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ZEE जानकारी: क्या है गुरुग्राम की खबर का सच!

दिल्ली के पास गुरुग्राम की एक खबर पिछले तीन दिनों से बहुत में चर्चा है. सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों पर दिखाया जा रहा है कि वहां नमाज़ पढ़कर लौट रहे एक मुस्लिम युवक को कुछ लोगों ने पीटा, उसकी टोपी उतार दी. उस पर भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे लगाने का दबाव डाला.

ZEE जानकारी: क्या है गुरुग्राम की खबर का सच!

दिल्ली के पास गुरुग्राम की एक खबर पिछले तीन दिनों से बहुत में चर्चा है. सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों पर दिखाया जा रहा है कि वहां नमाज़ पढ़कर लौट रहे एक मुस्लिम युवक को कुछ लोगों ने पीटा, उसकी टोपी उतार दी. उस पर भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे लगाने का दबाव डाला.

टुकड़े-टुकड़े गैंग इस खबर से ये प्रचार कर रहा है कि लोकतंत्र खतरे में है...लेकिन, गुरुग्राम पुलिस ने आज टुकड़े-टुकड़े गैंग के इस झूठ का पर्दाफ़ाश कर दिया है. आज आप को इस घटना का पूरा सच जानना चाहिए. ताकि, आपको पता चले कि घटना क्या थी. और उसे किस तरह से धार्मिक रंग दिया गया.

हमारे पास प्रमाण के रूप में उस cctv फुटेज की तस्वीर है, जो पुलिस ने जारी की है. और FIR की कॉपी है, जो पीड़ित ने दर्ज करायी है.

FIR में लिखा है कि ये घटना 25 मई की रात की है. 25 वर्ष का मोहम्मद बरकत आलम उस रात गुरुग्राम के सदर बाजार की बड़ी मस्जिद में नमाज़ पढ़कर लौट रहा था. रात सवा दस बजे 6 लोग बरकत आलम के पास आए.. इनमें से 4 लोग बाइक पर थे और दो लोग पैदल चल रहे थे...पैदल चल रहे दो लोगों ने बरकत के साथ मारपीट की..ये भी कहा कि इस इलाके में आप टोपी पहनकर नहीं जा सकते..बरकत ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने शराब पी हुई थी.

अब इस तस्वीर को देखिए - cctv फुटेज से ली गई इस Still Picture में दो लोग दिख रहे हैं. एक बरकत है और दूसरा आरोपी है. इस फ़ोटो में तारीख़ और समय लिखा है- 25 मई, रात 9 बजकर 58 मिनट. यानी जब ये विवाद हो रहा था, उस वक्त दो लोग ही थे...एक आरोपी और दूसरा पीड़ित बरकत आलम
अब आपको ये जानना चाहिए कि FIR दर्ज कराने के बाद बरकत ने मीडिया को क्या बताया और उस बयान पर पुलिस के क्या दावे हैं...

बरकत ने कहा कि उसके साथ पैदल चल रहे लोगों ने मारपीट की. जब पुलिस ने cctv फुटेज को देखा तो पता चला कि बरकत की लड़ाई सिर्फ एक लड़के से हुई थी, जिसने शराब पी हुई थी

पीड़ित ने मीडिया से कहा कि उसकी टोपी फेंक दी गई. लेकिन, पुलिस का कहना है कि आरोपी ने उसके सिर पर हमला किया. इससे उसकी टोपी नीचे गिर गई.

बरकत ने मीडिया में आरोप लगाया कि उससे जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगवाए गए..जबकि FIR में बरकत ने ऐसा नहीं लिखवाया.

इस मामले पर गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद अकील ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की.. उन्होंने कहा कि इस झगड़े को जो धार्मिक रंग दिया जा रहा है, वो सच नहीं है. बरकत के बदले बयान के पीछे कौन लोग हैं..गुरुग्राम पुलिस इसका भी पता लगाएगी

((बाइट- मोहम्मद अकील, पुलिस कमिशनर, गुरुग्राम पुलिस
((23 मिनट के आस-पास काउंटर पर मिलेगा....बाइट है- मुझे लग रहा है कि उसे कुछ सिखाया गया है...ट्विटर्ड किया गया है))

गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर ने जिस तरफ इशारा किया, वो वही लोग हैं जो देश में हिंदू-मुसलमान के बीच तनाव की झूठी कहानियां बनाने और फैलाने में लंबे समय से जुटे हैं. 

इनके काम करने का एक ख़ास तरीक़ा है. ऐसे दुष्प्रचार की एक रेसिपी है. आज हम आप को वो रेसिपी बताते हैं.  पहले एक ख़ास समुदाय से जुड़ी हुई कोई ख़बर आती है. फिर उससे जुड़ा वीडियो आता है. जिसे कुछ ख़ास पार्टियों के लिए प्रचार करने वाली न्यूज़ वेबसाइट प्रमुखता से जगह देती हैं. वीडियो और इससे जुड़ी ख़बर को ट्रेंड कराया जाता है. फिर कुछ दलों के नेता इस पर बयान देने लगते हैं. टीवी चैनल इस पर बहस करने लगते हैं. फिर आप को बताया जाता है कि लोकतंत्र ख़तरे में है.
ऐसा ही ख़तरा टुकड़े-टुकड़े गैंग को उस घटना में दिखा था, जो 21 मार्च को गुरुग्राम में हुई थी. 

