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लोकसभा चुनाव 2019: मैनपुरी में क्या जारी रहेगा सपा का विजयी रथ ?

साल 1996 से अब तक आठ बार हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी लगातार यह सीट जीतती आ रही है. 

लोकसभा चुनाव 2019: मैनपुरी में क्या जारी रहेगा सपा का विजयी रथ ?
फाइल फोटो

नई दिल्ली: मैनपुरी उत्तर प्रदेश का वह शहर, जिस सपा का गढ़ कहा जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे, लेकिन उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया था, जिसके बाद उनके पोते तेजप्रताप सिंह यादव उपचुनाव में बड़े अंतर से जीत कर लोकसभा पहुंचे. हालांकि, मुलायम सिंह यादव इससे पहले भी कई बार यहां से सांसद रह चुके हैं. साल 1996 से अब तक आठ बार हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी लगातार यह सीट जीतती आ रही है. 

2014 के राजनीतिक समीकरण
2014 के समीकरण के मुताबिक, साल 2014 में इस सीट पर मुलायम यादव चुनाव जीते. उन्होंने भाजपा के शत्रुघ्न सिंह चौहान को मैनपुरी सीट से 3,64,666 वोटों से हराया था लेकिन आजमगढ़ की सीट से जीतने की वजह से उन्होंने ये सीट छोड़ दी, साल 1996 से अब तक 8 बार हुए लोकसभा चुनावों में यहां से सिर्फ समाजवादी पार्टी जीतती आई है. 

क्या है राजनीतिक इतिहास
साल 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बादशाह गुप्ता मैनपुरी के पहले सांसद बने थे. 1952 से लेकर 1971 तक इस सीट पर कांग्रेस का ही प्रभुत्व रहा. 1977 के लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल के रघुनाथ सिंह वर्मा यहां से विजयी हुए, जो अगले चुनाव में जनता दल (सेक्युलर) के टिकट पर यहां लड़े और फिर से जीते. साल 1989 में इस सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई. साल 1991 में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और नेता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से विजयी हुए, उनके बाद उनकी ही पार्टी के नेता चौधरी बलराम सिंह यहां से लगातार 2 बार जीते.  2004 में मुलायम सिंह दोबारा यहां के सांसद बने, पर कुछ ही महीनों बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिसकी वजह से 2004 में मैनपुरी में उपचुनाव हुए जिसमें इन्ही के भतीजे धर्मेन्द्र यादव विजयी रहे, 2009 में तीसरी बार मुलायम सिंह मैनपुरी के सांसद बने.