उदयपुर के शिल्पग्राम महोत्सव में बिखरी लोक नृत्यों की छटा, उमड़ी दर्शकों की भीड़

लेकसिटी उदयपुर में इन दिनों लोक कला और संस्कृति के महाकुंभ कहे जाने वाले शिल्पग्राम महोत्सव का आयोजन हो रहा है.

उदयपुर के शिल्पग्राम महोत्सव में बिखरी लोक नृत्यों की छटा, उमड़ी दर्शकों की भीड़
महोत्सव में देश के 21 राज्यों से कलाकार आए हैं.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: नागरिकता संशोधन बिल को लेकर देश के कई इलाको में हिंसा हो रही है. लेकिन दुनिया में विविधता में एकता वाली भारत की जो पहचान है उसकी तस्वीर इन दिनों झीलों के शहर उदयपुर में दिखाई दे रही है. जिससे शहरवासियों के साथ देश-विदेश से आने वाले सैलानी भी रूबरू हो कर मंत्र मुग्ध हो रहे है.

लेकसिटी उदयपुर के शिल्पग्राम में इन दिनों लोक कला और संस्कृति के महाकुंभ कहे जाने वाले शिल्पग्राम महोत्सव का आयोजन हो रहा है. पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित हो रहे इस महाकुंभ में देश की विविधता वाली संस्कृति के कई रंग देखने को मिल रहे है. मेवाड़ का लोक नृत्य गवरी हो यह दक्षिण का कथक. कश्मीर की पश्मीना शाल की कारीगरी हो या लोहे को ढाल कर कई मनमोहक आकृतियां बनाने वाले गडुलिया लोहार का हुनर को इस महोत्सव में देखा जा सकता है.

शिल्पग्राम के प्रांगण में पूरे दिन दीश के विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकार अपनी काल का प्रदर्शन कर लोगो को अपने प्रदेश के कला और संस्कृति से रूबरू करवा रहे है. उदयपुर के शिल्पग्राम में आने वालों लोगो को भी यहां की आबो हवा खूब रास आ रही है.

देश की लोक कला और संस्कृति को आम जन तक पहुंचाने के उद्देश्य को लेकर उदयपुर में हर वर्ष शिल्पग्राम महोत्सव का आयोजन होता है. इस बार इस महोत्सव में देश के 21 राज्यों से आए 1500 से अधिक शिल्प और लोक कलाकार अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे है. शहरवासी हो या बाहर से आने वाले सैलानी सभी को उदयपुर में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ का पूरे साल इंतजार रहता है.

उदयपुर शिल्पग्राम महोत्सव में वैसे तो पूरे दिन ही कई तरह के कार्यक्रमो का आयोजन होता है. लेकिन शाम ढलते ही शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंग मंच पर आयोजत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम इस महोत्सव की सुन्दता में चार चांद लगा देते है. दस दिन तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव 30 दिसम्बर तक चलेगा. इस दौरान आप भी यहां पहुंच कर दे कि संस्कृति से रूबरू हो सकते है.