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दौसा: मौत और हादसों का कारण बन रहे हैं बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे, प्रशासन बेखबर

अगर बोरवेले की खुदाई के बाद खुला नही छोड़ा गया होता तो चार वर्षिय बालिका काल का ग्रास नही बनती. अब सवाल यह खड़ा होता है की इन बोरवेलो को खुला क्यो छोड.

दौसा: मौत और हादसों का कारण बन रहे हैं बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे, प्रशासन बेखबर
प्रतीकात्मक तस्वीर

दौसा: खुले पढ़े बोरवेलो में गिरकर कई बच्चे जान गवां चुके है तो कई घरों के चिराग हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन उसके बावजुद भी दौसा जिले में सरकारी हो या फिर निजी कई बोरवेल खुले ही पड़े हैं. हम बात कर रहे है दौसा के महेष्वरा खुर्द गांव की जहां गांव के बीचों बीच गांव की पानी की समस्या का निदान करने के लिए पंचायत समीति द्वारा एकल प्वांइट लगाने के लिए तीन साल पहले बोरवेल खुदवाया गया था लेकिन जब बोरवेल में पानी नहीं आया तो बोरवेल को खुला ही छोड़ दिया गया.

ऐसे में बोरवेल की खुदाई से गांव की पानी की समस्या का तो निदान नहीं हुआ लेकिन एक दुसरी बडी समस्या गांव के लिए पंचायत समीति द्वारा खुला बोरवेल छोड़कर जरूर खड़ी कर दी गई. बोरवेल में बच्चों के गिरने के हादसे अक्सर होते रहते हैं. हाल ही में जोधपुर मे चार वर्षीय बालिका खेलते खेलते खुले बोरवेल में गिर गई थी और उसे बचाने के लिए रेसक्यू भी चलाया गया लेकिन बालिका की तब तक मौत हो चुकी थी. 

अगर बोरवेले की खुदाई के बाद खुला नही छोड़ा गया होता तो चार वर्षिय बालिका काल का ग्रास नही बनती. अब सवाल यह खड़ा होता है की इन बोरवेलो को खुला क्यो छोड. दिया जाता है. क्योंकि इन्हे ढकने की जहमत नहीं उठाई जाती. ऐसी लापरवाही की वजह से लोगों के घरों के चिराग बुझ जाते हैं उसके बावजुद भी सबक नही लिया जाता है.

दौसा जिले मे भी खुले बोरवेल छोड़ने की वजह से पूर्व में यहां मासूम बालक बालिकाएं हादसो का शिकर हो चुके है. उसके बावजुद भी दौसा जिला प्रशासन उन हादसों से सबक नहीं ले रहा है. जबकी सरकार ने भी पूर्व में आदेश दिए थे कि प्रदेश में जितने भी खुले बोरवेल हैं उन्हे चिन्हीत कर बंद करवाया जाए जिससे बच्चे हादसों का शिकार होने से बच सकें.