गरीबी में जी रहा है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार, मजदूरी कर भड़ता है पेट

परिवार के पास अपनी कोई ज़मीन नहीं है, लेकिन परिवार का कहना है कि गांव में भोला पासवान का स्मारक बनाने के लिए तीन डेसीमल जमीन सरकार को दे दी.

गरीबी में जी रहा है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार, मजदूरी कर भड़ता है पेट
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री का परिवार.

पूर्णिया : पूरे देश में लोकसभा चुनाव को शोर है. बिहार के 40 सीटों पर भी वोटिंग है. पहले चरण में चार सीटों पर मतदाताओं ने अपने मताधाकिर का प्रयोग कर लिया है. दूसरे चरण में पूर्णिया सहित पांच लोकसभा सीटों पर 18 अप्रैल को चुनाव होने जा रहा है. चुनावी शोर के बीच तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री के परिवार की स्थिति पर भी एक नजर डालनी चाहिए. 

बिहार के पूर्णिया जिला के नगर प्रखंड स्थित बैरगाछी में तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री का पैतृक स्थान है. पुर्णिया शहर से इसकी दूरी 14 किलोमीटर है. परिजनों की स्थिति काफी दयनीय है. टूटे-फूटे कच्चे मकान में भोला पासवान शास्त्री का पूरा परिवार रहने को विवस है. ये लोग काम की तलाश में 14 किलोमीटर का फासला तय कर पूर्णिया आते हैं. मजदूरी करते हैं और लौट जाते हैं.

भोला पासवान शास्त्री का कोई संतान नहीं था. उनकी जिंदगी का सहारा उनके भाइयों के बच्चे ही थे. परिवार के पास अपनी कोई ज़मीन नहीं है, लेकिन परिवार का कहना है कि गांव में भोला पासवान का स्मारक बनाने के लिए तीन डेसीमल जमीन सरकार को दे दी.

उनके परिजनों का कहना है कि 21 सितंबर को भोला बाबू की जयंती रहती है तो प्रशासन को हमारी याद आती है. इसके बाद सभी भूल जाते हैं. हमारी स्थिति जस के तस बनी हुई है. मजदूरी मिली तो घर में खाना बनता है. नहीं तो भूखे सोना पड़ता है. इनके मुताबिक, सरकारी योजनाओं का लाभ अभी तक इनलोगों को नसीब नहीं हुआ है.

भोला पासवान शास्त्री पहली बार 22 मार्च 1968 को बिहार के मुख्यमंत्री बने. अपने इस कार्यकाल में वह 100 दिनों तक बिहार के सीएम रहे. इसके बाद उन्होंने 22 जून 1969 को दोबारा राज्य की सत्ता संभाली, लेकिन इस बार वह महज 13 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बन सके. 2 जून 1971 को उन्होंने तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री के तोर पर शपथ ली. इसबार वह 9 जनवरी 1972 तक बिहार की गद्दी पर बने रहे. 1984 में उनका निधन हो गया.