ZEE जानकारी: जानें कैसे हुआ था देश का पहला आम चुनाव

आज हम भारत के पहले लोकसभा चुनाव से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां देंगे और आपको ये भी बताएंगे कि उस दौर में विपक्ष की क्या हालत थी.

ZEE जानकारी: जानें कैसे हुआ था देश का पहला आम चुनाव

चुनाव किसी भी देश के लिए बहुत शुभ होते हैं. इसलिए चुनाव के इस शुभ अवसर पर हम आपके लिए कुछ Extra रिसर्च भी कर रहे हैं. ये कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनसे आपको भारत की राजनीति को समझने में मदद मिलेगी. आज हम भारत के पहले लोकसभा चुनाव से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां देंगे और आपको ये भी बताएंगे कि उस दौर में विपक्ष की क्या हालत थी.

वर्ष 1947 में भारत आज़ाद हुआ और इसके 2 साल बाद 1949 में एक चुनाव आयोग का गठन किया गया . मार्च 1950 में प्रशासनिक अधिकारी सुकुमार सेन को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया. अप्रैल 1950 में संसद में जन प्रतिनिधि कानून पारित किया गया . 

तब चुनाव में 21 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोग ही मतदान कर सकते थे . तब मतदाताओं की कुल संख्या 17 करोड़ 60 लाख थी . इन 17 करोड़ 60 लाख लोगों में से 85 प्रतिशत अनपढ़ थे . इऩमें से करीब 10 करोड़ लोगों ने पहले आम चुनाव में वोट दिया था. 

भारत सरकार ने लोकसभा चुनाव के साथ साथ विधानसभा चुनाव करवाने का भी फैसला लिया . इस चुनाव में 2 लाख 24 हज़ार मतदान केंद्र बनाए गए थे और वहां 20 लाख मतपेटियां भेजी गई थीं . 

इन मतपेटियों को बनाने में 8 हज़ार 200 टन स्टील की ज़रूरत पड़ी थी.

पहली बार लोकसभा चुनाव 68 चरणों में हुआ था और 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक यानी करीब 119 दिन तक चला था. 

पहला वोट 25 अक्टूबर 1951 को डाला गया था. 

भारत का पहला लोकसभा चुनाव, कांग्रेस पार्टी बहुत आसानी से जीत गई थी. 

कांग्रेस को संसद में 489 में से 364 सीटों पर जीत मिली

तब 4 करोड़ 76 लाख मतदाताओं ने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया था . 

कांग्रेस ने लोकसभा में करीब 45 प्रतिशत वोट हासिल करके, 75 प्रतिशत सीटें जीत ली थीं. 

विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई थी . 

पूरे देश में 3 हज़ार 280 विधानसभा सीटों में से, 2 हज़ार 247 सीटें कांग्रेस ने जीत ली थीं. 

चुनाव प्रचार के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू को कम्यूनिस्ट पार्टियों और दक्षिणपंथी.. हिंदू वादी पार्टियों का आक्रमक विरोध झेलना पड़ा था . 

जय प्रकाश नारायण, जो पंडित नेहरू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़े थे . वो इस चुनाव में पंडित नेहरू के खिलाफ प्रचार कर रहे थे . लेकिन उनकी Socialist Party चुनाव में सिर्फ 12 सीटें जीत पाई थी.

तब Communist Party Of India ने 16 सीटें जीती थीं 

स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के पुराने सहयोगी J B कृपलानी ने भी चुनाव में पंडित नेहरू का विरोध किया था . कृपलानी ने कहा था कि पंडित नेहरू अब गांधीवादी सिद्धांतों से दूर जा चुके हैं . लेकिन उनकी किसान मजदूर पार्टी भी सिर्फ 9 सीटें जीत पाई थी. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पार्टी जनसंघ उन चुनावों में सिर्फ़ 3 लोकसभा सीटें जीत पाई थी . 

उस दौर की सबसे खास बात ये थी कि कांग्रेस पार्टी के अंदर बहुत स्वस्थ लोकतंत्र था. उस वक्त कांग्रेस किसी परिवार की पार्टी नहीं थी . सभी को अपने विचार रखने का पूरा अधिकार था . कांग्रेस पार्टी के अंदर भी ऐसे बहुत से नेता थे जो पंडित नेहरू की आलोचना करने में घबराते नहीं थे . हालांकि ऐसे नेताओं की संख्या बहुत कम थी . इसलिए उनकी आवाज़ कभी बहुत बुलंद नहीं हो सकी . 

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