ZEE जानकारी: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ

राहुल गांधी बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में ED यानी Enforcement Directorate के सामने पेश हुए.

ZEE जानकारी: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ

हमारे देश में अगर कोई बड़ा नेता किसी आपराधिक मामले में फंसता है तो उसकी पहली कोशिश ये होती है कि वो अपनी गिरफ़्तारी, अपने खिलाफ होने वाली जांच और किसी भी अन्य कार्रवाई को एक राजनीतिक Event बना दे. ऐसे मौके पर हमारे नेता तुरंत अपना राजनीतिक मंच सजा लेते हैं, और कैमरे वाली राजनीति शुरू कर देते हैं. इस राजनीति में इतनी ऊर्जा होती है कि ये चुटकियों में पूरे देश को अपने प्रभाव में ले लेती है. ऐसे नेताओं को ये पता होता है कि अगले दिन अखबारों में कौन सी फोटो छपेगी ? कैसे जनता का दिल पसीजेगा? और किस तरह सही और गलत के बीच फ़र्क बताने वाली रेखा, धुंधली पड़ जाएगी. 

आज सोनिया गांधी के दामाद और राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा ने भी ऐसा ही किया. वो आज मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में ED यानी Enforcement Directorate के सामने पेश हुए. ये पूरा मामला क्या था? और इसमें रॉबर्ट वाड्रा कैसे फंसे हैं, इसकी जानकारी हम आपको आगे देंगे. लेकिन सबसे पहले आपको ये दिखाते हैं कि कैसे रॉबर्ट वाड्रा ने प्रियंका वाड्रा की मदद से अपनी इस पेशी को एक राजनीतिक Event बना दिया. 

रॉबर्ट वाड्रा को ED के दफ्तर में छोड़ने के लिए आज उनकी पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा आई थीं. उन्हें पता था कि ED के दफ्तर के बाहर पूरे देश का मीडिया उनके पति का इंतज़ार कर रहा है. और इसी लाइट, कैमरा और एक्शन के बीच रॉबर्ट वाड्रा ED के सामने पेश हुए. ये एक तरह से कैमरे वाली राजनीति है. 

दो दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ऐसा ही किया था. जब CBI कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने गई थी. लेकिन इसके खिलाफ ममता बनर्जी ने 45 घंटे से ज्यादा का धरना दे दिया. ममता बनर्जी ये जानती थीं कि कोलकाता के पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सारदा और Rose Valley घोटाले में गंभीर आरोप हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपने अफसर को बचाने के लिए राजनीतिक धरने का इस्तेमाल किया. और इस पूरे मामले को लोकतंत्र की हत्या बता दिया. यानी एक घोटाले का मामला, लोकतंत्र से जुड़ गया और फिर CBI को सुप्रीम कोर्ट जाकर राजीव कुमार से पूछताछ के आदेश लाने पड़े. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ममता बनर्जी को अपना धरना खत्म करना पड़ा. 

पिछले वर्ष, मार्च में.. CBI ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया था. कार्ति पर रिश्वतखोरी और Money Laundering जैसे कई गंभीर आरोप हैं. लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद कार्ति चिदंबरम ने इस तरह Victory Sign दिखाया था, जैसे उन्होंने देश के लिए कोई बहुत बड़ी जंग जीती हो.

इससे पहले 19 दिसंबर 2015 को राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने भी, अपनी पेशी को, ऐसे ही शक्ति प्रदर्शन का ज़रिया बनाया था. नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होना पड़ा था. हालांकि इस पेशी को टालने के लिए दोनों की तरफ से हर तरह के कानूनी दांवपेंच का सहारा लिया गया था. लेकिन जब उनकी पेशी की बारी आई, तो कांग्रेस ने इस पेशी को एक राजनीतिक Event बना दिया. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के दफ्तर से अदालत तक पैदल मार्च किया था. 

और आज हमें करीब 22 साल पहले की वो तस्वीरें भी याद आ रही हैं, जब लालू यादव पहली बार जेल गए थे. 1997 में लालू यादव को पहली बार चारा घोटाले के मामले में जेल जाना पड़ा था. जेल जाने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया था. और फिर पूरे लाव-लश्कर के साथ वो जेल गए थे. जैसे ही वो जेल जाने के लिए निकले थे, उनके समर्थकों ने ऐसे नारेबाज़ी की थी कि जैसे लालू यादव जेल नहीं जा रहे हों, बल्कि देश के लिए शहादत देने जा रहे हों. आप लालू यादव की जेल जाने की ये तस्वीरें देखिए और समझिए कि अपने खिलाफ होने वाली कार्रवाई का राजनीतिक फायदा उठाने का ये फॉर्मूला भारतीय राजनीति में कितना पुराना है. 

