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ZEE जानकारी: आखिर कब लगेगी अवैध निर्माण पर रोक

रविवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन में एक अवैध होटल की चार मंज़िला इमारत ढह गई थी. मंगलवार को मुंबई के डोंगरी में भी एक अवैध इमारत गिर गई है. 

ZEE जानकारी: आखिर कब लगेगी अवैध निर्माण पर रोक

अब हम आपको भारत के एक नये मज़हब का नाम बताएंगे...जो लोगों की जान ले रहा है . इस नये धर्म का नाम है अवैध निर्माण . ये आधुनिक भारत का नया कल्चर बन चुका है . इस नए मज़हब की बुनियाद में बढ़ती आबादी है, बेईमानी है...और इसके पीछे दूसरों की ज़िंदगी दांव पर लगाकर फ़ायदा कमाने की नीयत भरी हुई है.

इस अधर्म के अनुयायी...आम लोगों की जान ले रहे हैं. अवैध निर्माण से लेकर अतिक्रमण तक...भारत के इस नए कल्चर के पीछे देश की बढ़ती आबादी है, और इसकी वजह से देश में नियम और क़ानून...सबको दफनाया जा रहा है. हम हर हफ़्ते ऐसी घटनाएं सुनते हैं, जब कहीं कोई इमारत गिर जाती है, कहीं कोई पुल गिर जाता है...और कहीं कोई बच्चा किसी खुले गटर में बह जाता है.

अवैध निर्माण और अतिक्रमण...देश में आज ये दो ऐसी बुराई हैं...जो कोने-कोने में नज़र आती है. आप घर से निकलते हैं...तो सड़क पर अवैध निर्माण नज़र आता है. आप बाज़ार पहुंचते हैं...तो हर तरफ़ अतिक्रमण पाते हैं. इन दो बुराइयों को तलाशने के लिये आपको कोई मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन अब ये दोनों बुराई लोगों की बड़े पैमाने पर जान ले रही हैं. और जो लोग और अफ़सर इसके लिये ज़िम्मेदार हैं...वो इस ख़ुशफ़हमी में जी रहे हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. अवैध निर्माण वाले इस मज़हब ने पिछले 3 दिनों के अंदर कई लोगों की जान ले ली है. इसलिये आज इस अधर्म का DNA टेस्ट बहुत ज़रूरी है.

रविवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन में एक अवैध होटल की चार मंज़िला इमारत ढह गई थी. इस घटना में सेना के 13 जवानों के साथ एक नागरिक की मौत हो गई और आज मुंबई के डोंगरी में भी एक अवैध इमारत गिर गई है.

इस हादसे में 10 लोगों की मौत हुई है...जबकि क़रीब 30 लोग अब भी मलबे में दबे हुए हैं. मुंबई में जो चार मंज़िला इमारत आज गिरी है, उसका एक बड़ा हिस्सा अवैध तरीक़े से बनाया गया था.

ऐसी घटनाओं में मरने वालों की संख्या हमारे लिये बस ख़बर बन कर रह गई है . इन हादसों में मरने वाले लोगों के परिवार को अब ना जाने कितने दिनों तक नींद नहीं आएगी . हालांकि इसके लिये ज़िम्मेदार और दोषी अफ़सर और ठेकेदार आज रात भी चैन की नींद सोएंगे . जबकि अवैध बुनियाद पर खड़ा किया गया मुंबई शहर हर रोज़ एक नये हादसे के ख़ौफ़ में जीता रहेगा .

वैसे भी कहा जाता है कि मुंबई कभी रुकती नहीं है . लेकिन आज इस ग़लतफ़हमी पर दोबारा विचार करना ज़रूरी है. क्योंकि जो सरकारी अफ़सर और ठेकेदार इन हादसों के लिये ज़िम्मेदार हैं...वो बहुत ही ख़ामोशी से कल सुबह 9 बजे अपने दफ़्तर पहुंचेंगे...और फिर शाम 5 बजे Briefcase उठाकर घर लौट जाएंगे.

मुंबई के डोंगरी में आज जो बिल्डिंग गिरी है...उसमें क़रीब दस परिवार रहते थे और क़ायदे से BMC को इस इमारत को ख़ाली करवाकर उसे तोड़ देना चाहिये था. लेकिन इस बिल्डिंग में रह रहे लोग अपना घर छोड़ने के लिये तैयार नहीं थे . और यही वजह है कि आज ये इमारत कई ज़िंदा लोगों की क़ब्र बन चुकी है.

