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भुखमरी के कगार पर पहुंचे कश्‍मीर के इस परिवार को मिला CRPF के 'मददगार' का सहारा

सीआरपीएफ के जवानों ने अपने ऊपर पत्‍थरों से हुए हमले के दर्द को उस वक्‍त भुला दिया, जब भुखमरी की कगार पर खड़ा कश्‍मीर का एक परिवार मदद की आस में उनकी दहलीज पर आ खड़ा हुआ.

भुखमरी के कगार पर पहुंचे कश्‍मीर के इस परिवार को मिला CRPF के 'मददगार' का सहारा
सीआरपीएफ की मदद के चलते जम्‍मू और कश्‍मीर इस परिवार में खुशियां लौटने के कगार पर हैं.

नई दिल्‍ली: जम्‍मू और कश्‍मीर में बीते दो दिनों से सुरक्षाबलों पर पत्‍थरबाजी की खबरें मीडिया में सुर्खियां बटोर रही है. घाटी में पत्‍थरबाजी की इन घटनाओं के बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसे मानवीयता का बेहतरीन उदाहरण कहा जा सकता है. दरअसल, यह घटना केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की उस यूनिट से जुड़ी हुई है, जो बीते दो दिनों से लगातार घाटी में पत्‍थरबाजों के पत्‍थरों का सामना कर रही है. सीआरपीएफ की इस यूनिट के जवानों ने अपने ऊपर पत्‍थरों से हुए  हमले के दर्द को उस वक्‍त भुला दिया, जब भुखमरी की कगार पर खड़ा कश्‍मीर का एक परिवार मदद की आस में उनकी दहलीज पर आ खड़ा हुआ.  

दरअसल, कश्‍मीर के जिस परिवार की हम बात कर रहे हैं, उसका मुखिया मोहम्‍मद सुल्‍तान है. मोहम्‍मद सुल्‍तान के परिवार में उनकी पत्‍नी और तीन मासूम बच्‍चे है. कुछ माह पहले तक मोहम्‍मद सुल्‍तान मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था. उनके परिवार की गाड़ी किसी तरह ठीकठाक चल रही थी, तभी मोहम्‍मद सुल्‍तान के सामने दो बड़ी समस्‍या आ खड़ी हुई. पहली समस्‍या, उनकी बूढ़ी होती हड्डियों से जुड़ी थी. ढलती उम्र के चलते मोहम्‍मद सुल्‍तान को अब काम मिलना कम हो गया था. इस सब के बीच मोहम्‍मद सुल्‍तान को बड़ा आघात तब लगा, जब उसे अपने ब्‍लड कैंसर की बीमारी के बाबत पता चला. 

कैंसर के इलाज में बिक गया घर का हर सामान
मोहम्‍मद सुल्‍तान की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह ब्‍लैड कैंसर के इलाज में आने वाले लाखों रुपए के खर्च को वहन कर सके. धीरे-धीरे ब्‍लड कैंसर की बीमारी मोहम्‍मद सुल्‍तान की जिंदगी पर हावी होती जा रही थी. सुल्‍तान की जिंदगी में एक वक्‍त ऐसा भी आया गया कि वह न ही मजदूरी करने लायक बचा और न ही कैसर के इलाज के लिए उसके पास एक भी कौड़ी बची. अब तक, सुल्‍तान के इलाज में घर का हर कीमती सामान बिक चुका था. उसकी जिंदगी में अब सिर छिपाने के लिए टूटा-फूटा एक घर ही बचा था. लेकिन, परिवार के पेट की भूख मिटाने के लिए सुल्‍तान के सामने सभी रास्‍ते बंद हो चुके थे. उनकी पत्‍नी किसी तरह आसपास के घरों में काम कर अपने परिवार के लिए दो जून की रोटियों का ही इंतजाम कर पा रही थीं. 

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सीआरपीएफ से थी उम्‍मीद की आखिरी आशा 
उम्‍मीद के सभी रास्‍ते बंद होने के बाद सुल्‍तान की जिंदगी गहरी निराशा से घिर चुकी थी. तभी सुल्‍तान का एक जानकार उम्‍मीद के किरण के रूप में उनकी जिंदगी में आया. इस जानकार ने सुल्‍तान को सीआरपीएफ की मददगार योजना के बाबत बताया. जिसके बाद, बिना समय गंवाए, सुल्‍तान अपनी पत्‍नी और बच्‍चों के साथ सीआरपीएफ के कैंप में पहुंच गया और बेहद उम्‍मीद से मदद की गुहार लगी. सुल्‍तान की हालत देखकर सीआरपीएफ के जवानों ने फैसला किया कि किसी भी कीमत में वे इस परिवार की मदद करेंगे. अपनी तसल्‍ली के लिए सीआरपीएफ ने पहले सुल्‍तान के पारिवारिक पृष्‍ठभूमि और आर्थिक स्थित का जायजा लिया. पूरी तरह से तसल्‍ली होने के बाद सीआरपीएफ की मददगार यूनिट ने पहले सुल्‍तान के परिवार के भरण-पोषण का इंतजाम किया और फिर सुल्‍तान के इलाज की व्‍यवस्‍था की. 

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सुल्‍तान की सेहत में तेजी से हो रहा है सुधार
सीआरपीएफ की मददगार यूनिट ने पहले अपने पास मौजूद फंड का इस्‍तेमाल सुल्‍तान के इलाज और मंहगी दवाइयों के लिए किया. इसके बाद, कुछ जवानों ने अपनी स्‍वेच्‍छा से वेतन का एक हिस्‍सा सुल्‍तान के इलाज में लगा दिया. सीआरपीएफ के जवानों का यह त्‍याग सफल हुआ और सुल्‍तान को बेहदतर इलाज मिलना शुरू हो गया है. सीआरपीएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, अब सुल्‍तान की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है. उन्‍हें आशा है कि जल्‍द ही सुल्‍तान पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ्‍य हो जाएंगे.