अब ये देखिए कि आज क्या हुआ. आज दिल्ली में ED के दफ्तर में रॉबर्ट वाड्रा से कई घंटों तक पूछताछ हुई. शाम को 4 बजे रॉबर्ट वाड्रा पूछताछ के लिए ED के सामने पेश हुए थे. बीजेपी रॉबर्ट वाड्रा पर पिछले कई वर्षों से घोटाले और रिश्वतखोरी के आरोप लगाती रही है. लेकिन आज तक रॉबर्ट वाड्रा किसी भी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे. ये पहली बार था, जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा को किसी जांच एजेंसी के सामने पेश होना पड़ा. आज ED ने रॉबर्ट वाड्रा से बहुत से कठिन और कड़े सवाल भी पूछे. जिनमें से बहुत से सवालों का रॉबर्ट वाड्रा ने सही जवाब नहीं दिया. आगे हम आपको ये बताएंगे कि रॉबर्ट वाड्रा से ED ने कौन से मुश्किल सवाल पूछे. लेकिन उन सवालों को समझने के लिए आपको सबसे पहले ये मामला समझना होगा. क्योंकि इस मामले को समझे बगैर आप ये पूरी ख़बर नहीं समझ पाएंगे. 

तो सबसे पहले आपको ये समझाते हैं कि ये कौन सा मामला है, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ हुई? 

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने UPA सरकार के ज़माने में हुई दो Deals से मिले पैसों से London में संपत्ति खरीदी. 

2009 में एक पेट्रोलियम डील हुई थी और 2011-12 में एक डिफेंस डील हुई थी. आरोपों के मुताबिक इन दो Deals में रॉबर्ट वाड्रा की अहम भूमिका थी, और उन्हें इसका लाभ दिया गया था. 

2009 में हुई पेट्रोलियम डील से Santech International नाम की एक कंपनी को दलाली के पैसे मिले थे. और ये कंपनी संजय भंडारी नामक एक Arms Dealer की है. संजय भंडारी.. को रॉबर्ट वाड्रा का दाहिना हाथ माना जाता है. 

2016 में संजय भंडारी देश छोड़ कर भाग गया था और इस समय लंडन में है. 

लेकिन ED का आरोप है कि इसी पेट्रोलियम डील की दलाली से संजय भंडारी ने दिसंबर 2009 में London में एक फ्लैट खरीदा . 

इस फ्लैट को खरीदने में 1.9 मिलियन पाउंड खर्च किए गए और इसके रखरखाव और Maintenance करने में 65 हज़ार 900 पाउंड खर्च किए गए. 

लेकिन बाद में ये फ्लैट 30 जून 2010 को 1.9 मिलियन पाउंड में बेच दिया गया. ED के मुताबिक संजय भंडारी ने 1.9 मिलियन पाउंड में पहले फ्लैट खरीदा और फिर रेनोवेशेन करवाकर उसी कीमत पर वापिस बेच दिया. और इसमें रेनोवेशन का पैसा भी नहीं लिया गया. जिससे साबित होता है कि संजय भंडारी इसके असली मालिक नहीं थे, बल्कि वो इसके रेनोवेशन का खर्चा उठाने के लिये कुछ समय के लिए सामने आये थे .

ED के मुताबिक संजय भंडारी की कंपनी Santech international ने फ्लैट बेचने के बाद पूरा पैसा SkyLite Investment नामक कंपनी के खाते में जमा किया और ED के मुताबिक ये कंपनी रॉबर्ट वाड्रा की है. 

संजय भंडारी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर 2016 में Official Secrets Act के तहत मामला दर्ज किया था. ये मामला रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था. इसी मामले के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करके अपनी जांच शुरू की थी. 

इसके अलावा संजय भंडारी के खिलाफ इनकम टैक्स की भी जांच चल रही है. 
2016 में इनकम टैक्स विभाग ने जब संजय भंडारी के ठिकानों पर छापा मारा था, तो बहुत सारे दस्तावेज़ मिले थे, जिनसे ये पता चला था कि संजय भंडारी की विदेशों में जो संपत्ति है, उसके Links रॉबर्ट वाड्रा से हैं. 

