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नकारात्मक मानसिकता वाले लोग गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर कर रहे सवाल : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोगों ने उनकी सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई शौचालय निर्माण और मुफ्त गैस कनेक्शन जैसी योजनाओं पर संदेह किया.

नकारात्मक मानसिकता वाले लोग गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर कर रहे सवाल : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को आश्चर्य है कि एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं कैसे गरीबों और वंचितों के जीवन में बदलाव ला रही हैं. (फाइल फोटो)

दांडी (गुजरात): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'नकारात्मक मानसिकता' वाले लोगों ने महात्मा गांधी को भी ऐतिहासिक दांडी मार्च निकालने से रोकने की कोशिश की थी और अब वे लोकोन्मुखी योजनाएं शुरू करने के लिए उनसे तथा उनकी सरकार से सवाल कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोगों ने उनकी सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई शौचालय निर्माण और मुफ्त गैस कनेक्शन जैसी योजनाओं पर संदेह किया.

'कुछ लोगों ने दांडी मार्च पर भी आपत्ति की थी'
उन्होंने कहा, 'जब महात्मा गांधी ने (1930 में) दांडी मार्च निकालने का फैसला किया तो कुछ लोगों ने उस पर आपत्ति की क्योंकि उन्हें (आंदोलन की सफलता को लेकर) संदेह था.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन गांधी, गांधी थे...गांधी ने अपनी योजनाएं जारी रखी क्योंकि वह नमक की ताकत को जानते थे और समाज के हर वर्ग के साथ इसके जुड़ाव को समझते थे.' महात्मा गांधी की 71 वीं पुण्यतिथि पर गुजरात के नवसारी जिले के दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक एवं संग्रहालय राष्ट्र को समर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री बोल रहे थे.

'अगर गांधीजी अपना आंदोलन छोड़ देते तो क्या होता'
उन्होंने कहा,'अगर गांधीजी ऐसे लोगों के प्रभाव में आ जाते और अपना आंदोलन छोड़ देते तो क्या होता. ऐसी नकारात्मक मानसिकता दुर्भाग्य से आज भी मौजूद है. इसके अलावा, यह अब निहित स्वार्थों से ग्रस्त है.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को आश्चर्य है कि एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं कैसे गरीबों और वंचितों के जीवन में बदलाव ला रही हैं.

पीएम ने सरकार की 'आलोचना और उपहास' की भी चर्चा की जिसका सामना स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण जैसी पहल के लिए करना पड़ा. पीएम मोदी ने कहा, 'पिछले साढ़े चार साल में, ऐसे लोगों (नकारात्मक मानसिकता वालों) ने मुझसे कई सवाल किए- शौचालय बनाने से क्या बदल जाएगा? क्या सफाई करना प्रधानमंत्री का काम है? गैस कनेक्शन जीवन कैसे बदल सकता है?" लोग इस तरह के सवालों को नहीं भूलेंगे.’ 

'छोटी-छोटी आदतों को बदलने से ही बड़े बदलाव आएंगे'
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को यह बताना जरूरी है कि छोटी-छोटी आदतों को बदलने से ही बड़े बदलाव आएंगे. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने 2014 से नौ करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया है. उन्होंने कहा कि क्षुद्र मानसिकता वाले लोग कभी नहीं समझेंगे कि शौचालयों ने महिलाओं के जीवन को कैसे बदल दिया है.

गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार पटेल की प्रतिमा की आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी फ्रांसीसी या अमेरिकी नागरिक ने अपने एफिल टॉवर या स्टैचू ऑफ लिबर्टी जैसे प्रतिष्ठित स्मारकों की आलोचना नहीं की.

पीएम मोदी ने कहा कि लेकिन भारत में ऐसे लोग हैं जिन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की आलोचना की है. लेकिन आज, यह एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन गया है और हर महीने पांच लाख से अधिक लोग आ रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि दांडी का नमक स्मारक भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाएगा और इससे स्थानीय निवासियों को अपनी आजीविका कमाने में मदद मिलेगी.

भीड़ ने उस समय उनका जोरदार स्वागत किया जब उन्होंने कहा कि इस स्मारक से अन्य छोटे विक्रेताओं और ऑटो चालकों के साथ एक चायवाला भी लाभान्वित होगा. 

स्मारक में दांडी सत्याग्रहियों की 80 मूर्तियां
इस स्मारक में महात्मा गांधी और ऐतिहासिक दांडी नमक यात्रा के 80 सत्याग्रहियों की मूर्तियां हैं. दांडी नमक यात्रा को दांडी मार्च भी कहा जाता है. स्मारक में 24 चित्र भी हैं जो ऐतिहासिक दांडी मार्च की विभिन्न घटनाओं और कहानियों को चित्रित करती हैं.

अंग्रेजों के नमक कानून का विरोध करते हुए महात्‍मा गांधी ने अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से तटीय गांव दांडी तक पदयात्रा की थी और समु्द्र के पानी से नमक बनाया था. महात्मा गांधी और उनके 80 सहयोगियों ने अंग्रेजों के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत दांडी मार्च किया था.

(इनपुट - भाषा)