close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: मीणा नहीं मीना है अनुसूचित जाति मामले पर 18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश दुलीचंद भील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

राजस्थान: मीणा नहीं मीना है अनुसूचित जाति मामले पर 18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: केंद्र सरकार द्वारा जनजाति आरक्षण में शामिल जातियों के लिए जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में कहा गया कि अनुसूचित जाति में मीणा नहीं आते सिर्फ मीना जाति आती है. जिसके बाद हाई कोर्ट ने मीणा-मीना विवादस से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया है. इन याचिकाओं पर अब 18 फरवरी को अगली सुनवाई होगी. 

न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश दुलीचंद भील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिका में गुहार की गई है कि जनजाति मंत्रालय समयबद्ध तरीके से जनजातियों का रिव्यु करे और सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से जिनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो गया है, उन्हें सूची से बाहर किया जाए.

इस मुद्दे पर प्रार्थीपक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज चौधरी ने कोर्ट को जानकारी दी कि 25 अगस्त 1965 में लोकुर कमेटी ने अनुसूचित जनजाति में शामिल जातियों की सूची पेश की थी. उसमें पहले स्थान पर भील और दूसरे स्थान पर चौकीदार मीना जाति थी. जिसके बाद 1976 में आरक्षण का आदेश जारी हुआ तो उसकी अधिसूचना में भी पहले स्थान पर भील जाति को ही रखा गया था और दूसरे स्थान पर भील मीना और नौवें स्थान पर मीना जाति को रखा गया था.