ED का ये भी कहना है कि जांच में London में इस प्रोपर्टी के अलावा दो और घरों का पता चला है, जिनकी कीमत 4 और 5 मिलियन पाउंड है. और इनके अलावा 6 और Flats के बारे में पता चला है, जिनके Links रॉबर्ट वाड्रा से हो सकते हैं. 

ED की इस पूछताछ के शुरू से होने से पहले ही रॉबर्ट वाड्रा अदालत पहुंच गए थे. शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने ED द्वारा रॉबर्ट वाड्रा की गिरफ्तारी पर 16 फरवरी तक रोक लगा दी थी. और ED को आज यानी 6 फरवरी को पूछताछ करने की इजाज़त दी थी. 

इससे पहले दिसंबर 2018 में ED ने रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी में काम करने वाले दो कर्मचारियों और उनके एक करीबी के ठिकानों पर छापेमारी की थी. 

ये छापेमारी दिल्ली-NCR और बेंगलुरू में हुई थी.

जिन तीन लोगों के यहां छापेमारी हुई थी, उनमें एक नाम मनोज अरोड़ा का भी था, जो कि राबर्ट वाड्रा का सेक्रेटरी बताया जाता है. 

ED के सूत्रों के मुताबिक इन लोगों के नाम पर एक डिफेंस डील के पैसों से देश से बाहर प्रॉपर्टी खरीदी गई थी और ये पैसा इन तीनों के खाते में आया था. 

संजय भंडारी के बाद मनोज अरोड़ा के खिलाफ Black Money Act के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था.

अब तक ED मनोज अरोड़ा से दो बार पुछताछ कर चुकी है और आज मनोज अरोड़ा की अग्रिम जमानत पर होने वाली सुनवाई को 16 फरवरी तक टाल दिया गया है. उसी दिन रॉबर्ट वाड्रा की याचिका पर भी सुनवाई होनी है. 

अब तक आप ये पूरा मामला समझ गए होंगे. इसी मामले में आज ED के 7 लोगों की टीम ने रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ की. इस टीम में ED के Deputy Directory राजीव शर्मा और Assistant Director M. L. शर्मा भी शामिल थे. रॉबर्ट वाड्रा से पूछने के लिए 40 से ज्यादा सवालों की लिस्ट बनाई गई थी. 

ED ने रॉबर्ट वाड्रा से उनके और संजय भंडारी के Links को लेकर सवाल पूछे. और सूत्रों के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा ने संजय भंडारी को पहचानने से ही इंकार कर दिया. 

इसके बाद ED के अधिकारियों की तरफ से ये कहा गया कि अगर आप संजय भंडारी को नहीं जानते हैं, तो लिखित में बताएं. 

सूत्रों के मुताबिक इसके बाद ED के अधिकारियों ने रॉबर्ट वाड्रा को चेतावनी दी कि अगर आप गलत बयानबाज़ी करेंगे, तो आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. 

इसके अलावा ED ने ये पूछा कि संजय भंडारी ने London में जो फ्लैट खरीदा था और फिर उसी कीमत पर बेच दिया, और फिर वो पैसा आपके खाते में आया. इसका क्या जवाब है?

रॉबर्ट वाड्रा से मनोज अरोड़ा को लेकर भी सवाल जवाब हुए. ED ने पूछा कि मनोज अरोडा क्या काम करता है? 

वो कब से आपके साथ काम करता है और उसके खाते में करोडों रुपये कैसे आये, जिससे London में संपत्ति खरीदी गयी? 

इसके अलावा ED ने रॉबर्ट वाड्रा से ये भी पूछा कि उनकी London में कितनी संपत्ति है? 

ये भी पूछा गया कि जो दो घर और 6 Flat हैं, वो किसके हैं? 

हमारे सूत्रों के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा ने ED के कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है. इसीलिए ED ने उन्हें कल फिर से पूछताछ के लिए बुलाया है. 

यहां एक बात समझनी ज़रूरी है कि PMLA यानी Prevention of Money Laundering Act के तहत जब कोई जांच अधिकारी किसी आरोपी से पूछताछ करता है, तो आरोपी का बयान अदालत में Admissible यानी स्वीकार्य होता है. इस कानून के तहत आरोपी से उसी की Hand Writing में बयान लिखवाया जाता है. इसीलिए आज रॉबर्ट वाड्रा से भी सभी सवालों के जवाब लिखित में लिए गए. यानी रॉबर्ट वाड्रा आज अपने जवाबों में जो कुछ भी बताएंगे, वो बाद में अदालत में उससे मुकर नहीं सकते. 

