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भरतपुर: पानी के अभाव में सूखे हजारों फलदार पेड़, हुआ लाखों का नुकसान

बीते 15 माह से डीपबोर खराब होने के चलते बाग में पेड़-पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में अब ये फलदार पौधे सूखने लगे हैं.

भरतपुर: पानी के अभाव में सूखे हजारों फलदार पेड़, हुआ लाखों का नुकसान
30 लाख रुपए सालाना की आमदनी वाली नर्सरी पूरी सूख गई है.

देवेन्द्र सिंह/भरतपुर: हजारों फलदार पेड़ों वाले व 84 बीघा में फैले प्रदेश के एक मात्र सरकारी बाग 'राजहंस' को 'संजीवनी' का इंतजार है. भुसावर का प्रसिद्ध सरकारी राजहंस कलमी बाग व नर्सरी इन दिनों सूखा का दंश झेल रहे हैं. हर वर्ष लाखों रुपए का राजस्व देने वाले बाग के फलदार पेड़ सूखने लगे हैं वहीं 30 लाख रुपए सालाना की आमदनी वाली नर्सरी पूरी सूख गई है. 

बीते करीब 15 माह से डीपबोर खराब होने के चलते बाग में पेड़-पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में अब ये फलदार पौधे सूखने लगे हैं. हालात ये हैं कि पानी के अभाव में इस बार बाग के सैकड़ों आम, अमरूद के पेड़ों पर फल ही नहीं आए हैं. वहीं जिम्मेदार इसको लेकर अब तक गम्भीर नहीं हुए हैं. यह हाल तो तब है जब इलाके से आने वाले क्षेत्रीय विधायक भजनलाल जाटव सरकार में मंत्री है.

जानकारी अनुसार प्रदेश की शान कहे जाने वाले सरकारी राजहसं कलमी बाग का डीपबोर पिछले 15 माह से खराब होने के चलते नर्सरी तो सूख ही चुकी है. इसके साथ ही 84 बीघा भूमि पर हजारों की तादात में फलदार पेड़ भी सूखने लगे हैं. बाग प्रशासन ने उच्चाधिकारियों सहित प्रशासन को डीपबोर दुरूस्त कराने या दूसरा लगवाने का आग्रह कई बार किया. लेकिन उनका लापरवाह रवैया बाग के पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहा है. नर्सरी से प्रदेशभर में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों का भी वितरण किया जाता है. लेकिन अब नर्सरी पूरी तरह से सूख गई है.

भुसावर का सरकारी राजहसं कलमी बाग 84 बीघा में फैला हुआ है. यहां आम की विभिन्न किस्म के 500 पेड़, अमरूद के 500, आंवला के 300, नीबूं के 300 पेड़ और संतरा व मौसमी आदि के सैंकड़ों पेड़ लगे हुए हैं. यहां काला आम अपनी मिठास के लिए देशभर में मशहूर है, लेकिन पानी के अभाव में ये सभी पेड़ अब सूखने लगे हैं.