कोलकाता उत्तर सीट: यहां कांग्रेस का है दबदबा, विपक्षी पार्टियां रह जाती हैं कोसों दूर

कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट को ट्रेड यूनियन और श्रमिकों वाली सीट कहा जाता है, लेकिन इस सीट पर व्यापारियों ने कई दशकों से अपना वर्चस्व कायम किया हुआ है. इस लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से महज दो बार चुनाव हुए और दोनों ही बार बाजी तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई है.

कोलकाता उत्तर सीट: यहां कांग्रेस का है दबदबा, विपक्षी पार्टियां रह जाती हैं कोसों दूर
2014 के रिपोर्ट कार्ड को उठाकर देखें तो यहां पर पिछले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी ने बराबर की टक्कर दी थी

नई दिल्ली: कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट को ट्रेड यूनियन और श्रमिकों वाली सीट कहा जाता है, लेकिन इस सीट पर व्यापारियों ने कई दशकों से अपना वर्चस्व कायम किया हुआ है. इस लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से महज दो बार चुनाव हुए और दोनों ही बार बाजी तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई है.

2014 के रिपोर्ट कार्ड को उठाकर देखें तो यहां पर पिछले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी ने बराबर की टक्कर दी थी. इसलिए इस बार भी मुकाबला दिलचस्प है. वैसे भी चुनावी रैली में प्रधानमंत्री यहां के व्यापारी वर्ग के लिए कई सारे लोक लुभावन वादे कर चुके हैं, ऐसे में यह देखना भी दिलचस्प है कि यह सीट अपनी दो बार की परंपरा को निभाती है या फिर वादों पर ऐतबार करती है.

कौन है वर्तमान में सांसद
2009 में अस्तित्व में आई इस सीट पर वर्तमान में सुदीप बंदोपाध्याय हैं. पिछले दो चुनावों में सुदीप बंदोपाध्याय जीत दर्ज करते आ रहे हैं. उन्होंने केएन कॉलेज, बेरहामपुर से पढ़ाई की हुई है. सुदीप बंदोपाध्याय अपने संसदीय क्षेत्र में काफी एक्टिव माने जाते हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सुदीप बंदोपाध्याय की सक्रियता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बीजेपी उन्हें टक्कर देने की कोशिश तो करेगी, लेकिन शायद ही मात दे पाए.