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गहलोत के बयान पर BJP का पलटवार, कहा- 'लोकतंत्र इमरजेंसी के समय था खतरे में'

गहलोत ने चुनावी सभा के दौरान कहा था कि अगर आप लोग मोदी को दूबारा PM बनाते हैं तो इस देश में कभी चुनाव नहीं होेंगे.  

गहलोत के बयान पर BJP का पलटवार, कहा- 'लोकतंत्र इमरजेंसी के समय था खतरे में'
बीजेपी नेता ने राहुल को मर्यादित बयान देने की नसीहत भी दी. (फोटो साभार: twitter)

जयपुर: पीएम नरेन्द्र मोदी पर सीएम अशोक गहलोत के शब्दबाणों के बीच बीजेपी के नेता मोदी के समर्थन में ढ़ाल बन कर उभरे हैं. बीजेपी नेताओं ने कहा कि लोकतन्त्र आज नहीं, बल्कि इमरजेंसी के समय खतरे में था. बीजेपी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस ने किया है. 

आपको बता दें कि, गहलोत ने एक चुनावी सभा के दौरान PM मोदी पर विवादित बयान दिया था. सभा के दौरान गहलोत ने कहा था कि अगर आप लोग मोदी को दूबारा प्रधानमंत्री बनाते हैं तो इस देश में दूबारा कभी चुनाव नहीं होेंगे.  

गहलोत के शब्द अमर्यादित और जनता को भ्रमित करने वाले

पूर्व मंत्री और लोकसभा चुनाव के जयपुर क्षेत्र प्रभारी वासुदेव देवनानी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि जनता जानती है कि देश में आपातकाल किसने लगाया था. CM गहलोत मोदी पर किसी तरह के आरोप लगाने से पहले कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का आचरण देख लें. उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में कांग्रेस की सभाओं के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शब्द अमर्यादित और जनता को भ्रमित करने वाले हैं. 

गहलोत बोल पा रहे हैं यह लोकतंत्र की ताकत है 

उन्होंने यह भी कहा कि इमरजेन्सी के वक्त तो लोगों को ऐसा लगने भी लगा था कि देश में फिर कभी चुनाव हो भी सकेंगे या नहीं? आज अशोक गहलोत इसीलिए बोल पा रहे हैं क्योंकि देश में लोकतंत्र है.

संवैधानिक संस्थानों पर सवाल उठाना गलत

पूर्व मंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को भी गलत बताया. उन्होंने कहा कि जिस राज्य में विपक्षी पार्टियां चुनाव जीतती है वहां ईवीएम को सही बताया जाता है और अगर बीजेपी की जीत होती है तो ईवीएम पर सवाल उठाने में कोई देर नहीं लगाती. सीएजी और निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना पूरी तरह गलत है. 

मर्यादा का ध्यान रखें राहुल गांधी

देवनानी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह की अमर्यादित भाषा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोलते हैं वैसी भाषा अब से पहले विपक्ष के किसी नेता ने या किसी भी पार्टी ने प्रधानमंत्री के लिए नहीं बोली, चाहे प्रधानमंत्री किसी भी पार्टी के रहे हों. कांग्रेस के नेताओं को भी मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए.