भारत के इस प्लान से बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा पाकिस्तान, बिजली भी हो जाएगी गुल
भारत सरकार की ओर से फैसला लिया गया है, 'हमारे हिस्से के पानी को रोकने और पूर्वी नदियों की धारा जम्मू कश्मीर और पंजाब की ओर मोड़ने का फैसला किया.'
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नई दिल्लीः पुलवामा में भारतीय सेना पर हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत एक के बाद एक बड़े कदम उठाने में लगा हुआ है. भारत सरकार की ओर से फैसला लिया गया है कि पूर्वी नदियों की धारा को जम्मू कश्मीर और पंजाब की ओर मोड़ा जाएगा.
टेक्निकल डिजाइन हो रहा है तैयारः गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह फैसला सिर्फ एक विभाग का नहीं बल्कि सरकार और पीएम के लेवल का निर्णय होगा. मैंने अपने डिपार्टमेंट से कहा है कि पाकिस्तान का जो इनके अधिकार का भी पानी जा रहा था वो कहा-कहा जा रहा इसका टेक्निकल डिजाइन बनाकर तैयार करो. देखिए वीडियो...
#WATCH Union Min Nitin Gadkari says,"Nirnay kewal mere dept ka nahi hai, sarkar aur PM ke level pe nirnay hoga par maine apne department se kaha hai ki Pakistan ka jo inke adhikar ka bhi paani ja raha tha vo kahan kahan rok sakte hain uska technical design bana ke taiyaari karo" pic.twitter.com/42KgwFrVzk
— ANI (@ANI) February 22, 2019
क्या कुछ होगा खास
भारत से निकलने वाली नदियों का डिजिटल मैप तैयार होने के बाद पाकिस्तान को मिलने वाले पानी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. भारत अगर सिंधु के पानी को रोक देता है, तो पाकिस्तान को इसके त्वरित प्रभाव से गुजरना पड़ेगा और यह उसकी अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी साबित होगी. यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत हो साबित हो सकता है. पाकिस्तान के दो तिहाई हिस्से में सिंधु और उसकी सहायक नदियां बहती हैं, यानी उसका करीब 65 प्रतिशत भूभाग सिंधु रिवर बेसिन पर है. पाकिस्तान ने इस पर कई बांध बनाए हैं, जिससे वह बिजली बनाता है और खेती के लिए इस नदी के पानी का इस्तेमाल होता है. यानि की पाकिस्तान के लिए सिंधु, सतुलज का पानी कितना महत्वपूर्ण है इस बात को नकारा नहीं जा सकता है.
बिजली उत्पादन पर मंडरा सकता है खतरा
पाकिस्तान की तरफ जाने वाली नदियों से भारत सिंधु जल समझौते की सीमाओं में रहते हुए भी 18,569 मेगावॉट बिजली का उत्पादन कर सकता है. लेकिन वह अब तक इनसे महज 3,500 मेगावॉट जलविद्युत उत्पादन की क्षमता ही विकसित कर पाया है. भारत की ओर से नदियों का पानी रोके जाने के बाद पाकिस्तान में बिजली उत्पादन पर भी रोक लग जाएगी, जिसके कारण उसके सिंध प्रांत में अंधेरा छा सकता है.
मानवता करना का क्या मतलब हैः गडकरी
नितिन गडकरी ने कहा कि पाकिस्तान अगर इसी तरह से व्यवहार करेगा और आतंकवाद का समर्थन करेगा तो फिर उनके साथ मानवता का व्यवहार करने का क्या मतलब है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुरुवार को गडकरी ने कहा था कि "रावी नदी पर शाहपुर..कांडी बांध का निर्माण शुरू हो गया है. इसके अलावा यूजेएच परियोजना के जरिये जम्मू कश्मीर में उपयोग के लिये हमारे हिस्से के पानी का भंडारण होगा और शेष पानी दूसरी रावी व्यास लिंक के जरिये अन्य राज्यों के बेसिन में प्रवाहित होगा." इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन सभी परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जा चुका है.