फडणवीस सरकार का फ्लोर टेस्ट कब? सुप्रीम कोर्ट आज 10.30 बजे सुनाएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में बीजेपी-अजित पवार  को सरकार बनाने के लिए दिए गए आमंत्रण मामले पर अपना आदेश मंगलवार सुबह 10.30 बजे के लिए सोमवार को सुरक्षित कर लिया. 

फडणवीस सरकार का फ्लोर टेस्ट कब? सुप्रीम कोर्ट आज 10.30 बजे सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली: महाराष्ट्र (Maharashtra) में जारी राजनीतिक गतिरोध पर देश की सबसे बड़ी अदालत आज (26 नवंबर) को फैसला सुनाएगी. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) द्वारा महाराष्ट्र में बीजेपी (BJP) -अजित पवार (Ajit Pawar) को सरकार बनाने के लिए दिए गए आमंत्रण मामले पर अपना आदेश मंगलवार सुबह 10.30 बजे के लिए सोमवार को सुरक्षित कर लिया. इस तरह बीजेपी-अजित पवार (Ajit Pawar) को कम से कम एक दिन की राहत मिल गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र (Maharashtra) पर फैसला मंगलवार सुबह 10.30 बजे सुनाया जाएगा. कोर्ट में सरकार की ओर से सॉलिसिटर तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कोर्ट से कहा कि वह 'बीजेपी को एनसीपी (NCP) विधायकों द्वारा दिया गया समर्थन का पत्र लेकर आए हैं, जिसके आधार पर राज्यपाल ने फैसला किया.'

मेहता ने कहा, 'पत्र में साफ नजर आ रहा है कि अजित पवार (Ajit Pawar) ने एनसीपी (NCP) के 54 विधायकों के समर्थन वाला पत्र हस्ताक्षर के साथ राज्यपाल को सौंपा था.' उन्होंने आगे कहा, 'अजीत पवार द्वारा 22 नवंबर को दिए गए पत्र के बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था, इसके साथ ही पत्र में 11 स्वतंत्र और अन्य विधायकों का समर्थन पत्र भी संलग्न था.'

288 सदस्यीय सदन में बीजेपी के 105 विधायक हैं, वहीं एनसीपी (NCP) ने 54 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी ने दावा किया कि अन्य 11 स्वतंत्र विधायकों के समर्थन के बाद उनके पास 170 विधायकों की संख्या है. इसके साथ ही मेहता ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के राज्यपाल बी. एस. कोश्यारी के फैसले की न्यायिक समीक्षा पर भी आपत्ति जताई. मेहता ने आगे कहा, 'इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति को सूचना दी. जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रपति से राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का अनुरोध किया था.'

बीजेपी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने उस पार्टी का पक्ष लिया, जिसके पास 170 विधायकों का समर्थन है. रोहतगी ने कहा कि अन्य दलों ने ऐसा कभी नहीं कहा कि समर्थन पत्र पर विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं.

वहीं कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने कहा कि उनके पास 150 विधायकों के समर्थन वाला हलफनामा है. उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि बीजेपी की शिवसेना के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया है, क्योंकि बीजेपी, शिवसेना को किए अपने वादे से मुकर गई. वहीं कांग्रेस और एनसीपी (NCP) की ओर से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि जो कुछ भी हुआ है, वह 'लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी' है. सिंघवी ने कहा, 'राज्यपाल विधायकों के हस्ताक्षर पर बिना कवरिंग लेटर के भरोसा कैसे कर सकते हैं?'

शिवसेना-एनसीपी (NCP)-कांग्रेस के 162 विधायकों की अभूतपूर्व सार्वजनिक परेड
भारतीय राजनीति और महाराष्ट्र (Maharashtra) के इतिहास में सोमवार को एक अभूतपूर्व अध्याय जुड़ता देखा गया. संख्या बल दिखाने के लिए अब तक राज्यपाल के सामने विधायकों की परेड होती रही है, लेकिन यहां शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी (NCP)) और कांग्रेस ने संयुक्त रूप से सोमवार को अपने 162 विधायकों की सार्वजनिक परेड आयोजित की. ऐसा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व उसके सहयोगी अजित पवार (Ajit Pawar) गुट के 170 विधायकों का संख्या बल होने के दावे को गलत साबित करने के लिए किया गया. यह परेड सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की सुबह इन पार्टियों की याचिका पर सुनवाई से महज 12 घंटे पहले की गई.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में शनिवार की सुबह आठ बजे देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री व अजित पवार (Ajit Pawar) को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने को चुनौती दी गई है. फडणवीस व पवार के शपथ ग्रहण के बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं.

महा विकास अगाड़ी के उत्साहित दिख रहे 162 विधायकों के अलावा तीनों पार्टियों के शीर्ष नेता शरद पवार, सुप्रिया सुले, प्रफुल्ल पटेल, नवाब मलिक, जितेंद्र अवहद (सभी एनसीपी (NCP) से), उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, एकनाथ शिंदे व संजय राउत (शिवसेना से) व अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण व मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस) व अन्य भी मौजूद थे. समाजवादी पार्टी के अबु आसिम आजमी भी परेड के दौरान मौजूद थे.

नवगठित सरकार के बहुमत के दावे के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए परेड के बाद संयुक्त फोटो सेशन भी हुआ. इससे एक दिन पहले तीनों पार्टियों के नवनिर्वाचित विधायकों का परस्पर परिचय कराया गया था.