गुजरात में टेस्ट ट्यूब तकनीक से तैयार की जा रही ज्यादा दूध देने वाली गायों की नस्ल, ये बात है खास

आने वाले समय में अब पशुपालकों को होने वाली समस्याओ से छुटकारा मिलेगा, जिसमें पशुओ के दूध देने से लेकर उनके स्वास्थ्य की समस्याओ का हल होगा.

गुजरात में टेस्ट ट्यूब तकनीक से तैयार की जा रही ज्यादा दूध देने वाली गायों की नस्ल, ये बात है खास
पशुओं को भी टेस्ट ट्यूब पद्धति से विकसित करने की तैयारी

लालजी पंसूरिया, निर्मल त्रिवेदी /आणंदः भारत में आमतौर पर पशुपालक विदेशी गायों को पालने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं और देसी गायों को पालने में हिचकिचाते हैं, लेकिन भारत में दूध देने वाले पशुओं की इस समस्या को हल करने के लिए अब भारत में नेशनल डेरी डेवेलपमेन्ट द्वारा टेस्ट ट्यूब पद्धति से पूरी तरह से देसी गायों को विकसित किया जा रहा है. इससे आने वाले समय में अब पशुपालकों को होने वाली समस्याओ से छुटकारा मिलेगा, जिसमें पशुओं के दूध देने से लेकर उनके स्वास्थ्य की समस्याओ का हल होगा साथ ही स्वास्थ्य और ज्यादा दूध देने वाले पशुओ की वजह से पशुपालकों की आर्थिक परिस्थिति में भी सुधर आएगा.

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NDDB के वैज्ञानिक मनुष्य की तरह ही अब पशुओं को भी टेस्ट ट्यूब पद्धति से विकसित करने की तैयारी में हैं और टेस्ट ट्यूब से गिर की गाय ,शाहीवाल, रेड सिंधी और थरपाकर जैसी उच्च नस्ल  की देसी गायों को विकसित किया जायेगा, जो अधिक मात्रा में दूध देती हैं. इन गायों की विशेषता यह है कि इनमें पशुओं को होने वाले रोगों से लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है साथ ही ये ज्यादा मात्रा में दूध देती हैं. अब इन गायो के गर्भाशय से उनका गर्भ बीज निकालकर बेहतरीन नस्ल के बैल के स्पर्म द्वारा फर्टिलाइजेशन किया जा रहा है.

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लेबोरेटरी में सात दिन की फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया के बाद इस भ्रूण को गायों के गर्भ में रख दिया जाता है. खास बात यह है कि जहां एक साल में एक आम गाय एक ही बच्चे को जन्म देती है वहीं इस टेस्ट ट्यूब फर्टिलाजेशन के द्वारा साल भर में 50 से 60 बछड़े फर्टिलाइज होते है जिन्हे सेरोगेसी की तरह गायो के गर्भाशय रख दिया जाता है और जायदा से ज्यादा मात्रा में यानि की 50 से 60 स्वास्थ्य और दुधारू बछड़ों को वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया जा रहा है.

In Gujarat, Breeds of higher milk cows being prepared with IVF method

नेशनल डेरी डेवेलपमेन्ट ने टेस्ट ट्यूब फर्टिलाइजेशन के जरिये दूध उत्पादन के बाजार में एक नई क्रांति लाने की शुरुवात कर दी है और यह इनविट्रो फर्टिलाइजेशन के आने की वजह से आने वाले समय में यह सुविधा सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बन जाएगी. ब्राजील सरकार की इम्ब्रारापा संशोधन की सहायता ली है और ब्राजील से स्वास्थ्य और अच्छे क्वालिटी के जिन हासिल करने में काफी सहायक होगा. आणंद से शुरू हुई स्वास्थ्य और ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले पशुओं को विकसित करने की जो क्रांति शुरू हुई है अब आने वाले दिनों में भारत के लिए और अनेक राज्य के पशुपालकों के लिए ये अहम सौगात होगी.