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राजस्थान की इस लोकसभा सीट पर महिला प्रत्याशियों को मौका नहीं देती पार्टियां, जानें कारण

यहां से महिला प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाने का पहला मौका बीजेपी ने 46 साल बाद वर्ष 1998 में दिया था. इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में बांसवाडा की जिला प्रमुख रही लक्ष्मी निनामा को मौका मिला था. 

राजस्थान की इस लोकसभा सीट पर महिला प्रत्याशियों को मौका नहीं देती पार्टियां, जानें कारण
प्रतीकात्मक तस्वीर

बांसवाड़ा: राजस्थान के आदिवासी बहुल डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट में वर्ष 1952 से 2014 तक 16 बार चुनाव हुए हैं. इस बार 17वीं बार चुनाव हो रहे हैं. खास यह है कि इन 67 साल के लोकसभा चुनाव के इतिहास में बीजेपी और कांग्रेस द्वारा महिला प्रत्याशियों को मौका देने में अधिक रुचि नहीं दिखाई गई. दोनों ने अब तक सिर्फ एक-एक बार ही महिला प्रत्याशी इस सीट से मौका दिया है. वहीं यहां दुर्भाग्य यह भी है कि दोनों ही बार मिले मौके को महिला प्रत्याशी भुना नहीं पाई और इनको हार का सामना करना पड़ा.

वर्ष 1952 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद, यहां से महिला प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाने का पहला मौका बीजेपी ने 46 साल बाद वर्ष 1998 में दिया था. इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में बांसवाडा की जिला प्रमुख रही लक्ष्मी निनामा को मौका मिला था. लेकिन लक्ष्मी ननोमा कांग्रेस के उम्मीदवार महेंद्रजीत सिंह मालविया से सवा लाख वोटो से पराजित हुईं थी. वहीं इसके बाद दूसरी महिला उम्मीदवार के लिए 16 साल का इन्तजार करना पड़ा और इस बार मौका कांग्रेस पार्टी ने दिया. वर्ष 2014 के पिछले चुनाव में कांग्रेस से उम्मीदवार जिला प्रमुख रही रेशम मालवीया को मौका मिला था. लेकिन इस बार भी भाजपा के उम्मीदवार मानशंकर निनामा ने 91 हजार मतों से रेशम को पराजित किया.

इधर महिलाओं को चुनाव में खड़ा करने में कांग्रेस और बीजेपी दलों की अरुचि के बारे में दोनों दलों की महिला नेताओं से बात की गई तो उन्होंने भी कहा राजनैतिक पार्टियां महिलाओं की चुनाव में भागीदारी को लेकर बड़ी-बड़ी बाते तो करती हैं लेकिन समय आने पर ये बाते हवा हो जाती है. महिला नेताओं का कहना है पार्टियों को चुनाव में महिला टिकट का भी कोटा होना चाहिए ताकि महिलाओं को राजनीति में बराबरी का मौका मिल सके. 

बहराल बांसवाडा-डूंगरपुर सीट से इस बार लोकसभा चुनाव में इस बार प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं. दोनों ही दलों ने इस बार किसी भी महिला को टिकट नहीं दिया है कांग्रेस ने जहा पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा को अपना प्रत्याशी बनाया है तो वही भाजपा ने पूर्व राज्यसभा सांसद कनकमल कटारा को अपना उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में अब आने वाले वर्षों का इंतजार रहेगा की दोनों राजनैतिक दल महिलाओ की चुनाव में भागीदारी को लेकर किस प्रकार के कदम उठाती है.