जिस 100 वर्ष पुराने केसरबाई Compound में ये इमारत बनी हुई थी...वो म्हाडा यानी Maharashtra Housing and Area Development Authority के तहत आता है. लेकिन म्हाडा का कहना है कि इमारत का अवैध हिस्सा क़रीब 25 साल पहले बनाया गया था. और इस अवैध निर्माण के लिये वो जवाबदेह नहीं है.

अब आपके मन में एक सवाल उठ रहा होगा कि....आखिर लोग अपनी जान दांव पर लगाकर जर्जर मकानों में क्यों रहते हैं....? आइए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं...मुंबई को एशिया के उन चुनिंदा शहरों में गिना जाता है...जहां ज़मीन सबसे महंगी है. लेकिन यहां जान बहुत सस्ती है .

महंगी प्रॉपर्टी होने की वजह से लोग डोंगरी जैसे इलाक़ों में पुराने और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर होते हैं. मुंबई में ऐसे कई मकानों का किराया क़रीब 500 रुपये महीने से शुरू होता है. मुंबई जैसे महंगे शहर में लोग पैसे बचाने के लिये यहां रहने को तैयार हो जाते हैं, चाहे फिर उनके परिवार की ज़िंदगी ख़तरे में क्यों ना पड़ जाए.
मकान मालिक भी इन घरों की मरम्मत नहीं कराता है क्योंकि इतने कम किराये में उसके लिये ये मुमकिन नहीं होता. और फिर किसी दिन ऐसी ही कोई इमारत गिर जाती है.

मॉनसून से पहले BMC ने मुंबई में 500 से ज़्यादा अवैध और जर्जर इमारतों की लिस्ट बनाई थी. लेकिन हैरान करने वाली बात है कि आज जो इमारत गिरी है...वो उस लिस्ट में शामिल नहीं थी.

लेकिन ग़लती सिर्फ़ म्हाडा या BMC की नहीं है. इस इमारत में रहने वाले लोग भी इस हादसे के लिये उतने ही ज़िम्मेदार हैं. BMC का दावा है कि वर्ष 2016 में उसने इस इमारत को ख़ाली कराने के लिये नोटिस भेजा था, लेकिन लोगों ने बिल्डिंग ख़ाली नहीं की.

जहां ये 4 मंज़िला इमारत बनी थी, वहां गलियों की चौड़ाई 5 से 6 फीट है. अवैध निर्माण और अतिक्रमण की वजह से यहां लोगों का पैदल चलना भी आसान नही है. इसीलिये फायर ब्रिगेड और NDRF के उपकरण भी घटना वाली जगह बहुत मुश्किल से पहुंच पाए. इमारत का मलबा भी मानव श्रंखला बनाकर हटाया जा रहा है. 

आपको याद होगा दो साल पहले 31 अगस्त 2017 को मुंबई में एक 6 मंज़िला इमारत गिरी थी. इस हादसे में 33 लोगों की मौत हुई थी. आप ये जानकर हैरान होंगे कि...ये हादसा भी डोंगरी इलाक़े में ही हुआ था...और आज जहां बिल्डिंग गिरी है...वहां से इसकी दूरी सिर्फ़ एक किलोमीटर है.

अफ़सोस है कि BMC और महाराष्ट्र की सरकार ने दो वर्षों में कोई सबक़ नहीं सीखा है.

मुंबई में 14 हज़ार से ज़्यादा बिल्डिंग 70 वर्षों से ज़्यादा पुरानी हैं.
मुंबई में पिछले 5 वर्षों में 2704 से ज़्यादा बिल्डिंग गिरी हैं.
और इन हादसों में 234 लोगों की मौत हुई है.

मुंबई में BMC की 80 से ज़्यादा इमारतें ख़तरनाक घोषित की गई हैं...यानी वो कभी भी गिर सकती हैं
म्हाडा और महाराष्ट्र सरकार की 40 से ज़्यादा इमारतें भी ख़तरनाक घोषित की गई हैं.
ऐसी सबसे ज़्यादा बिल्डिंग मुंबई के कुर्ला इलाके में हैं.

ये सिर्फ़ मुंबई की नहीं...बल्कि देश के हर शहर की कहानी है. हिमाचल प्रदेश...जहां 14 जुलाई को सोलन में 13 फ़ौजियों की एक अवैध होटल के ढह जाने मौत हो गई...वहां की राजधानी शिमला में 300 से ज़्यादा बिल्डिंग असुरक्षित घोषित की जा चुकी हैं...लेकिन इनमें से ज़्यादातर इमारतों में लोग आज भी रहते हैं.

