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ZEE जानकारी: अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पीएम मोदी का पहला संबोधन

देश के नाम अपने 39 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया है कि Article 370 को लेकर जो नज़रिया पूरे देश पर थोपा गया...उसे ख़त्म कर दिया गया है. 

ZEE जानकारी: अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पीएम मोदी का पहला संबोधन

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश के साथ संवाद किया . रात 8 बजे प्रधानमंत्री ने अपना ये संबोधन शुरू किया . जिसका देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को इंतजार था . आज हम इस पूरे संवाद का विश्लेषण दिखाएंगे. 

आज देश के नाम अपने 39 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया है कि Article 370 को लेकर जो नज़रिया पूरे देश पर थोपा गया...उसे ख़त्म कर दिया गया है. Article 370 भारत में पिछले 70 वर्षों से समान व्यवस्था का सबसे बड़ा दुश्मन बना हुआ था.

17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 देश पर बोझ बनकर थोपा गया था. और अब इस ऐतिहासिक भूल को 69 वर्षों, 9 महीनों और 20 दिन बाद मोदी सरकार ने सुधार दिया है.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत को एक परिवार के तौर पर पेश किया है, जिसका हिस्सा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ की जनता भी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत बदल गया है. उन्होंने अपने संबोधन में देश के कुछ महापुरुषों का भी ज़िक्र किया, सरदार पटेल से लेकर डॉ भीमराव अंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों की बात भी की.

आज प्रधानमंत्री मोदी के इस संबोधन का कई अंतरराष्ट्रीय चैनलों ने Live प्रसारण किया है.
वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके संबोधन को इस तरह अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने Live Telecast किया है. इससे ज़ाहिर है कि आज पूरी दुनिया की नज़र भारत पर है. 

प्रधानमंत्री मोदी ने आज कहा कि वर्ष 1949 में भारत में लागू की गई दो व्यवस्थाओं ने जम्मू-कश्मीर की बेटियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है. Article 370 ख़त्म होने के बाद उनको इंसाफ़ मिल गया है.
((अब तक ये व्यवस्था थी कि जम्मू कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले, तो उसकी जम्मू-कश्मीर वाली नागरिकता खत्म हो जाती है. लेकिन ))

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र को मज़बूत करने की बात कही है....जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ की भागीदारी बहुत ज़रूरी होगी. 
((उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने का फ़ैसला तत्कालिक है...और जल्द ही हालात बेहतर होने पर जम्मू-कश्मीर को राज्य बना दिया जाएगा.))

आज कश्मीर घाटी की आबादी क़रीब 55 लाख है...जबकि जम्मू की आबादी 70 लाख से ज़्यादा है...जबकि लद्दाख़ की आबादी 3 लाख है. लेकिन अब तक कश्मीर घाटी को ज़्यादा फायदा पहुंचाया था...ये अब तक जम्मू-कश्मीर में रही सरकारों की तुष्टिकरण वाली नीति थी...जबकि लद्दाख़ को कम आबादी की वजह से अहमियत नहीं दी जाती थी.

आज प्रधानमंत्री ने कहा है कि अब इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के फ़ैसले वहीं के लोग करेंगे...उन्हीं के बीच से नेता चुने जाएंगे..((.वहीं से विधायक और सांसदों का चुनाव भी होगा. इसलिये अब वक़्त आ गया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ पर अब कुछ परिवारों का नहीं...बल्कि वहां की जनता का अधिकार हो,)) सही मायने में यही लोकतंत्र की जीत होगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने जो सबसे अहम बात कही वो ये कि जम्मू-कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगे. ((प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ मुट्ठी भर लोग जम्मू-कश्मीर में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.)) प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की साजिशों का भी जिक्र किया और कहा कि घाटी में अलगाववाद और आतंकवाद का जवाब कश्मीर के ही देशभक्त दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे देशभक्तों और भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों पर गर्व जताया है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नए भारत, नए कश्मीर और नए लद्दाख का नारा दिया . हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की अपील पर जम्मू-कश्मीर के 1 करोड़ 25 लाख लोग और लद्दाख के 3 लाख लोग अवश्य ध्यान देंगे . प्रधानमंत्री ने अपने 39 मिनट के संबोधन में जम्मू-कश्मीर के उन शहीदों को भी याद किया जिन्होंने जम्मू-कश्मीर की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए .

प्रधानमंत्री मोदी ने आज कहा है कि Article 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के विकास में तेज़ी आएगी. 

दरअसल जम्मू-कश्मीर अब तक पर्यटन पर निर्भर रहा है. होटल और पर्यटन से जुड़े उद्योग जम्मू-कश्मीर की आय का 15 प्रतिशत ज़रिया है. यहां की 50 प्रतिशत आबादी इस सेक्टर से जुड़ी हुई है.

लेकिन अब यहां और क्षेत्रों में भी निवेश आएगा. बाकी देश के लोग जब यहां उद्योग-धंधे खोलेंगे, तो लोगों को रोज़गार मिलेगा और आतंकवाद में कमी आएगी. एक बड़ा बदलाव ये भी आएगा, कि सेना की मौजूदगी पर होने वाला खर्च धीरे-धीरे कम होता जाएगा. लद्दाख के अलग होने से उसका विकास भी तेज़ी से होगा. क्योंकि, अभी तक घाटी के नेता लद्दाख़ की तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं देते थे.

अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में Investors Summit होने वाला है. इसकी शुरुआत श्रीनगर में होगी...जबकि ये समिट जम्मू में ख़त्म होगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस समिट में शामिल हो सकते हैं. ये जम्मू-कश्मीर के लिये बड़ा मौक़ा होगा...जब यहां निवेश के नई संभावनाएं सामने आएंगी.

आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में प्रॉपर्टी की क़ीमत 50 प्रतिशत बढ़ गई है क्योंकि अब बाक़ी भारत के लोग यहां ज़मीन ख़रीद पाएंगे. इसका फ़ायदा स्थानीय लोगों को ही होगा.
((Cii यानी Confederation of Indian Industry ने जम्मू-कश्मीर में विकास के लिये 10 बातों पर ज़ोर दिया है.
इसमें पर्यटन से लेकर infrastructure और खेती के आधुनिक तरीक़ों पर ज़ोर दिया गया है.))
कश्मीर में आज डेयरी उत्पाद बनाने वाली कई कंपनी जम्मू-कश्मीर में निवेश करना चाहती है और इसके लिये उसकी जम्मू-कश्मीर डेयरी फेडरेशन के साथ बात चल रही है.
होटल उद्योग से जुड़ी कई कंपनियां गुलमर्ग और सोनमर्ग में कई बड़े होटल खोलना चाहती हैं.
इनमें कुछ कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर में क़रीब 1000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश करने बात कही है.

ये लिस्ट बहुत लंबी है...इसलिये आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि जम्मू-कश्मीर के अच्छे दिन आने वाले हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने आज अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर के हर पहलुओं को छूने की कोशिश की . प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की परंपरा से लेकर खानपान के बारे में भी बात की.

इस संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर और सिनेमा के रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कैसे आर्टिकल 370 और आतंकवाद ने इस रिश्ते में दरार डाली दी थी . उन्होंने उम्मीद जताई है कि अब कश्मीर एक बार फिर से फिल्मों की शूटिंग का अंतर्राष्ट्रीय Hub बन जाएगा.