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मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी से लेकर गोडसे पर बयान तक, जानिए कौन हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा का चेहरा बनीं साध्वी प्रज्ञा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य रह चुकी हैं और अब उमा भारती और योगी आदित्यनाथ के बाद बैराग्य और राजनीति की अगली कड़ी मानी जा रही हैं.

मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी से लेकर गोडसे पर बयान तक, जानिए कौन हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
फोटो साभारः ANI

नई दिल्लीः 2008 में मालेगांव में हुए ब्लास्ट में संलिप्त होने के आरोपों के बाद चर्चा में आईं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जीवन कई तरह के उतार-चढ़ाव से भरा रहा. भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा का चेहरा बनीं साध्वी प्रज्ञा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य रह चुकी हैं और अब उमा भारती और योगी आदित्यनाथ के बाद बैराग्य और राजनीति की अगली कड़ी मानी जा रही हैं. भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा से उनका नाम घोषित करने के बाद वह अक्सर ही अपने विवादित बयानों के चलते चर्चा में बनी रहीं.

जीवन परिचय
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में  1971 में हुआ. उनके पिता का नाम डॉ. चंद्रपाल सिंह एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक डॉक्टर थे. वे लहार कस्बे के गल्ला मंडी रोड पर क्लीनिक चलाते थे. साध्वी के पिता डॉक्टर होने के साथ ही एक धर्मभीरू हिंदू थे, जो भगवद् गीता का पाठ करते थे. पिता आरएसएस के जुड़े थे इसलिए प्रज्ञा में भी हिंदुत्व और राष्ट्रभक्ति का जज्बा बढ़ने लगा. धीरे धीरे प्रज्ञा को हिंदू दर्शन में रूचि होने लगी और उन्होंने आध्यात्म की दुनिया में दस्तक देना शुरू किया. हालांकि इस दौरान वह राष्ट्रवाद से ओतप्रोत एक दिलेर और आत्मनिर्भर लड़की के रूप में बड़ी हो रही थीं. वह विश्व हिंदू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी की सदस्य भी रहीं.

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राजनीतिक करियर
वैराग्य और सन्यास का चोला पहन लेने वाली साध्वी प्रज्ञा अपने तीखे तेवर और राष्ट्रवाद पर अपने भड़काऊ भाषणों के कारण कई बार अखबारों की सुर्खियों में और विवादों के घेरे में रहीं. 2002 में उन्होंने 'जय वन्दे मातरम् जन कल्याण समिति' बनाई. अपनी बोलने की कला के चलते साध्वी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू कर दिया. साध्वी प्रज्ञा के भाषणों का प्रभाव पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलता है, लेकिन एक समय में साध्वी ने मध्य प्रदेश छोड़ सूरत में अपनी कार्यस्थली बना ली. जिसके चलते 2019 के लोकसभा चुनाव में जब भोपाल के लिए भाजपा ने उनका नाम घोषित किया तो कई स्थानीय नेताओं में इसका विरोध देखने को भी मिला.

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2008 में गिरफ्तारी
साध्वी प्रज्ञा को 2008 में मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में गिरफ्तार किया गया. 2017 में एनाआईए के एक विशेष कोर्ट ने साध्वी पर लगी मकोका की धाराएं हटा दी और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन अधिनियम के अंतर्गत आंतकवाद पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया. साध्वी ने 17 अप्रैल 2019 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और पार्टी ने उन्हें 17वीं लोकसभा के सदस्य के लिए भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया है. यहां उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के दिग्विजय सिंह से है.