सुप्रीम कोर्ट ने 6 लोगों को पहले फांसी की सजा सुनाई, फिर 16 साल बाद बरी किया

वर्ष 2003 में महाराष्‍ट्र के ना‍स‍िक जिले में एक ग‍िरोह ने जघन्‍य हत्‍याकांड को अंजाम दिया था. इसमें 5 लोगों की हत्‍या हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 6 लोगों को पहले फांसी की सजा सुनाई, फिर 16 साल बाद बरी किया
कोर्ट ने आरोप‍ियों को सजा से बरी करते हुए राज्‍य सरकार से उन्‍हें मुआवजा देने को भी कहा है.

नई द‍िल्‍ली: महाराष्‍ट्र में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्य़ा और 2 महिलाओं से गैंग रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी. फिर 16 साल जेल में बिताने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी को बरी कर दिया. साथ ही सरकार को आरोपियों को 5-5 लाख मुआवजा देने का भी आदेश दिया. मामला महाराष्ट्र के नासिक जिले का है. 2003 में पांच जून को एक घर में कच्छा-बनियान गैंग के 6 बदमाश घुसे. उन्‍होंने घर में 5 लोगों की निर्ममता से हत्या की और घर की दो महिलाओं के साथ गैंग रेप किया, जिनमें से एक महिला की भी मौत हो गई थी. परिवार में एक मर्द और एक औरत गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच गए. उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ. महाराष्ट्र पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 6 बदमाशों की गिरफ्तार किया, जिनके खिलाफ नासिक सेशन कोर्ट में आरोप पत्र दायर हुआ.

सेशन कोर्ट ने जून 2006 में सभी 6 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई. हाईकोर्ट ने मार्च 2007 में इनमें से तीन को फांसी की सजा सुनाई. अन्य दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट से फांसी की सजा पाए 3 दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा.

राज्‍य सरकार के कहने पर तीन को फांसी की सजा
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अन्य 3 दोषियों के खिलाफ अपील दायर की, जिनकी फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था. राज्य सरकार ने इन तीनो को भी फांसी की सजा देने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील मंजूर करते हुए सभी 6 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई.

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्व‍िचार याच‍िका के बाद बदला फैसला
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दोषियों ने पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई में सामने आया कि राज्य सरकार ने जिन 3 दोषियों की उम्रकैद को फांसी की सजा में तब्दील करने की मांग की थी, उसकी सुनवाई में 3 दोषियों की तरफ से पैरवी नहीं हुई थी. इस बात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 3 दोषियों की अपील को फिर से सुनने का फैसला लिया.

जिन्‍हें मह‍िला ने पहचाना उन्‍हें ग‍िरफ्तार नहीं किया
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने आया कि इस वारदात में जो महिला गैंग रेप का शिकार होने और गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच गई थी, उसने पुलिस रिकार्ड में शातिर बदमाशों की फोटो देखकर उनमें से 4 की पहचान की थी, लेकिन पुलिस ने उन 4 बादमाशों को गिरफ्तार न कर अन्य 6 लोगों को पक़डकर उनके खिलाफ मुकदमा चलवा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी 6 आरोपियों को रिहा करने का फैसला सुनाया, साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह इन सभी आरोपियों को 5-5 लाख का मुआवजा दे और केस में लापरवाही बरतने व गलत जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ये भी आदेश दिया की इस मामले में पुलिस और आगे जांच करें और उन 4 बदमाशों को गिरफ्तार कर सजा दिलवाए जिनकी पहचान गैंगरेप कि शिकार महिला ने पुलिस रिकार्ड की एलबम में की थी.