राजस्थान: गुर्जर आरक्षण के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है सरकार

पहला विकल्प ये है कि मॉर बैकवर्ड क्लास का दायरा 1 प्रतिशत से 5 प्रतिशत बढ़ाने पर सरकरा, सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगा सकती है. 

राजस्थान: गुर्जर आरक्षण के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है सरकार
मामले को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट और कानूनी जानकारों से राय ले रही है.

जयपुर/ आशीष चौहान: राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन शुरू होने के बाद गहलोत सरकार लगातार रास्ते खोजने में लगी हुई है. आरक्षण को लेकर सरकार गुर्जरों के सामने कई तरह के प्रस्ताव रख सकती है. कानूनी राय लेकर सरकार लगातार आरक्षण पर मंथन कर रही है. सरकार में डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी कहा था कि सरकार के पास कई विकल्प खुले हैं. केबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह, गुर्जरों के सामने कई तरह के प्रस्ताव रख सकते है.

पहला विकल्प ये है कि मॉर बैकवर्ड क्लास का दायरा 1 प्रतिशत से 5 प्रतिशत बढ़ाने पर सरकरा, सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगा सकती है. 2018 में गंगासहाय शर्मा की लगी याचिका पर एमबीसी आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में पहुंचा था. जहां कोर्ट ने मामला विधेयक पर रोक लगा दी थी, फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने ये कहा था कि सरकार विधेयक तो ला सकती है, लेकिन 50 फीसदी के उपर आरक्षण नहीं दिया जा सकता. अब केंद्र सरकार के सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के बाद आरक्षण का दायरा बढ़ गया है, लेकिन राजस्थान में फिलहाल ये लागू नहीं हुआ है. सरकार कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगा सकती है कि अब आरक्षण का दायरा बढ़ गया है तो एमबीसी आरक्षण का दायरा 1 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाए.

इसके अलावा गुर्जरों को मॉर बैकवर्ड क्लास से बाहर करके सरकार गुर्जरों को अलग से 5 फीसदी आरक्षण दे सकती है. पहले 5 फीसदी आरक्षण देने में समस्या 50 फीसदी दायरे को लेकर आ रही थी, लेकिन अब केंद्र में सर्वणों को आरक्षण दिए जाने के बाद आरक्षण का दायरा बढ़ सकता है. इसके लिए सरकार कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है.

हालांकि, अभी पूरे मामले को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट और कानूनी जानकारों से राय ले रही है क्योंकि आरक्षण का दायरा फिर बढ़ा तो एक बार फिर से मामला कोर्ट में अटक सकता है इसलिए सरकार कानूनी जानकारों से राय लेकर ही कोई कदम आगे बढ़ाएगी.