सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देना सरकार का ऐतिहासिक फैसला- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
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सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देना सरकार का ऐतिहासिक फैसला- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मीडिया से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया 124 वां संविधान संशोधन बिल एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बिल है, जिसको लोकसभा एवं राज्यसभा में पास किया गया.

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण

(शोएब रजा)/नई दिल्लीः आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के संविधान संशोधन बिल को लोकसभा और राज्यसभा ने पास कर दिया गया. विपक्ष ने भी इस बिल में सरकार का साथ दिया. अब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने सरकार के फैसले को ऐतिहासिक बताया है. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि इस रिजर्वेशन का सबसे ज्यादा फायदा अल्पसंख्यक समुदाय को मिलेगा. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मीडिया से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया 124 वां संविधान संशोधन बिल एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बिल है, जिसको लोकसभा एवं राज्यसभा में पास किया गया.

  1.  सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण
  2. 5 हेक्टेयर से कम खेती की जमीन वालों को भी आरक्षण
  3. 8 लाख सलाना से कम आमदनी वालों को भी मिलेगा आरक्षण

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ये सामान्य श्रेणी के आर्थिक तौर से कमज़ोर वर्गों के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करेगा. अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी समीक्षा बैठक में बिल को पास करने के बाद सर्व सम्मति से पीएम मोदी का आभार भी व्यक्त किया. अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गययुरुल हसन रिज़वी ने इस बिल को अल्पसंख्यक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा, कि इस बिल का सबसे ज्यादा फायदा अल्पसंख्यक समाज को मिलेगा क्योंकि वो पहले से ही आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर है. गय्यरुल हसन रिज़वी ने आकंड़े पेश करते हुए बताया, कि 50 प्रतिशत से भी ज्यादा सवर्ण मुस्लिम इसका फायदा ले सकेंगे जो उनके हालात को बेहतर बनाएगा. 
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इससे पहले अल्पसंख्यक आयोग राम मंदिर के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखता रहा है, और अदालत तक इस मामले में जाने की बात कही थी. हालांकि बाद में आयोग के अध्य्क्ष ने इस फैसले को अपनी निज़ी राय बताया था. पहली बार मिले आर्थिक आधार पर  आरक्षण के फैसले के बाद ही इस  लोगों की अलग अलग राय सामने आ रही है और कई लोग इसके राजनैतिक मायने भी निकाल रहे है, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव नजदीक है.

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केंद्रीय कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने को सोमवार को मंजूरी दे दी. लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इसे सरकार का मास्टर स्ट्रोक भी माना जा रहा है. इस विधेयक को आज (मंगलवार) को ही संसद में पेश किया जाएगा. आपको बता दें कि जिनकी आठ लाख सलाना से कम आमदनी, 5 हेक्टेयर से कम खेती की जमीन है उन्हें आरक्षण दिया जाएगा. 1000 वर्ग फुट से कम का मकान है. कस्हों में 200 गज जमीन वालों को आरक्षण नहीं मिलेगा और शहरों में 100 गज जमीन वालों को आरक्षण नहीं दिया जाएगा.

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