इस पूछताछ को लेकर आज बीजेपी ने रॉबर्ट वाड्रा पर बहुत से गंभीर आरोप लगाए. बीजेपी ने ये सवाल पूछा कि रॉबर्ट वाड्रा अचानक करोड़पति कैसे बन गए? 

इन राजनीतिक घटनाक्रमों से ऐसा लगता है कि आने वाले वक्त में रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं. क्योंकि 12 फरवरी को रॉबर्ट वाड्रा को ED के जयपुर के दफ्तर में पेश होना है. ये मामला बीकानेर लैंड डील का है, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा पर गंभीर आरोप हैं. 

ये मामला वर्ष 2008 में शुरू हुआ था जब वाड्रा की कंपनी ने 72 लाख रुपये में बीकानेर में ज़मीन खरीदी थी . 

वर्ष 2010 में 72 लाख की ज़मीन 5 करोड़ 15 लाख रुपये में बेची गई . 

वर्ष 2013 में राजस्थान में चुनाव हुए . बीजेपी ने चुनाव जीता और अशोक गहलोत की जगह वसुंधरा राजे सिंधिया मुख्यमंत्री बनीं .

2015 में वसुंधरा सरकार ने करीब 374 हेक्टेयर ज़मीन का सौदा रद्द कर दिया. FIR के आधार पर ED ने भी इस मामले में आपराधिक केस दर्ज किया . 9 अप्रैल 2018 को ED ने ज़मीन को Cease कर दिया और नवंबर 2018 में ED ने रॉबर्ट वाड्रा को Summon भेजा . 

और अब 12 फरवरी को रॉबर्ट वाड्रा को पेश होना है. 

वैसे हमारे देश में नेतागीरी को हर तरह के ज़िद्दी दाग धोने वाली वॉशिंग मशीन माना जाता है. सवाल ये है कि क्या भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए रॉबर्ट वाड्रा अब नेता बनना चाहते हैं. आज दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय के आसपास कुछ पोस्टर लगाए गये थे, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के साथ रॉबर्ट वाड्रा की तस्वीर भी मौजूद थी. इस पोस्टर का शीर्षक था.. कट्टर सोच नहीं, युवा जोश. ये पोस्टर How's the Josh वाले मूड से बनाया गया था.. लेकिन जैसे-जैसे दिन गुज़रा, ये जोश ठंडा पड़ता गया. क्योंकि दोपहर में ही NDMC यानी New Delhi Municipal Council ने ये सभी पोस्टर हटा दिए. वैसे इस इलाके में पोस्टर लगाने की इजाज़त नहीं है. 

इस पूरे मामले में प्रियंका वाड्रा की तारीफ करनी होगी. उनके समर्थक उनमें इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं. और आज उन्होंने बता दिया कि ऐसा क्यों है.
प्रियंका वाड्रा का सबसे बड़ा राजनीतिक बैगेज या बोझ.. रॉबर्ट वाड्रा हैं. लेकिन प्रियंका ने अपने इस राजनीतिक बैगेज को छोड़ा नहीं. बल्कि उन्होंने पूरे देश को ये बता दिया कि वो अपने पति के साथ खड़ी हैं. और हमारे देश का संस्कारी समाज एक पत्नी को हमेशा इसी रूप में देखना चाहता है. और प्रियंका ने ऐसा करने की हिम्मत दिखाई.

वैसे प्रियंका वाड्रा के लिए आज का दिन बहुत मुश्किल था. आज मजबूर होकर उन्होंने कांग्रेस के महासचिव का कार्यभार भी संभाला है, पहले ये योजना थी कि वो कल अपना पद संभालेंगी. लेकिन आज परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि उन्हें अपनी पार्टी कांग्रेस और अपने पति रॉबर्ट वाड्रा, दोनों को संभालना पड़ा . 

रॉबर्ट वाड्रा को ED के दफ़्तर में छोड़ने के बाद प्रियंका वाड्रा वापस कांग्रेस के दफ़्तर, 24 अकबर रोड चली गईं. 
ED के दफ्तर से कांग्रेस के दफ्तर की दूरी सिर्फ 500 मीटर है. यहां प्रियंका वाड्रा करीब 15 मिनट तक रहीं. और उन्होंने कुछ लोगों से मुलाकात भी की. और फिर वो यहां से चली गईं.