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पीएम मोदी को चुनाव आयोग की क्लीनचिट, कहा - वर्धा रैली में नहीं किया आचार संहिता का उल्लंघन

पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने क्लीन चिट दे दी है. चुनाव आयोग ने कहा कि वर्धा रैली में पीएम मोदी द्वारा दिए गए भाषण में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हुआ. दरअसल कांग्रेस ने पीएम मोदी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी.

पीएम मोदी को चुनाव आयोग की क्लीनचिट, कहा - वर्धा रैली में नहीं किया आचार संहिता का उल्लंघन
चुनाव आयोग ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्धा में दिया गया भाषण आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने क्लीन चिट दे दी है. चुनाव आयोग ने कहा कि वर्धा रैली में पीएम मोदी द्वारा दिए गए भाषण में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हुआ. दरअसल कांग्रेस ने पीएम मोदी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी. चुनाव आयोग ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्धा में दिया गया भाषण आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है जिसमें उन्होंने वायनाड से चुनाव लड़ने के लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा था. पीएम मोदी ने एक अप्रैल को दिए अपने भाषण में कहा था, जहां बहुसंख्यक कम हैं, वहां से चुनाव लड़ रहे हैं राहुल गांधी." कांग्रेस ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी जिस पर अब फैसला आया है. 

चुनाव आयोग के मुताबिक, "पीएम मोदी द्वारा 1 अप्रैल को वर्धा में दिए गए भाषण में चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन की शिकायत की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्ट्र से प्राप्त हुई थी. आयोग ने कहा कि उसने आचार संहिता की गाइडलाइंस के मुताबिक मामले की जांच की. ऑर्डर में कहा गया, "आयोग का मानना है कि इस मामले में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हुआ है." 

 

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आदर्श आचार संहिता का कथित रूप से उल्लंघन करने के मामले में कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर मंगलवार को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन दोनों नेताओं ने कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देकर और 'राजनीतिक प्रचार' में सैन्य बलों का उपयोग करके आचार संहिता का उल्लंघन किया है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के साथ ही असम से कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव की याचिका गुरुवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दी. देव ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ शिकायतों पर निर्वाचन आयोग की कथित निष्क्रियता को ‘पक्षपात’ का लक्षण और मनमाना बताया, जिसकी अनुमति नहीं है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता के लिये नुकसानदेह है.

(इनपुट भाषा से)