दिल्ली में ही क़रीब 1800 अवैध कॉलोनी हैं जहां अवैध निर्माण करके हज़ारों घर बना लिये गये हैं. लेकिन अब दिल्ली सरकार इनमें से 1200 से ज़्यादा कॉलोनियों को वैध घोषित कर रही है. इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि वोट बैंक को लेकर भारत में क्या-क्या हो सकता है.

बैंगलुरु और आसपास के ज़िलों में 1500 से ज़्यादा छोटी और बड़ी झील हैं. लेकिन इनमें से 166 झील ही ऐसी हैं जहां अतिक्रमण नहीं हुआ है. बैंगलुरु में ज़्यादातर झीलों को पाटकर वहां मकान बना दिये गये हैं.

दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा में एक इलाक़ा शाहबेरी है. यहां कई बिल्डिंग अवैध घोषित कर दी गई हैं. लेकिन प्रशासन के आदेश के बावजूद यहां बिल्डरों का काम जारी है. भारत में हर व्यक्ति का सपना होता है कि वो अपना घर बनाये और जब वो मकान ख़रीदता है तो उसमें ख़ून पसीने की कमाई होती है. लेकिन लोग इस बात से अनजान होते हैं...कि वो मकान कभी भी गिर सकता है. ऐसा ही आज मुंबई के डोंगरी में हुआ है. और अब उन लोगों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिये जो इस हादसे के लिये ज़िम्मेदार हैं.

आज इस विषय पर हमने काफी रिसर्च की. हम ये पता लगाना चाहते थे कि ऐसी बदहाल इमारतों को लेकर आखिर सरकार के पास कोई नीति है या नहीं? हमें पता चला है कि सरकार के पास पुरानी इमारतों के लिए नीति तो है, लेकिन उसका पालन ठीक से नहीं होता है. 

जैसे ही सरकार को ये पता चलता है कि कोई इमारत रहने के लिए ख़तरनाक है...तो वो सबसे पहले नोटिस जारी करती है, और उस इमारत में रहने वाले लोगों को Building खाली करने के लिए कहती है. 

क़ायदे से ऐसे लोगों को बसाने की ज़िम्मेदारी भी सरकार की होती है.
सरकार पुरानी इमारत को तोड़कर नये सिरे से बनाती है या फिर उसे Repair करती है.
और जब तक नई इमारत नहीं बन जाती तब तक इन लोगों की देखभाल की ज़िम्मेदारी सरकार की ही होती है. 
ऐसे लोगों को सरकार Transit Camps में रखती है. 
लेकिन ऐसे Camps में कोई सुविधाएं नहीं होती हैं. और नई इमारत भी सरकारी रफ़्तार से ही बनती है. मुंबई में बहुत से ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जब लोग अपनी पुरानी इमारतों को छोड़कर सरकार के Transit Camps में चले आए, लेकिन उनकी इमारतें 20 वर्षों तक भी नहीं बनीं.

((किसी भी इंसान के जीवन में 20 वर्ष एक लंबा समय होता है. 20 वर्ष में पीढ़ियां बदल जाती हैं. इसीलिए ज़्यादातर लोग अपनी पुरानी इमारतों को छोड़कर सरकार के इन Camps में नहीं जाना चाहते.))

हमारा ये मानना है कि सोलन और मुंबई की घटना में लोगों की मौत हादसे में नहीं हुईं...ये हत्या हुई हैं. क्योंकि सरकारी एजेंसियों ने अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई.
देश के हर ज़िले में एक ज़िलाधिकारी होता है.
वहां की ज़िला परिषद होती है, वहां का विधायक होता है.
वहां का सांसद होता है, उस राज्य की चुनी हुई सरकार होती है.
और फिर हर काम के लिए अलग-अलग मंत्रालय भी होते हैं.

लेकिन इतने सारे लोगों की मौजूदगी के बावजूद ग़ैरकानूनी काम होते रहते हैं. अवैध इमारते बनती रहती हैं, जो बिल्डिंग बदहाल हैं, उन्हें ख़ाली नहीं कराया जाता. यानी कोई भी ऐसे ग़ैर क़ानूनी और अनैतिक कामों को नहीं रोकता है. इसका सीधा सा मतलब ये है कि हमारे सिस्टम की इमारत कमज़ोर और जर्जर हो चुकी है...और इसे मरम्मत की ज़रूरत है.