ZEE जानकारी: भारत के इतिहास में पहली बार हो रहे Digital दंगे

हमारे देश में पिछले 5 दिनों से ठीक ऐसा ही हो रहा है. नए नागरिकता कानून का विरोध करने के नाम पर. आज इन लोगों ने एक बार फिर पूरे देश की रफ्तार रोक दी है. 

ZEE जानकारी: भारत के इतिहास में पहली बार हो रहे Digital दंगे

हमारे देश में पिछले 5 दिनों से ठीक ऐसा ही हो रहा है. नए नागरिकता कानून का विरोध करने के नाम पर. आज इन लोगों ने एक बार फिर पूरे देश की रफ्तार रोक दी है. और देश के लोगों को अफवाहों के भ्रमजाल में उलझाया जा रहा है. आज देश की राजधानी दिल्ली समेत..तमाम शहरों में. नए नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन हुए. इन विरोध प्रदर्शनों की वजह से आम लोगों को परेशान होना पड़ा है. दिल्ली समेत ज्यादातर बड़े शहरों में लंबे लंबे ट्रैफिक जाम लग गए. दिल्ली में करीब 20 Metro Stations भी बंद करने पड़े और कुछ इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवाओं को भी कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया.

ये शायद देश की राजधानी दिल्ली के इतिहास में पहली बार है..जब इंटरनेट सेवाओं को इतने बड़े पैमाने पर रोकना पड़ा. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि ज्यादातर अफवाह इंटरनेट के ज़रिए ही फैलाई जा रही हैं. और प्रदर्शन के नाम पर. उपद्रव करने वाले सोशल मीडिया का सहारा लेकर. लोगों को उकसा रहे हैं. आप कह सकते हैं कि ये देश के इतिहास के पहले Digital दंगे हैं.

जिनकी आग पहले सोशल मीडिया पर भड़काई जाती है और फिर धीरे-धीरे लोगों को इकट्ठा करके सड़कों पर हिंसा और आगजनी की जाती है. हालांकि दिल्ली पुलिस की सख्ती की वजह से आज..हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई..लेकिन आम लोगों को परेशानियों का सामना ज़रूर करना पड़ा.

ज्यादातर प्रदर्शनकारी अलग अलग जगहों से लाल किले की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन पुलिस ने इन्हें पहले ही रोक लिया. प्रदर्शनकारियों के साथ साथ..वामपंथी पार्टियों के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया.

दिल्ली में तो प्रदर्शनों के नाम पर आज हिंसा नहीं हुई..लेकिन उत्तर प्रदेश के कई शहरों से इन Digital दंगों की तस्वीरें ज़रूर आई हैं . उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी..और पुलिस पर पत्थरबाज़ी भी की . इतना ही नहीं लखनऊ में एक पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई . लखनऊ में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने मीडिया की OB Van को भी आग के हवाले कर दिया और इसी तरह उत्तर प्रदेश के संभल में एक सरकारी बस को आग लगा दी गई .

देश के कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई...कुछ लोग दावा कर रहे थे कि वो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं..लेकिन पुलिस ने धारा 144 का हवाला देकर..प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की . प्रदर्शन, नारेबाज़ी, झड़प और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की तस्वीरें. मैंगलुरु, बैंगलुरु, अहमदाबाद और पटना जैसे शहरों से भी आईं. अफवाह और डर के सहारे देश के मुसलमानों को डराया जा रहा है . आप इसे भ्रम, भय और भीड़ का अनैतिक गठबंधन भी कह सकते हैं .

1984 में जब देश भर में सिख विरोधी दंगे हुए थे..तब टीवी या इंटरनेट नहीं था..लोगों को दंगों के बारे में जानकारी अखबारों से मिलती थी..या फिर लोग खुद इन दंगों के गवाह बनते थे . दंगों के बारे में जानने का एक मात्र तरीका अखबारों में छपने वाली तस्वीरें और खबरें होती थीं . लेकिन वर्ष 2002 में जब गुजरात में दंगे हुए..तब भारत में 24 घंटे वाले News चैनलों का दौर शुरू हो चुका था. और लोगों ने पहली बार घर बैठे. दंगों की तस्वीरों को अपने Television पर देखा . गुजरात दंगों पर हाल ही में आई नानावटी-मेहता आयोग की रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है कि.

मीडिया द्वारा की गई रिपोर्टिंग की भी.. दंगे भड़काने में भूमिका थी . आप इसे टीवी का पहला दंगा कह सकते हैं. और अब Digital क्रांति का युग है और सांप्रदायिक हिंसा सोशल मीडिया के ज़रिए भड़काए जा रहे हैं ...Internet पर ही इन Digital दंगों का प्रचार और प्रसार हो रहा है . इसलिए आप नागरिकता कानून के नाम पर हो रही हिंसा को डिजिटल दुनिया के पहले दंगे कह सकते हैं.

और यही वजह है कि देश के कई शहरों में Internet सेवाओं को रोकना पड़ रहा है..क्योंकि पुलिस लोगों को तो लाठी के दम पर रोक सकती है..लेकिन Digital माध्यमों के ज़रिए फैलाई जा रही अफवाहों को रोकना आसान नहीं है . इसलिए Internet Shut Down को आप हवा में लगाई गई धारा 144 भी कह सकते हैं...जिसका मकसद.. Digital दंगाइयों को रोकना है .

हिंसा की ये आग कैसे देश के एक कोने से शुरू होकर..पूरे भारत में फैल गई ..ये समझाने के लिए हमने आज एक Map तैयार किया. ये Map देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे...सबसे पहले नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर 15 दिसंबर को दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हिंसा हुई और फिर...गुवाहाटी, कोलकाता, अहमदाबाद और हैदराबाद से होते हुए ये आग देश के 12 से अधिक राज्यों में पहुंच गई .

दंगों की शुरुआत अक्सर सड़कों पर होती है...इसके लिए दंगा करने वाले.. हथियार लेकर..दूसरे लोगों पर हमला करते हैं..पुलिस को निशाना बनाते हैं, गाड़ियों, घरों और दुकानों में आग लगाते हैं और इसके लिए स्थानीय नेता या गुंडे लोगों को भड़काने का काम करते हैं..लेकिन Digital युग में दंगों का तरीका और हथियार बदल चुके हैं.

अब सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत..सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर की जाती है . इसके बाद मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, Messaging Platforms और Internet पर आधारित Voice Messaging सेवाओं का इस्तेमाल करके..लोगों को भड़काया जाता है और उन्हें एक निश्चित समय पर पहले से तय जगह पर बुलाया जाता है और फिर हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है . यही वजह है कि कई बार प्रशासन को ये Digital दंगे रोकने के लिए Internet और मोबाइल फोन सेवाएं बंद करनी पड़ती हैं.