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ZEE जानकारी: अमरनाथ यात्रा पर खतरा, यात्रियों को जल्द लौटने की सलाह

जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक Advisory जारी की है. सरकार ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से कहा है कि वो कश्मीर घाटी में कम से कम वक़्त बिताएं. और जितना जल्दी मुमकिन हो, वो घर लौट जाएं.

ZEE जानकारी: अमरनाथ यात्रा पर खतरा, यात्रियों को जल्द लौटने की सलाह

आज सबसे पहले बात कश्मीर की...जहां कई दिनों से ऐसा लग रहा है कि कुछ बड़ा होने वाला है. मीडिया का एक वर्ग कई तरह की अफ़वाहें भी फैला रहा है. लेकिन DNA में आपको हम कश्मीर की आज की हक़ीक़त बताएंगे. और आज का सच ये है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने अमरनाथ यात्रियों पर बड़े हमले की आशंका ज़ाहिर की है.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक Advisory जारी की है. सरकार ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से कहा है कि वो कश्मीर घाटी में कम से कम वक़्त बिताएं. और जितना जल्दी मुमकिन हो, वो घर लौट जाएं.

इसकी बड़ी वजह हैं दो ऐसे हथियार...जो सुरक्षाबलों ने अमरनाथ यात्रा रूट से बरामद किये हैं. सुरक्षाबलों ने एक Sniper राइफल और एक Anti Personnel Mine बरामद की है. इन दोनों हथियारों के बारे में हम आपको आगे और गहराई से बताएंगे.

ये पहली बार है जब अमरनाथ यात्रियों पर हमले के लिये एक बारूदी सुरंग का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन कोई अनहोनी होती...इससे पहले ही सुरक्षाबलों ने इस बारूदी साज़िश को नाकाम कर दिया है. 

आज कश्मीर के सुरक्षा हालात को लेकर सुरक्षाबलों की एक Joint Press Conference हुई. इस Press Conference में 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल KJS ढिल्लन ने बताया कि पिछले कई दिनों से अमरनाथ यात्रा रूट पर सर्च ऑपरेशन जारी है.

सेना को ऐसे Intelligence Input मिले थे कि पाकिस्तान तीर्थयात्रियों पर बड़ा आतंकी हमला करने की फ़िराक़ में हैं, और इसके लिये आतंकवादी कोई नया तरीक़ा अपना सकते हैं. 

अमरनाथ यात्रा एक जुलाई को शुरू हुई थी...और एक अगस्त तक 3 लाख 42 हज़ार से ज़्यादा लोग पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं.

वर्ष 2015 के बाद ये पहली बार है कि अमरनाथ यात्रा में इतनी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे हैं. और अभी ये यात्रा ख़त्म होने में 15 दिन और बाक़ी है...हालांकि आज जम्मू-कश्मीर सरकार ने तीर्थयात्रियों को घर लौटने की एडवाइज़री जारी की है.

अमरनाथ यात्रा रूट पर बारूदी सुरंग और Sniper Rifle मिलने के बाद सुरक्षाबलों को बड़े हमले की आशंका है.

जो बारूदी सुरंग सुरक्षाबलों को मिली है...वो Pakistan Ordnance Factory में बनी P5-MK-2 Anti Personnel Mine है. ये अमेरिका की M-18 Claymore Mine की नक़ल करके बनाई गई है.

ये बारूदी सुरंग एक तरह का बम होती है... जो ज़मीन में गड्ढा करके या झाड़ियों में छुपाई जाती हैं. जो पाकिस्तानी Mine सुरक्षाबलों ने बरामद की है...वो 50 मीटर के दायरे में लोगों की जान ले सकती है.

Claymore Mine में विस्फोट के बाद छर्रे एक दिशा में किसी बंदूक की गोली की तरह निकलते हैं. अंतर इतना है कि यहां एक गोली नहीं बल्कि कई गोलियां होती हैं. इसे किसी पेड़ पर भी रखा जा सकता है जिससे से Bomb Disposal Squad की नज़रों से भी बच सकती है. इसमें Wire Trap या फिर रिमोट से भी धमाका किया जा सकता है. अमरनाथ यात्रा के रास्ते में जहां यात्रियों की भीड़ है वहां इस Mine का विस्फोट कई लोगों को घायल करने के साथ जान भी ले सकता था.

