महाराष्ट्र के अहमदनगर में किसान की बेटियों ने शुरू किया भूख हड़ताल

पुणतांबा में रहनेवाली निकिता धनंजय जाधव, शुभांगी जाधव और पुनम जाधव नामक इन लड़कियों ने गांव में अन्नत्याग आंदोलन शुरु किया है. 

महाराष्ट्र के अहमदनगर में किसान की बेटियों ने शुरू किया भूख हड़ताल
सरकार को झुकाने के लिए किसान की बेटियां तैयार हो गई है.

प्रशांत शर्मा, पुणतांबा: महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के पुणतांबा गांव में किसान फिर से आंदोलन करने लगे है. इस बार पुणतांबा में किसानों की बेटियां आंदोलन पर बैठी है. इस दौरान यहां के तीन किसानों की बेटियों ने अन्न त्याग आंदोलन शुरू किया है.

इससे पहले पुणतांबा में किसानों ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया था. जिससे पूरे देश में हडकंप मच गया था. इस आंदोलन के बाद सरकार को किसानों की मांगों के सामने झुकना पड़ा था. अब भी फिर से एकबार सरकार को झुकाने के लिए किसान की बेटियां तैयार हो गई है. 

पुणतांबा में रहनेवाली निकिता धनंजय जाधव, शुभांगी जाधव और पुनम जाधव नामक इन लडकियों ने गांव में अन्नत्याग आंदोलन शुरु किया है. निकीता के पिता धनंजय जाधव ने पहली बार किसान के हड़ताल पर जाने की संकल्पना रखी थी. जिसके बाद पूरे देश में भुचाल आ गया था. अब अपने पिता के आंदोलन को आगे ले जाने का काम उनकी बेटी निकिता जाधव कर रही है. 

 

निकिता ने बताया "हमें बार बार आंदोलन क्यो करना पड रहा है, यह सरकार को सोचना होगा. हम है या हम नहीं. हमारे लिए सिर्फ घोषणा मत करो. जमिनी तौर पर कुछ तो करो. क्या हम कटपुतलीयाँ है. यही पुछने के लिए यह अन्नत्याग आंदोलन हम किसान बेटीयों नें हाथ में लिया है. जब तक सरकार किसानों के लिए कुछ ठोस नही करते तब तक आंदोलन जारी रहेंगा." 

अन्नत्याग कर रही शुभांगी ने बताया, '' जागर किसान क्रांति यात्रा को समर्थन देने के लिए हमारा अन्नत्याग आंदोलन है. अगर इसके बाद भी सरकार कुछ भी नहीं करती तो संघर्ष अटल है. अब याचना नही होगी, कामना नहीं होगी, अब संघर्ष होगा."

राज्य के किसानों की समस्या है बरकरार

भले ही महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सुखा ग्रसित घोषित कर रखा है. लेकिन किसानों की परेशानी कम नही हुई है. कृषि उत्पाद के दाम घटते ही जा रहें है. गन्ना किसान एफआरपी के लिए लढ रहा है और प्याज किसानों के कमर घटते दामों ने तोड दी है. इसलिए अब किसान की बेटियां आंदोलन पर उतर आयी है. 

वीर छत्रपती शिवाजी महाराज की माता जिजाबाई के जन्मस्थल सिंदखेडराजा वाले इस इलाके से ' दे रहें हो या जाओगे ' नामक इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जागर किसान क्रांति यात्रा शुरु की गयी है. इस यात्रा का समापन 19 फरवरी को होने जा रहा है. वैसे यहां के किसानों का कहना है कि जब तक किसानों की मांगे मानी नहीं जाती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.