 का राजस्व अधिशेष वाला बजट पेश किया.

कांग्रेस की ओर से तंज कसने के बाद पर्रिकर ने यह टिप्पणी की. हाल में कांग्रेस ने कहा था कि बीजेपी नेतृत्व वाली राज्य सरकार "धराशायी" हो गई है और राज्य पर कर्ज बढ़ता जा रहा है. अग्नाशय संबंधी बीमारी से जूझ रहे पर्रिकर ने बुधवार को विधानसभा में कुर्सी पर बैठकर बजट पेश किया. उनकी नाक में ट्यूब लगी हुई थी.

गोवा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चोडांकर ने सोमवार को कहा था, "पहले होश में आओ, बाद में जोश की बात करो." उन्हें जवाब देते हुए पर्रिकर ने बुधवार को कहा, "मैं जोश के साथ बजट पेश कर रहा हूं. मुझमें बहुत जोश है और पूरे होश में हूं." उन्होंने कहा कि वह आखिरी सांस तक राज्य की सेवा करते रहेंगे.

गोवा विधानसभा के सत्र में शामिल नहीं हुए पर्रिकर
बजट पेश करने के एक दिन बाद गोवा के बीमार चल रहे मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर गुरुवार को विधानसभा के बजट सत्र की सुबह की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए. सदन से उनकी इस गैर हाजिरी का कोई कारण नहीं बताया गया लेकिन अध्यक्ष प्रमोद सावंत ने सत्र के दौरान ऐलान किया कि पर्रिकर के नाम के लिए सूचीबद्ध सवालों को अगले सत्र में लिया जाएगा.
इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि पर्रिकर के भोजनावकाश के बाद सत्र की बैठक में भाग लेने की संभावना है.

सेना प्रमुख जर्नल बिपिन रावत ने पर्रिकर से मुलाकात की
सेना प्रमुख जर्नल बिपिन रावत ने बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से राज्य के विधानसभा परिसर में मुलाकात की और उनका हालचाल जाना. रावत ने इसे एक शिष्टाचार मुलाकात बताया.
मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री पर्रिकर से मिलने के बाद रावत ने कहा, "मैं यहां पर्रिकर की तबीयत जानने के लिये आया था. यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी."

63 वर्षीय पर्रिकर अग्नाशय संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं. इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मंगलवार को विधानसभा परिसर में पर्रिकर से मुलाकात की थी.

राफेल विवाद पर पर्रिकर, राहुल के बीच आरोप-प्रत्यारोप
पिछले काफी अर्से से बीमार चले रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने राफेल मुद्दे पर ‘‘झूठे बयान’’ देकर शिष्टाचार भेंट का इस्तेमाल ‘‘तुच्छ राजनीतिक फायदे’’ के लिये किया. इस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने उनके साथ हुई बातचीत साझा नहीं की. गांधी ने दावा किया कि भाजपा नेता ‘‘दबाव में’’ हैं.
गोवा में मुख्यमंत्री पर्रिकर से मिलने के कुछ घंटे बाद गांधी ने बुधवार को कोच्चि में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से कहा कि पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका राफेल लड़ाकू विमान सौदे से केाई लेना देना नहीं है.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित अन्य नेताओं ने गांधी पर इस मुद्दे पर निशाना साधा है. शाह ने उन पर बीमारी से लड़ रहे एक व्यक्ति के नाम पर ‘‘झूठ बोलने’’ का आरोप लगाया.

पर्रिकर को भेजे और सोशल मीडिया अकाउंट पर डाले संदेश में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने अपने भाषणों में राफेल मामले से जुड़ीं वही बातें की हैं जो पहले से सार्वजनिक पटल पर हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘आपसे मेरी मुलाकात पूरी तरह से निजी थी और यह आपकी स्थिति के लिए मेरी संवेदना के कारण संभव हुई...मैंने कल गोवा में आपसे मुलाकात के दौरान हुई बातचीत की कोई जानकारी साझा नहीं की है. हमारी मुलाकात के बाद मेरे दो भाषणों में मैंने जो कहा वह पहले से सार्वजनिक पटल पर मौजूद है.’’

गांधी ने यह जवाब पर्रिकर द्वारा उन्हें पत्र लिखने के बाद दिया. इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में पर्रिकर ने कहा, ‘‘ 'मैं इसे लेकर बेहद आहत हूं कि आपने इस मुलाकात का इस्‍तेमाल भी अपने तुच्छ राजनीतिक फायदे के लिए किया. आपने मेरे साथ महज पांच मिनट का वक्‍त बिताया और इस दौरान न तो आपने राफेल के बारे में कुछ जिक्र किया और न ही हमने इस संबंध में कोई चर्चा की.'’

पर्रिकर ने कहा कि शिष्टाचार भेंट करना और फिर तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए झूठे बयान देने से उनके मन में मुलाकात की गंभीरता और उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं.