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नांदेड़: कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के लिए बीजेपी तैयार, लेकिन आसान नहीं होगी राह!

भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर प्रताप चिखलीकर नांदेड़ से चुनाव लड़ रहे हैं जो अभी लातूर जिले के लोहा से विधायक हैं. 

नांदेड़: कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के लिए बीजेपी तैयार, लेकिन आसान नहीं होगी राह!
1980 और 1984 में अशोक चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण भी नांदेड़ से सांसद थे. (फाइल फोटो)

नांदेड़: महाराष्ट्र का नांदेड़ कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का गृहक्षेत्र है जो इस इलाके से मौजूदा सांसद हैं. तो वहीं, भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर प्रताप चिखलीकर नांदेड़ से चुनाव लड़ रहे हैं जो अभी लातूर जिले के लोहा से विधायक हैं. दोनों ही मराठा समुदाय से आते हैं और मतदाताओं को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते महाराष्ट्र की 48 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों तक सिमट कर रह गई थी. नांदेड लोकसभा सीट इन 2 सीटों में से एक थी जहां अशोक चव्हाण बीजेपी के उम्मीदवार दिगंबर पाटिल को पछाड़कर चुनाव जीतने में कामयाब रहे.

 

1980 और 1984 में अशोक चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण भी नांदेड़ से सांसद थे, जो केंद्र में मंत्री भी रहे. फिर 1987 के उपचुनाव में अशोक चव्हाण पहली बार इस सीट से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे. नांदेड़ लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. इस सीट पर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं, इनमें से 15 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की. ऐसे में खुद अशोक चव्हाण इस चुनाव में अपनी राह को आसान नहीं मानते.

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में उनकी लोकसभा में उपस्थिति 43 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने मात्र 9 डिबेट में हिस्सा लिया और 829 प्रश्न पूछे हैं. 

नांदेड़ में किसानों की समस्या, सड़कें, पीने का पानी, रोजगार यह अहम मसले हैं. एक तरफ अशोक चव्हाण इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी उम्मीदवार प्रताप चिखलीकर का आरोप है कि अशोक चव्हाण ने राज्य का मुख्यमंत्री होने के बावजूद इस इलाके का कोई विकास नहीं किया. मौजूदा सांसद रहते हुए भी उन्होंने नांदेड की जनता को कई मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा. जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस इलाके के उद्धार के लिए बहुत कुछ किया है.

नंदा तट के कारण इस शहर का नाम नांदेड़ पड़ा. नांदेड़ स्थित सचखंड गुरूद्वारा यहां आस्था का केंद्र है, बहुत सारी सांस्कृतिक विरासत को अपने अंदर समेटे इस शहर की आबादी 22,87,079 है, जिसमें से 65 प्रतिशत लोग गांवों में तो 34 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं.

इस सीट पर दलित वोटर और मराठी वोटर दोनों ही निर्णायक वोटरों का काम करते हैं तो वहीं मुस्लिम मतदाता भी यहां के चुनाव में अहम रोल निभाते हैं.

लोकसभा चुनाव के लिए यहां 17,19,247 मतदाता हैं और 14 उम्मीदवार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यहां 18 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान होगा. नांदेड लोकसभा सीट पर चुनावी  टक्कर रोमांचक होगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है.