मनोहर पर्रिकर की कहानी, आईआईटी बॉम्बे के चौकीदार की जुबानी
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मनोहर पर्रिकर की कहानी, आईआईटी बॉम्बे के चौकीदार की जुबानी

बुधराम ने कहा कि पर्रिकर मेरे घर पर दो बार आए हैं. वो मुझे कई बार बोले कि बढ़ई जी आप दिल्ली आइये, आपकी जॉब लगवा देता हूं. 

मनोहर पर्रिकर की कहानी, आईआईटी बॉम्बे के चौकीदार की जुबानी

मुम्बई : आईआईटी बॉम्बे से मनोहर पर्रिकर ने साल 1974 से साल 1978 तक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इस दौरान वह 4 नंबर की बिल्डिंग के रूम नंबर 160 में रहा करते थे. इसी हॉस्टल में उस दौरान बुधराम बढ़ई वॉचमैन की नौकरी करते थे. बुधराम ने करीब 38 साल यहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी. आज जब मनोहर पर्रिकर का देहांत हो चुका है तो उन्हें याद कर बुधराम की आंखें भर आई.

जी मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने बताया कि मैं उन्हें सुबह-सुबह उठाने जाता था ताकि वो अपनी पढ़ाई कर सकें. हम दोनों कई बार खाना साथ में खाते थे. कई बार जब वो लेट हो जाते थे तो मैं उनके लिए खाने की थाली अलग से बचाकर रखता था.

बुधराम ने कहा कि पर्रिकर मेरे घर पर दो बार आए हैं. वो मुझे कई बार बोले कि बढ़ई जी आप दिल्ली आइये, आपकी जॉब लगवा देता हूं. इसके बाद गोवा में भी उन्होंने जॉब देने के लिए बुलाया था. वो देश के लिए बहुत अच्छे और बहुत ईमानदार शख्स थे.

कॉलेज के दिनों को याद करते हुए वह बताते हैं कि वो कॉलेज टाइम में बहुत शांत रहा करते थे. शरारत नहीं करते थे. अब उनके जाने के बाद मुझे उनकी बहुत याद आएगी. 
ये कहते-कहते कई बार बुधराम बढ़ई की आंखें भर आई.

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