ZEE जानकारी: जिस 'हिंदू' ने पाकिस्तान को जिताया, PAK ने उसी को सताया

ZEE NEWS के इस नागरिकता अभियान की सफलता को देखकर, जिन लोगों को ईर्ष्या हो रही है, उनके लिए पाकिस्तान से, इस अभियान के पक्ष में एक बड़ा सबूत आया है. पाकिस्तान की तरफ से टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर, दानिश कनेरिया ने आरोप लगाया है कि टीम में उनके साथ हिंदू होने की वजह से भेदभाव किया जाता था. इस बात का खुलासा पहले पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ने किया और उसके बाद दानिश कनेरिया ने भी कहा कि शोएब जो बातें कह रहे हैं, वो सही हैं.

ZEE जानकारी: जिस 'हिंदू' ने पाकिस्तान को जिताया, PAK ने उसी को सताया

ZEE NEWS के इस नागरिकता अभियान की सफलता को देखकर, जिन लोगों को ईर्ष्या हो रही है, उनके लिए पाकिस्तान से, इस अभियान के पक्ष में एक बड़ा सबूत आया है. पाकिस्तान की तरफ से टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर, दानिश कनेरिया ने आरोप लगाया है कि टीम में उनके साथ हिंदू होने की वजह से भेदभाव किया जाता था. इस बात का खुलासा पहले पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ने किया और उसके बाद दानिश कनेरिया ने भी कहा कि शोएब जो बातें कह रहे हैं, वो सही हैं.

शोएब अख्तर ने जो आरोप लगाए हैं, उसे सुनते हुए आप इस बात को भी ध्यान में रखिएगा कि भारत के नए नागरिकता कानून का आधार क्या है . इस कानून के तहत उन गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता दी जा रही है, जिनके साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर अत्याचार हो रहे हैं . और दानिश कनेरिया के साथ भी पाकिस्तान में यही हुआ. पाकिस्तान के कुछ खिलाड़ियों को इस बात से परेशानी थी कि दानिश कनेरिया उनके साथ-साथ खाना क्यों खाते हैं? सबसे पहले आप ये सुनिए कि शोएब अख्तर ने क्या आरोप लगाए .
 
दानिश यहां से खाना क्यों ले रहे हैं. ध्यान दीजिए, ये शब्द थे पाकिस्तान के खिलाड़ियों के और उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दानिश कनेरिया हिंदू हैं . ज़रा सोचिए, जब पाकिस्तान के एक जाने-माने क्रिकेट खिलाड़ी के साथ ऐसा हो सकता है तब वहां के आम हिंदुओं के साथ क्या हुआ होगा . आपको हम पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा के बारे में भी बताएंगे, लेकिन पहले ये सुन लीजिए कि शोएब अख्तर के बयान पर खुद दानिश कनेरिया ने क्या कहा . उनसे हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगी चैनल WION ने बात की .
 
दानिश कनेरिया का कहना है कि शोएब अख्तर ने जो बातें कहीं हैं, वो सही हैं . यानी पाकिस्तान क्रिकेट टीम में हिंदू खिलाड़ी के साथ भेदभाव होता है . ये एक गंभीर आरोप है . क्योंकि दुनिया भर के देशों में किसी भी टीम की बुनियाद में खेल भावना होती है, लेकिन, पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में इसका आधार मज़हब होता है. शायद यही वजह है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम में अब तक सिर्फ 2 हिंदू खिलाड़ी रहे हैं . पहले खिलाड़ी थे- अनिल दलपत और दूसरे दानिश कनेरिया . ये दोनों आपस में रिश्तेदार भी हैं . दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों की एक लंबी लिस्ट रही है . इस लिस्ट में कुल 28 नाम हैं, लेकिन यहां हम आपको कुछ जाने-माने मुस्लिम क्रिकेटरों के नाम बता देते हैं . ये हैं- अरशद अयूब, फारुख इंजीनियर, सैयद किरमानी, मंसूर अली खान पटौदी, सबा करीम, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अज़हरुद्दीन,ज़हीर ख़ान, इरफान पठान, यूसुफ पठान और मोहम्मद शमी . ये लिस्ट आज पाकिस्तान को भी देखनी चाहिए और उस गैंग को भी जो उल्टे भारत पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगाता है और भारत के नए नागरिकता कानून के खिलाफ षडयंत्र करता है .

