पं.बंगालः महंगाई के इस दौर में सिर्फ 1 रुपये में पूरे साल बच्चों को पढ़ाता है ये शख्स

चट्टोपाध्याय उनकी पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने आने वाले सभी छात्रों से एक रुपये ही गुरुदक्षिणा के तौर पर लेते हैं. खास बात ये है कि यह फीस हर कक्षा के बच्चों पर लागू होती है. 

पं.बंगालः महंगाई के इस दौर में सिर्फ 1 रुपये में पूरे साल बच्चों को पढ़ाता है ये शख्स
ये है कि यह फीस हर कक्षा के बच्चों पर लागू होती है.

नई दिल्ली : मात्रा एक रुपये सालाना वेतन में करीब 300 छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना और साथ ही इलाके के थैलेसीमिया रोगियों की देखभाल करना ही नहीं बल्कि उनकी आर्थिक सहायता और कैंप लगा कर उनके कष्टों का निवारण करना यही लक्ष्य बन चुका है पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में रहने वाले मास्टर सुजीत चट्टोपाध्याय का. सुजीत चट्टोपाध्याय ने 14 साल पहले स्कूल से रिटायर हो होने के बावजूद सुजीत बाबू ने अपने जूनून से रिटायरमेंट नहीं ली और न ही छुट्टी.  अपने घर में ही उन्होंने पाठशाला शुरू कर दी है जिसका नाम उन्होंने रखा है ''सदाई फ़क़ीर की पाठशाला''.

सिर्फ एक रुपये है फीस
आज बेकश से चट्टोपाध्याय अपने पेशे में औपचारिक तौर पर नहीं है लेकिन फिर भी उनका वेतन सालाना एक रुपये ही है. चट्टोपाध्याय उनकी पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने आने वाले सभी छात्रों से एक रुपये ही गुरुदक्षिणा के तौर पर लेते हैं. खास बात ये है कि यह फीस हर कक्षा के बच्चों पर लागू होती है. 

परीक्षा से पहले देते हैं फीस
छात्र चट्टोपाध्याय को ये फीस परीक्षा देने जाने से पहले देते हैं. सत्यजीत बाबू बर्दवान ज़िले के आउश ग्राम के एक अंदरूनी गांव में उत्तर रामनगर के रहने वाले हैं. घर में रहती है उनकी पत्नी मीरा चट्टोपाध्याय और एक बेटा. 1965 में सुजीत चट्टोपाध्याय ने अपने ही गांव के एक स्कूल में शिक्षक के तौर पर काम शुरू किया था और प्रिंसिपल के तौर पर साल 2004 में उसी स्कूल से रिटायर भी हुए थे. 

थैलेसीमिया के प्रति लोगों को कर रहे हैं जागरुक
आउश ग्राम जंगल महल इलाके में आदिवासियों की भारी तादाद है और कई आदिवासी शिक्षा से आज भी वंचित है. साथ ही सुजीत बाबू आदिवासियों के दर्द को भी समझते हैं, क्योंकि उनमें से कई लोग थैलेसीमिया से पीड़ित है और ऐसे लोगों की सेवा भी सुजीत बाबू बखूबी निभा रहे हैं छात्रों की शिक्षा प्रदान करने के साथ ही कई साल पहले से सुजीत की पहल से थैलेसीमिया जागरूकता शिविर और इससे पीड़ित लोगों को सहायता प्रदान की जा रही है। 

वसंत पंचंमी के दिन होता है शिविर का आयोजन
हर साल सरवती पूजा यानि की वसंत पंचंमी के दिन थैलेसीमिया शिविर का आयोजन किया जाता है, जिसका आयोजन वह पढ़ने वाले छात्र ही करते हैं. सुजीत ने बताया छात्र विभिन्न गावों में जाकर वह थैलेसीमिया जागरूकता शिविर का आयोजन करते हैं. सुजीत ने कहा की उनके छात्र और छात्राए 1000 रुपये देकर पिछले 3 साल से थैलेसीमिया के रोगियों के हाथ में 10000 रुपये दिए थे जो की इस बार 5 लोगो तक पहुंच गई. इस शिविर को सफल बनाने के  लिए बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर की टीम भी गई थी.

अब बढ़ा दी ट्यूशन की फीस
वर्तमान में सुजीत ने अपनी ट्यूशन फी बढ़ा दी है. वह अपने ट्यूशन में आने वाले छात्रों से अब एक की बजाय दो रुपये लेने लगे हैं.