राजस्थान: लोकसभा चुनाव के दौरान अवैध धन पर रोकथाम के लिए आयकर विभाग चौकस, बनाया यह प्लान

सरकारी इंटेलीजेंस रिपोर्ट में प्रदेश के कुछ विशेष इलाकों में कालेधन का उपयोग मतदाताओं को प्रभावित करना संभावित है.

राजस्थान: लोकसभा चुनाव के दौरान अवैध धन पर रोकथाम के लिए आयकर विभाग चौकस, बनाया यह प्लान
अवैध धन पर नियंत्रण के लिए जयपुर में कंट्रोल रूम बनाया गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: प्रदेश में आयकर विभाग इन दिनों दोहरी भूमिका निभा रहा हैं. एक तरफ 31 मार्च से पहले आयकर लक्ष्य की वसूली करनी है, तो दूसरी ओर लोकसभा चुनावों में अवैध धन की रोकथाम भी. जिसके लिए विभाग ने सजग और सर्तक होने के साथ हीं अपनी तैयारी पूरी कर ली है. 

विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रदेश के 25 लोकसभा क्षेत्रों में आयकर विभाग ने 66 सर्तकता यूनिट की टीम तैनात की है. जो चुनाव के दौरान अवैध धन की रोकथाम के लिए लगातार चौकस है. बताया जा रहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शितापूर्ण तरीके से लोकसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के आदेश पर जयपुर में केंद्रीय कंट्रोल रूम भी बनाया गया हैं. आयकर विभाग ने चुनावी एक्शन प्लान को स्पेशल-66 का नाम दिया है. 

नहीं होगी कालेधन की एंट्री
चुनावी मौसम के दौरान कालेधन का उपयोग बढ़ता जाता है. सरकारी इंटेलीजेंस रिपोर्ट में प्रदेश के कुछ विशेष इलाकों में कालेधन का उपयोग मतदाताओं को प्रभावित करना संभावित है. जिस कारण आयकर विभाग की इंटेलीजेंस टीम सक्रिय है. इसके अलावा आयकर विभाग की स्पेशल-66 प्लान में प्रदेश के 33 जिलों में दो स्पेशल सेल का गठन किया गया है. 

बड़े अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
प्रत्येक जिले में इस सेल की जिम्मेदारी आईटीओ और इंस्पेक्टर्स को दी गई है, जो कालेधन के उपयोग से जुड़ी सूचनाएं जुटाएंगे. आयकर विभाग की इस टीम में बड़े ऑफिसर्स को अहम जिम्मेदारी दी गई हैं. आयकर विभाग की अपर आयकर निदेशक अन्वेषण सपना भाटिया को नोडल अधिकारी और 10 अन्य सब नोडल अधिकारी बनाए गए हैं. जयपुर में कंट्रोल रूम बनाने के अलावा 11 एयर इंटेलीजेंस टीमें भी कालेधन की रोकथाम के लिए काम करेगी. 

आम लोग विभाग को दे सकते हैं जानकारी
इस संबंध में आयकर विभाग के महानिदेशक (अन्वेषण) सतीश गुप्ता ने बताया कि पाकिस्तान से लगी सीमाओं के साथ राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में धन के अवैध आवागमन और लेनदेन पर कड़ी निगाह रखी जा रही है. विभाग ने अपने सूचना तंत्र को अधिक मजबूत किया हैँ कोई भी जागरूक नागरिक चुनावों में धन के अवैध प्रवाह की सूचना विभाग को दे सकता है. 

धन के प्रत्येक स्त्रोत पर विभाग रखेगा नजर
आयकर विभाग की टीमें 10 लाख रुपए या इससे अधिक राशि के मामलों को सीधे तौर पर पहुंचेगी. इसके अलावा अन्य जब्ती में पुलिस की सूचना पर पहुंचेंगी. विभाग की टीमें 1 किलो या इससे अधिक वजन की कीमती धातुओं के केस में एक्शन लेती नजर आएगी. आयकर विभाग चुनावी सीजन में  बड़े बैंक ट्रांजेक्शनों पर नजर रखेगा. साथ ही हवाला कारोबार से जुड़े व्यक्तियों के ट्रांजेक्शनों का भी पता लगाएगा.

विधानसभा चुनाव के दौरान हवाला ट्रांजेक्शन का हुआ था खुलासा
विधानसभा चुनावों में करीब आधा दर्जन हवाला ट्रांजेक्शनों का खुलासा विभाग ने किया था. विधानसभा चुनावों में दस करोड़ रुपए की ब्लैक मनी पकड़ में आई थी.  विभाग का मानना है कि चुनावों में सबसे ज्यादा ब्लेक मनी का सोर्स हवाला कारोबार है. इसके अलावा जमीनों की खरीद- फरोख्त और जमीनों की पॉवर ऑफ अटॉर्नी के मामलों पर निगरानी रखी जा रही है. 

जयपुर में बनाया कंट्रोल रूम
लोकसभा चुनाव के लिए नियंत्रण कक्ष जयपुर में संचालित किया जा रहा है. विभाग ने 0141-2385833 नम्बर भी आमजन के लिए जारी किये है. इसके माध्यम से पूरे चुनाव तथा चुनाव प्रचार के दौरान धन के अनावश्यक खर्च के साथ ही अवैध धन और सम्पति के लेन-देन पर निगरानी रखी जाएगी. नियंत्रण कक्ष में कोई भी व्यक्ति टोल फ्री अथवा टेलीफोन नंबर या ईमेल पर धनबल के उपयोग संबंधी जानकारी दे सकता है. दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. विभाग की यह सर्तकता अघोषित रुप से उन सभी प्रत्याशियों की निगरानी का काम करेंगी जिन्हें प्रमुख पार्टियां चुनाव में पार्टी प्रत्याशी बना रही हैँ. वहीं करोड़पति बागी प्रत्याशियों के लेनदेन पर भी विभाग की नजर रहेगी.

मतदाता भी रहें जागरूक
लोकसभा चुनावों में कालेधन का उपयोग नहीं हो इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां अतिरिक्त सर्तकता बरत रही है. वहीं, आयकर विभाग भी जयपुर समेत प्रदेशभर में कड़ी धन के लेनदेन पर कड़ी निगाहें रख रहा है. कालेधन के आवागमन के संभावित जिलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. विभाग सर्तकता के साथ जागरूकता का भी प्रयास कर रहा है ताकि मतदान प्रक्रिया में धन का असर नहीं हो, बतौर जागरूक मतदाता हमारी भी जिम्मेदारी है कि धनबल का प्रयोग करने वाले प्रत्याशियों की जानकारी आयकर विभाग तक पहुचाएं और मताधिकार का निष्पक्ष उपयोग करें.