दानिश कनेरिया के बयान में आपने ध्यान दिया होगा कि उन्होंने शुरुआत में 'सलाम' और 'जय श्रीराम' दोनों बोला. इसी तरह उन्होंने अंत में ये भी कहा कि उन्हें गर्व है कि वो एक पाकिस्तानी हैं और एक हिंदू हैं. कहीं न कहीं, दानिश कनेरिया पाकिस्तान में रहते हुए भी अपनी हिंदू पहचान को सुरक्षित रखना चाहते हैं और उन्हें इसका पूरा अधिकार भी है. यही वजह है कि वर्ष 2005 में जब वो भारत दौरे पर आए थे, तब भी उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म और भारत उनके दिल के बहुत करीब है. दानिश कनेरिया के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव का जो ताज़ा खुलासा हुआ है, उससे ये भी पता चलता है कि कनेरिया के साथ ऐसा काफी दिनों से हो रहा है ...और शायद इसकी शुरुआत तभी हो गई थी, जब वो 2005 में भारत आए थे. पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर ये अत्याचार सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है. वहां के गैर-मुस्लिम और खासतौर पर हिंदू. आज़ादी के बाद से ही लगातार प्रताड़ित किए गए हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती गई . 

वर्ष 1947 में पाकिस्तान की आबादी में 23% हिंदू थे जबकि 1998 में हिंदुओं की जनसंख्या सिर्फ 1.6% रह गई. इसी तरह सिर्फ कराची शहर में वर्ष 1941 में हिंदुओं की आबादी 51% थी लेकिन 1951 में ही हिंदुओं की संख्या घटकर सिर्फ 2% रह गई. वर्ष 1950 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें ये तय किया गया था कि दोनों देशों की सरकारें अपने-अपने अल्पसंख्यकों की नागिरकता और जीवन की सुरक्षा करेंगी, लेकिन पाकिस्तान ने इस समझौते पर अमल नहीं किया. यही वजह है कि हर साल औसतन 5 हज़ार हिंदू पाकिस्तान छोड़ देते हैं. 

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ज़रा सोचिए, जब दानिश कनेरिया जैसे क्रिकेटर के साथ इस कदर भेदभाव होता था कि टीम के खिलाड़ी उनके साथ खाना खाना पसंद नहीं करते थे तो पाकिस्तान में आम हिंदुओं या गैर मुसलमानों के साथ क्या होता होगा. इसके जवाब में हम आपको पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ होने वाले अत्याचार के कुछ आंकड़े बताएंगे. पाकिस्तान में करीब 428 मंदिर हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 20 में ही पूजा की जाती है वहां हिंदुओं की करीब 1 लाख 35 हज़ार एकड़ ज़मीन सरकार के कब्जे में है. इसी तरह पाकिस्तान में हर साल औसतन 1000 लोगों का जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है. ऐसी खबरें अक्सर आती हैं, कि वहां हिंदू महिलाओं को अगवा करके उनका धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है. इस तरह से हर वर्ष करीब 300 हिंदू महिलाओं की शादी दूसरे धर्म के पुरुषों से जबरदस्ती करा दी जाती है. इतना ही नहीं, वहां 80 प्रतिशत हिंदुओं को शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान की सरकार हिंदुओं को दाह संस्कार के लिए सुविधाएं नहीं देती है. 

इन हिंदुओं की मूल भूमि भारत-भूमि है और इनके पूर्वज अखंड भारत के वासी थे. यही वजह है कि भारत इन्हें नागरिकता देना, अपना नैतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार भी मानता है. इसीलिए ज़ी न्यूज़ ने नए नागरिकता कानून के समर्थन में एक मुहिम चलाई, जिसे एक करोड़ से ज्यादा नागरिकों का ऐतिहासिक समर्थन मिला है. ये हमारे खुशी और संतोष का विषय है, लेकिन इस मौके पर हम ये प्रार्थना भी कर रहे हैं कि पाकिस्तान और टुकड़े-टुकड़े गैंग को सदबुद्धि आए.