क्या आप मीठी क्रांति के बारे में जानते हैं? ये आपको मालामाल कर देगी, सरकार भी दे रही बढ़ावा

दरअसल शहद एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) का काम करता है और हेल्थ में लिए कई तरह की बीमारियों को दूर करता है.

क्या आप मीठी क्रांति के बारे में जानते हैं? ये आपको मालामाल कर देगी, सरकार भी दे रही बढ़ावा

नई दिल्ली: मीठी क्रांति, ये वो क्रांति है जो शहद का उत्पादन बढ़ाकर लाई जानी है. इसके जरिए किसानों को देश और विदेश में ग्राहक देकर उनकी जेब में ज्यादा पैसे डालने की तैयारी है.

दरअसल शहद एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) का काम करता है और हेल्थ में लिए कई तरह की बीमारियों को दूर करता है. इसी गुण की वजह से किसानों को शहद बेचकर मुनाफा कमाने पर फोकस करने को कहा जा रहा है. 

देश में सालाना 1.10 लाख टन शहद का उत्पादन होता है. अगले पांच साल में इसे डबल करने की योजना बनी है.  इस समय लगभग 10 हजार रजिस्टर्ड किसान 15 लाख मधुमक्खियों की कॉलोनी बनाकर शहद उत्पादन कर रहे हैं. दुनिया भर में हम शहद बनाने वालों में टॉप फाइव में है. इसे तेजी से बढ़ाने पर काम चल रहा है.

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पिछले हफ्ते 500 करोड़ रुपए Apiculture (मधुमक्खी पालन) के लिए आत्मनिर्भर योजना के तहत किए गए हैं.

इस योजना के तहत उत्पादन बढ़ाने पर कृषि और ग्रामीण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बैठक करके एपीकल्चर के रास्ते के रोड़े हटाने के निर्देश दे चुके हैं. वहीं MSME रोड ट्रांसपोर्ट हाईवे मंत्री नितिन गडकरी खादी ग्रामोद्योग के जरिए हनी मिशन नए तरीके अपनाने का कह चुके हैं.

नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के अनुसार '30 लाख किसानों को एपिकल्चर की ट्रेनिंग दी है, जो भी अपना काम बड़ा करना चाहता है उसे हम हर संभव मदद के लिए तैयार है, हनी मिशन प्रधानमंत्री के दिल के करीब है, इससे कोआपरेटिव या सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से भी किया जा सकता है इससे बड़ी मात्रा में रोज़गार पैदा होने की क्षमता है.'

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) के अनुसार- हमने अपने शहद को ढंग से पहचाना नहीं है. अलग-अलग फूलों का शहदअलग अलग स्वाद में रहता है और उसकी प्रकृति भी अलग अलग होती है. वहीं मैदानी भागों का शहद और हाईएल्टीट्यूड (पहाड़ी भाग) के शहद की प्रकृति अलग होती है. हाई एल्टीट्यूड के शहद की विश्व में ऐसी मांग है कि वो साधारण से कई महंगा बिकता है. शहद में इतनी ताकत है कि वो किसानों मुनाफा ही मुनाफा दे सकता है.'

खादी ग्रामोद्योग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना के अनुसार- 'इकोसिस्टम को देखा जाए तो मधुमक्खियां इंसान के जीवन के लिए जरूरी है, हम मधुमक्खियों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहे हैं साथ ही साथ लोगों को रोजगार देने पर भी, हम किसानों को बी-बॉक्सेस (Bee Boxes)बांट रहे हैं, पिछले तीन साल में हमने खादी ग्रामोद्योग के तहत 1.33 बी बॉक्स बांटे हैं और 13,466 किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दी है.'

जानकारों के मुताबिक शहद की सही ब्रांडिंग मार्केटिंग हो तो ये हमारे किसानों को आत्मनिर्भर बना देगा, और मीठी क्रांति सब का स्वाद मीठा कर देगी.

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