राजस्थान: बालिका लिंगानुपात में हुआ सुधार, आंकड़ा 929 से बढ़कर हुआ 948

राजस्थान में वर्ष 2015 के अनुसार जीवित जन्म शिशु दर के आंकड़ों में बालिका लिंगानुपात 929 था जो वर्ष 2018 में सुधर कर 948 हो गया है. 

राजस्थान: बालिका लिंगानुपात में हुआ सुधार, आंकड़ा 929 से बढ़कर हुआ 948
फाइल फोटो

जयपुर/ आशुतोष शर्मा: देशभर में गुरूवार को विश्व बालिका दिवस मनाया जाएगा. राजस्थान में इस दिन खास राज्य स्तरीय कार्यक्रम बेटियों को समर्पित करते हुए आयोजित किए जाएंगे. राजस्थान के लिए विश्व बालिका दिवस बेहद खास होने वाला है क्योंकि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं अभियान और पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में बेटियों की संख्या बढ़ गई है.

राजस्थान में वर्ष 2015 के अनुसार जीवित जन्म शिशु दर के आंकड़ों में बालिका लिंगानुपात 929 था जो वर्ष 2018 में सुधर कर 948 हो गया है. अर्थात 4 वर्षों में 19 अंको की बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2016 में जीवित जन्म शिशु दर के अनुसार बालिका लिंगानुपात 939 और 2017 में 943 था जो इस वर्ष 5 अंक बढ़कर 948 हो गया है. गत 5 वर्ष में जन्म लेने वाले जीवित जन्म शिशुओं के आंकड़ों पर किये गये अध्ययन के अनुसार बालिका लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है.

वर्ष 2014 में 14 लाख 26 हजार 511 बच्चों ने जन्म लिया था. जिसमें 7 लाख 40 हजार 275 लडक़े और 6 लाख 86 हजार 236 लड़कियां पैदा हुई थीं. जिसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 927 था. वर्ष 2015 में 14 लाख 11 हजार 223 बच्चों ने जन्म लिया था. जिसमें 7 लाख 31 हजार 295 लडक़े और 6 लाख 79 हजार 928 लड़कियां पैदा हुई थी. जिसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 929 था. वर्ष 2016 में 14 लाख 15 हजार 581 बच्चों ने जन्म लिया था. जिसमें 7 लाख 30 हजार 142 लडक़े और 6 लाख 85 हजार 439 लड़कियां पैदा हुई थीं. जिसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 939 था. वर्ष 2017 में 13 लाख 83 हजार 99 बच्चे पैदा हुए थे. जिनमें से 7 लाख 11 हजार 551 लडक़े और 6 लाख 71 हजार 548 लड़कियां पैदा हुई थी. जिसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 943 था. इसी तरह वर्ष 2018 में जनवरी से दिसंबर तक 13 लाख 55 हजार 486 बच्चें पैदा हुए. जिनमें से 6 लाख 95 हजार 944 लडक़े और 6 लाख 59 हजार 542 लड़कियां पैदा हुई हैं. जिसके अनुसार जीवित जन्म शिशु दर बालिका लिंगानुपात 948 है. 

पीसीपीएनडीटी एक्ट के कारण खुलेआम लिंग जांच और चयन की प्रकिया राजस्थान में पूर्णतया बंद हो गई है. इससे पूर्व राजस्थान के सभी जिलो में लिंग जांच और चयन करवाने वाली गर्भवती महिलाओं को कुछ सोनोग्राफी सेंटरों पर ही लिंग जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाती थी.

शिशु जन्म दर आंकड़ो के अनुसार बालिका लिंगानुपात में हुए सुधार में पहले नंबर पर बांसवाड़ा 1003, दूसरे पर चूरू 992, तीसरे पर हनुमानगढ़ 982, चौथे पर बाड़मेर 976, पांचवे पर जालोर 966, छठे पर राजसमंद 965, सातवें पर जौधपुर 964, आठवें पर सीकर 958, नवे पर चितौडग़ढ और टोंक 956 है. वहीं दसवें स्थान पर धौलपुर का 955 रहा है. जबकि सबसे खराब स्थिती कोटा जिले की रही है. जहां पर बालिका लिंगानुपात 901, सवाईमाधोपुर व डुंगरपुर में 905 रहा है.