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जयपुर: पार्किंग के नाम पर सरकारी जमीन हड़पने की तैयारी, नगर निगम ने उठाया सवाल

जयपुर नगर निगम प्रशासन नें पीपीपी मोड पर इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए मंजूरी दी थी, जिसके पीछे राज्य सरकार का उद्देश्य ये था की सी-स्कीम और आस पास के इलाके में पार्किंग की समस्या खत्म हो. 

जयपुर: पार्किंग के नाम पर सरकारी जमीन हड़पने की तैयारी, नगर निगम ने उठाया सवाल
निगम प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

रोशन शर्मा/जयपुर: प्रदेश की राजधानी जयपुर नगर निगम की ओर से निजी डेवलपर के साथ मिलकर पीपीपी मोड पर तैयार की गई 400 कारों के लिए बनी पार्किंग धूल फांक रही हैं. लम्बे समय से लोगों को पार्किंग के उद्धाटन का इंतजार हैं. पार्किंग का उद्घाटन कागजी खानापूर्ति में अटकता हुआ है. आखिर क्या वजह हैं की इस प्रोजेकट का आज तक उद्धाटन नहीं हो सका और इस प्रोजेक्ट के पीछे की सच्चाई क्या है. 

जयपुर के अशोक मार्ग, सी-स्कीम में आमजनता के लिए बनी मेकेनाइज्ड कार पार्किंग प्रोजेक्ट को ठंड बस्ते में डालकर खुर्द-बूर्द करने की तैयारी शुरू हो गई है. 400 कारों की पार्किंग के लिए नाले की जमीन पर बनी मल्टिस्टोरी पार्किंग को अब आम लोगों के लिए शुरू नहीं करके मल्टीपलेक्स, सिनेमाहॉल और मॉल के लिए उपयोग लेने की तैयारी होना शुरू हो गई है. जयपुर नगर निगम प्रशासन नें पीपीपी मोड पर इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए मंजूरी दी थी, जिसके पीछे राज्य सरकार का उद्देश्य ये था की सी-स्कीम और आस पास के इलाके में पार्किंग की समस्या खत्म हो. इस समस्या से निपटने के लिए ये एमओयू किया गया, जिसके बाद तय एमओयू के आधार पर पार्किंग बनकर तैयार भी हो गई, परन्तु न तो आज तक इस प्रोजेक्ट का उद्धाटन हो सका और ना ही ये पार्किंग आम जन के लिए काम आ सकी.

अब इस प्रोजेक्ट में घोटाले को लेकर निगम के ही पार्षद अनिल शर्मा ने राज्य सरकार और नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शर्मा ने मेयर और जयपुर नगर निगम के कमिश्नर विजयपाल सिंह को पत्र लिख कर पार्किंग प्रोजेक्ट की जांच करवाने के साथ- साथ इसे पूर्व निगम बोर्ड का महा घोटाला करार दिया है. साथ ही बिल्डिंग की हाइट बढाने पर सवाल खड़ा किया है.

शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा की 'पार्किंग विकसित करने के बदले डेवलपर बिल्डिंग में कॉमर्शियल एक्टीविटीज संचालित कर सकता है, लेकिन डेवलपर ने अपने रसूख का इस्तमाल करत हुए कुछ दिनों पूर्व स्वायत्त शासन विभाग को पार्किंग बिल्डिंग की हाइट 12 से 22 मीटर करने की अपील की. एलएसजी विभाग ने नगर निगम को इस सम्बंध में कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए. लेकिन निगम प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

वहीं अब नगर निगम अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर गैरकानूनी तरीके से बिल्डिंग की हाइट बढाने की परमिशन दी गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पार्किंग बिल्डिंग की हाइट बढाना गैर कानूनी है. डेवलपर कॉन्ट्रेक्ट की शर्तो की पालना नहीं कर रहा है. नियमानुसार मैकेनाइज्ड पार्किंग मैनफ्री होनी चाहिए, लेकिन डवपलर 10 से 12 व्हीकल पर कर्मचारी तैनात कर रहा है. डेवलपर ने अभी तक बिल्डिंग के अंदर का ले आउट प्लान नगर निगम से स्वीकृत नहीं कराया है. प्रोजेक्ट के तहत 40 फीट की रोड पर जीरो सेटबैक पर तीन मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है, जो गेर कानूनी है'.

एक ओर जहां पार्षद अनिल शर्मा ने स्वायत्त शासन विभाग और नगर निगम द्वारा डेवलपर को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते हुए मेयर और आयुक्त को पत्र लिखा है. वहीं पिछली अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में सी-स्कीम नाले के ऊपर पीपीपी मोड पर मेकेनाइल्ड पार्किंग बनाने के प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर दिया गया था. इस प्रोजेक्ट के तहत डेवलपर को नाले के ऊपर 12 मीटर हाइट बिल्डिंग बनाने और 400 व्हीकल के लिए पार्किंग बनाने की अनुमति दी गई. पार्किंग विकसित करने के बदले डेवलपर बिल्डिंग में कॉमर्शियल एक्टीविटीज संचालित कर सकता है. अब पूरे मामले की जानकारी आयुक्त की संज्ञान में पहुंच गई है. शिकायत पर गंभीरता हुए नगर निगम आयुक्त वी.पी. सिंह  का कहना है की 'सरकार की ओर से जो निर्देशों और शर्त के आधार पर पार्किंग विकसित की गई है और सभी विवादों को सुलझाते हुए जल्द ही पार्किंग का उद्घाटन किया जाएगा. निगम का दावा है कि जल्द ही कागजी खानापूर्ति पूरी कर पार्किंग परियोजना का उद्घाटन कर दिया जाएगा.

निजी डेवलपर को पार्किंग विकसित करने के बदले 4750 मीटर का बिल्टअप एरिया व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिया गया है. निजी डेवलपर इसमें मल्टीप्लेक्स समेत अन्य गतिविधियां संचालित करना चाहते हैं. मंजूरी के लिए यह मामला जब सरकार के पास गया तो इसे स्वीकृति भी दे दी गई, लेकिन अब 12 मीटर हाइट से बढाकर 22 मीटर किया जाने को लेकर पार्किंग का निर्माण करने वाली फाईनटेक पार्ककॉन इंडिया प्राईवेट लिमिटेड फर्म नें आवेदन किया हैं. जिसके पीछे मॉल की आड़ में मल्टिपलेक्ट का संचाल हो सके, लेकिन बड़ा सवाल ये हैं कि अगर मल्टिपलेक्स शुरू होता हैं तो मल्टिपलेक्स में आने वाले लोगों की गाड़ी की पार्किंग कहा होगी. अगर इस पार्किंग ही पार्किंग में ये गाड़िया खड़ी होगी तो फिर इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता क्या होगी, क्योंकी जिस उद्देशय के साथ इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी उस समस्या का तो समाधान होना सम्भव नहीं हैं ऐसे में इस इलाके में पार्किंग की समस्या बड़ी और हो जाएगी.