सूखे के बाद किसानों पर सर्दी का कहर, खेतों में खड़ी फसल हो रही प्रभावित

किन्नू की फसल में सूखी सर्दी से ड्रॉपिंग होने लग गयी है जिससे फल में मिठास कम होगी और उत्पादन पर भी फर्क पड़ेगा

सूखे के बाद किसानों पर सर्दी का कहर, खेतों में खड़ी फसल हो रही प्रभावित
सरसों और किन्नू के साथ साथ गेहूं की फसल को भी पाले की मार से भयंकर खतरा है

जयपुर: प्रदेश के कई इलाकों में पड़ रही कड़ाके की ठंड अन्नदाताओं की मेहनत पर भारी पड़ने लगी है. किसानों के खेत में खड़ी फसलें पाले से प्रभावित होने लगी है. एक ओर सूखी सर्दी से सरसो और चने की फसल में बढ़वार रुकने का खतरा बढ़ गया है. वहीं दूसरी ओर किन्नू की फसल में ड्रॉपिंग हो रही है जिससे किसानो के चेहरों पर चिंता की लकीरे खिंच गयी है.

किसान शिवप्रकाश सहारण के अनुसार इस बार सर्दी पिछले वर्ष के मुकाबले बीस दिन पहले आ गयी है और सुबह सुबह फसलों पर बर्फ की सफ़ेद चद्दर बिछ जाती है. जिससे सरसो की फसल की फलियों के दाने कमजोर पड़ रहे हैं जिससे कवालिटी और कन्वाटीटी दोनों पर फर्क पड़ रहा है. इस किसान ने बताया की किन्नू के पौधों में भी रात को पाला जम जाता है जिससे पौधों में कैर पड़ जाती है और फल ड्राप होने लग जाते हैं जिससे उन्हें उनकी मेहनत का फायदा नहीं मिल पाता है.

सरसों और किन्नू के साथ साथ गेहूं की फसल को भी पाले की मार से भयंकर खतरा है. गेहूं की फसल के लिए धुंध फायदेमंद रहती है लेकिन इस बार धुंध कभी कभार ही छाई है जिससे गेहूं की फसल भी खतरे के साये में है.  कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले गर्मी ज्यादा थी और अब सूखी सर्दी पड़ रही है जिससे सरसो की फसल में बढ़वार रुक गयी है और उत्पादन कम होगा. वहीं किन्नू की फसल में सूखी सर्दी से ड्रॉपिंग होने लग गयी है जिससे फल में मिठास कम होगी और उत्पादन पर भी फर्क पड़ेगा. 

लेकिन अगर पाला बरकरार रहता है तो फिर रबी फसलों का उत्पादन इस बार प्रभावित होना तय है. मौसम की मार झेल रहे किसानो का मानना है की यदि धुंध शुरू हो जाए या बारिश हो जाये तो ही उनकी फसल का बचाव हो सकता है नहीं तो उनको नुक्सान होना लाजिमी है.