ZEE जानकारी: पश्चिम बंगाल में संघीय ढांचे के हो रहे हैं टुकड़े-टुकड़े

ममता बनर्जी अपने इस प्रदर्शन को सत्याग्रह बता रही हैं, लेकिन असलियत में ये ममता बनर्जी का सत्ताग्रह यानी सत्ता का आग्रह है. इसमें ममता बनर्जी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हुई हैं. वो चुनाव से पहले धरने के ज़रिए राजनीतिक फायदा उठाना चाहती हैं.

ZEE जानकारी: पश्चिम बंगाल में संघीय ढांचे के हो रहे हैं टुकड़े-टुकड़े

DNA में आज सबसे पहले हम पश्चिम बंगाल के संवैधानिक संकट का विश्लेषण करेंगे. पिछले 24 घंटों से वहां पर जो कुछ भी हो रहा है.. उसने भारत के संघीय ढांचे के टुकड़े टुकड़े हो रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कोलकाता में CBI के खिलाफ पिछले 24 घंटों से धरने पर हैं. उनके साथ कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार भी धरने पर बैठे हुए हैं. ममता बनर्जी अपने इस प्रदर्शन को सत्याग्रह बता रही हैं, लेकिन असलियत में ये ममता बनर्जी का सत्ताग्रह यानी सत्ता का आग्रह है. इसमें ममता बनर्जी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हुई हैं. वो चुनाव से पहले धरने के ज़रिए राजनीतिक फायदा उठाना चाहती हैं.

19 हज़ार 500 करोड़ रुपये के सारदा और Rose valley घोटाले की जांच के लिए.. CBI, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने कल CBI के अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया था. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जहां कल इसकी सुनवाई होगी. 

अपने अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में CBI ने आज सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. वैसे आपको ये बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही CBI सारदा घोटाले की जांच कर रही है. 
 
सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2014 को इस घोटाले की जांच के आदेश CBI को दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया था कि सारदा घोटाले से जुड़े सभी मामलों की जांच CBI को दी जाती है और सभी राज्यों की पुलिस, जांच में CBI का सहयोग करेगी. इसी मामले में CBI ने आज दो याचिकाएं दायर कीं. पहली याचिका अपने अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में है. और दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है. 

CBI ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी, DGP और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को पार्टी बनाते हुए इनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग की है. CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल विस्तृत सुनवाई करेगा. लेकिन आज CBI की तरफ से बहुत सी ऐसी दलीलें दी गईं, जिन्हें सुनना ज़रूरी है. 

आज CBI की तरफ से Solicitor General तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार द्वारा CBI कार्यालय को पश्चिम बंगाल में Cease कर लिया गया था.

इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि अब क्या स्थिति है ? इस पर Solicitor General ने कहा कि अब वो मुक्त है. हमारी CBI टीम को भी राज्य पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था. फिर चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या वो अब भी हिरासत में हैं?

इस पर Solicitor General ने जवाब दिया कि उन्हें रात में कई घंटों तक हिरासत में रखने के बाद छोड़ा गया. राज्य सरकार सारदा घोटाले के सारे सबूत नष्ट कर देगी. कोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए. इसके बाद चीफ जस्टिस ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ऐसा करती है तो उन्हें भारी खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा.

Solicitor General तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने CBI के कार्य में बाधा डालकर अदालत के आदेशों की अवमानना की है. और वो इस मामले को लेकर एक अवमानना याचिका भी दायर करने जा रहे हैं. कोर्ट को इस मामले को देखना चाहिए. तुषार मेहता की तरफ से ये भी कहा गया कि जिस तरह से कल राज्य पुलिस ने CBI मुख्यालय को अपने कब्जे में लिया, उससे साफ जाहिर होता है कि वो इस मामले के सबूतों को नष्ट कर रहे हैं.

इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले आप सबूत तो दीजिये कि कोलकाता पुलिस के अधिकारी दस्तावेज़ नष्ट कर रहे हैं. चीफ जस्टिस ने आगे ये कहा कि अगर CBI सबूत देती है कि पुलिस कमिश्नर या कोई और अधिकारी इस मामले की जांच से जुड़े सबूत मिटा रहा है. तो कोर्ट ऐसी सख्त कार्रवाई करेगा कि उन्हें ऐसा करने का खेद होगा. अब कल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी.