प्रतापगढ़ का यह सरकारी स्कूल बना 'आदर्श', पूरे उपखण्ड में हो रही जमकर तारीफ

प्रतापगढ़ जिला कहने को तो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, लेकिन यहां भी अब शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ती जा रही है. 

प्रतापगढ़ का यह सरकारी स्कूल बना 'आदर्श', पूरे उपखण्ड में हो रही जमकर तारीफ
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चकुंडा

प्रतापगढ़: जिला कहने को तो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, लेकिन यहां भी अब शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ती जा रही है. विभाग के साथ-साथ ग्रामीण भी अब इस क्षेत्र में अपना सहयोग देने के लिए लगातार आगे आ रहे हैं. ग्रामीणों के सहयोग से अरनोद उपखंड के चकुंडा गांव का सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ता नजर आ रहा है. इस स्कूल को इस स्थिति में लाने के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ साथ यहां के स्टाफ का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है. ग्रामीण और विद्यालय स्टाफ की मेहनत से यह स्कूल पूरे उपखंड क्षेत्र में सर्व सुविधा युक्त पहला स्कूल बन गया है.

प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चकुंडा में वर्तमान में 494 बच्चे अध्ययनरत हैं. आसपास के गांव से आने वाले बच्चे और उनके अभिभावक अपने क्षेत्र के पास स्कूल होने के बावजूद इन बच्चों को यहीं शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते हैं और इसके पीछे कारण है यहां की बेहतर सुविधाएं, जो निजी स्कूलों से भी काफी आगे है. ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ ने अपने बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा मिले इसके लिए विद्यालय में जन सहयोग से कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी, आरओ वाटर, बैठने के लिए टेबल कुर्सी सहित कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई है. इतना ही नहीं, बच्चों को विद्यालय में स्वस्थ वातावरण मिले इसके लिए विद्यालय में गार्डन और पेड़-पौधे लगाए गए हैं और इनकी देख रहे विद्यालय का स्टाफ ही करता है.

बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा हो इसके लिए यहां कंप्यूटर लैब में बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाती है. इतना ही नहीं यहां बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा भी कराई जाती है, जिससे कि उनके ज्ञान में लगातार अभिवृद्धि की जा सके. स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के मानसिक विकास के साथ शारीरिक विकास हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

आज के समय में शिक्षा जहां बहुत बड़ा व्यवसाय बन चुका है ऐसे में आदिवासी क्षेत्र में रहने वाले गरीब अपने बच्चों को निजी स्कूल की शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाते हैं. ऐसे में गरीब आदिवासी बच्चों के लिए इस सरकारी स्कूल के शिक्षकों और ग्रामीणों की पहल सराहनीय है.