इस तरह की बारूदी सुरंग को बिछाने में सिर्फ 200 रुपये ख़र्च होते हैं...लेकिन इन्हें हटाने या निष्क्रिय करने के लिये 20 हज़ार रुपये से ज़्यादा ख़र्च होते हैं. क्योंकि इसे हटाने में किसी की जान भी जा सकती है. दुनिया में आज ऐसी 350 से ज़्यादा तरह की बारूदी सुंरगें हैं.

इससे पहले अक्टूबर 2003 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हुए Claymore Mine के हमले ने उन्हें बुरी तरह से ज़ख्मी कर दिया था. इसका इस्तेमाल नक्सलियों ने तो किया है, लेकिन कश्मीर में आतंकवादी भी अब इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. 2014 में Line Of Control पर सौजियां के पास पाकिस्तानी सेना ने ऐसी ही एक Mine लगाई थी, जिसमें दो लोग मारे गए थे.

Claymore Mine के साथ आज एक और घातक हथियार सेना को मिला. सुरक्षाबलों ने एक अमेरिकी Sniper Rifle बरामद की है... ये एक किलोमीटर दूर तक टारगेट पर सटीक वार कर सकती है. यानी आतंकवादी सुरक्षा दायरे से दूर रहते हुए अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाना चाहते थे. ये दोनों हथियार इस बात का सबूत हैं कि पाकिस्तान अब भी कश्मीर में आतंकवाद फैला रहा है.

अमरनाथ यात्रा में अब तक सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था...लेकिन यात्रा रूट के पास दो ऐसे हथियार बरामद हुए हैं...जिन्हें देखते हुए श्रद्धालुओं की जान को ख़तरा बढ़ गया है.
ये है वो क्लेमोर माइन...जो पाकिस्तान में बनी है...इसे सुरक्षाबलों ने अमरनाथ यात्रा के रूट में शेषनाग के पास बरामद किया...
और साथ में है वो स्नाइपर राइफल जो सैकड़ों मीटर दूर से किसी की जान ले सकती है. अमरनाथ यात्रा में आतंकी हमले का ये नया तरीक़ा था...जिसे सुरक्षाबलों ने वक़्त रहते नाकाम कर दिया.

जो माइन बरामद हुई है...उसे ख़ासतौर से एक से ज़्यादा लोगों की जान लेने के लिये बिछाया गया था. 

इस बात से ज़ाहिर है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की मदद से लगातार भारत को निशाना बना रहा है. घुसपैठ के लिये आतंकवादी तैयार हैं...बस ये भारत की सेना वाली दीवार है...जिसे वो आसानी से नहीं लांघ पा रहे

इन बातों और खुलासों का मतलब आप अच्छी तरह समझ सकते हैं...कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आने वाला...और इस बार उसके निशाने पर है अमरनाथ की पवित्र यात्रा..

पुलवामा हमले के बाद हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक और सेना के ऑपरेशन All Out के बाद आतंकवादियों के हौसले पस्त हैं. जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में आतंकी संगठनों को कमांडर मिलने भी बंद हो गए. घाटी का कोई आतंकी जैसे ही किसी Terror ग्रुप का चीफ बनता है उसका काउंटडाउन शुरू हो जाता है. यही वजह है कि घाटी के आतंकी संगठन Headless Chicken यानी बिना कमांडर के ग्रुप हैं.

आज 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल KJS ढिल्लन ने आतंकियों की घटती उम्र के बारे में बताया. अलगाववादियों के बहकावे में आकर आतंकवाद के रास्ते पर चलने वालों को आज लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन के एक-एक शब्द पर गौर करना चाहिए

- आतंक के रास्ते पर जाने वाले 7 फीसदी आतंकियों का बंदूक उठाने के पहले 10 दिनों में ही एनकाउंटर हो गया
- भारतीय सेना के खिलाफ आतंकी संगठन Join करते ही आतंकियों की उम्र अचानक कम हो जाती है. 
- औसतन एक आतंकवादी 298 दिनों के भीतर ही एनकाउंटर हो जाता है. यानी भारत के खिलाफ हथियार उठाने वालों का घाटी में ज्यादा दिनों तक बचना नामुमकिन होता है.

पत्थरबाजों को लेकर नरम रवैया अपनाने वाले महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार को भी सेना के शब्दों पर ध्यान देना चाहिए. आज ये भी बताया गया कि आतंक के रास्ते पर जाने वाले 83 फीसदी नौजवान कभी पत्थरबाज थे...यानी अगर कोई बच्चा 500 रुपये के लिए भारतीय जवानों पर पत्थर फेंकता है, तो उसका आतंकी बनना करीब-करीब तय है.