21 मार्च को गुरुग्राम के भोंडसी में दो पक्षों में क्रिकेट की गेंद लगने से झगड़ा हो गया था. इसके बाद, एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के घर में घुसकर लाठी-डंडे और पत्थर से मार-पीट की. पीड़ित ने कहा, हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा नहीं है. पुलिस ने भी कहा कि लड़ाई खेल की है. लेकिन, पहले इस झगड़े का Video सोशल मीडिया पर Viral हुआ.

फिर कुछ नेताओं के बयान आए. मोहल्ले की लड़ाई को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की पूरी कोशिश की गई. वहां पर विवाद तो क्रिकेट खेलने को लेकर हुआ था. लेकिन एक ख़ास तरह की राजनीति करने वालों ने उसे दो धर्मों का झगड़ा बना दिया. और, इसके बाद धार्मिक सहिष्णुता पर बड़ी बहस छिड़ गई.
लेकिन, टुकड़े-टुकड़े गैंग की इस रेसिपी में भी एक twist है. अगर पीड़ित मुस्लिम है, तो अलग है और हिंदू है, तो अलग.
हमने इसी महीने दिल्ली में हुई घटना में ये देखा.

दिल्ली के मोतीनगर में 11 मई को ध्रुव राज त्यागी की हत्या कर दी गई. ध्रुव राज को इसलिए मार डाला गया, क्योंकि वो अपनी बेटी से छेड़छाड़ का विरोध कर रहे थे. आरोपी मुस्लिम थे. लेकिन, इस घटना से धार्मिक सहिष्णुता ख़तरे में नहीं पड़ी. न ही वो गैंग सक्रिय हुआ, जो आपको लोकतंत्र ख़तरा में है...ये कहकर बार-बार डराता आया है.

हम किसी खबर या घटना को हिंदू-मुस्लिम या सांप्रदायिक चश्मे से नहीं देखते...हमारा स्पष्ट मानना है कि दो पक्षों के आपसी विवाद को धार्मिक रंग देना 100 प्रतिशत गलत है. और इस तरह की साजिश करने वालों से आपको सावधान रहना चाहिए.

आपने चुनाव में महामिलावट का जिक्र सुना. ठीक इसी तरह खबरों में भी महामिलावट का दौर चल रहा है. जिस तरह आपने चुनाव में महामिलावट को नकार दिया, हमें उम्मीद है कि आप सोशल मीडिया पर होने वाली महामिलावट को और कई न्यूज़ चैनलों पर खबरों में महामिलावट को भी ठुकरा देंगे. इसके लिए आपको क्या-क्या करना चाहिए, ये नोट कर लीजिए.

सोशल मीडिया पर Viral Video पर तब तक विश्वास नहीं कीजिये, जब तक उस वीडियो की सच्चाई को जांच ना लें. ऐसे किसी भी Video, Tweet या Facebook Post, को शेयर न करें, जिससे सांप्रदायिक तनाव भड़कने का डर हो. किसी भी ख़बर पर विवाद हो, तो, सबसे पहले ये जानें कि पुलिस क्या कहती है. निजी लड़ाई को हिंदू-मुस्लिम लड़ाई दिखाने की साजिश करने वालों से आप ख़ुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं

ध्यान रखिए आपकी एक ग़लती से देश में ग़लत संदेश जा सकता है, माहौल बिगड़ सकता है .

हमारे देश में लोकतंत्र बहुत जल्दी ख़तरे में आ जाता है. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, पर ख़तरे में है. सबसे बड़े लोकतंत्र ने सबसे बड़ा चुनाव पूरा कर लिया. लेकिन, लोकतंत्र ख़तरे में है. इस चुनाव में 60 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने वोट डाला, फिर भी लोकतंत्र मुश्किल में है. जनता ने बीजेपी के खाते में 22 करोड़ से ज़्यादा वोट डाले. लोकतंत्र को ख़तरे में बताने वाली कांग्रेस को इस बार सिर्फ़ 11 करोड़ वोट मिले. आप को भी सोचना होगा कि लोकतंत्र ख़तरे में है, या फिर टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग ख़तरे में हैं.

भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति हमारा संविधान है. लोकतंत्र संविधान से चलता है . और संविधान की नज़र में देश का हर नागरिक एक बराबर है. समानता का अधिकार, हमें हमारे संविधान ने दिया है . 

संविधान के अनुच्छेद-15 में कहा गया है कि धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी व्यक्ति से भेदभाव नहीं किया जाएगा.
हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ. तब संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं था. इसे वर्ष 1976 में संविधान के 42वें संशोधन के जरिये जोड़ा गया.