लोकसभा चुनाव 2019: बीकानेर क्षेत्र में एक ही नारा, 'हारे-जीते कोई, 'सांसद' तो भाई ही बनेगा'

भाजपा के लिए बीकानेर सीट इस लिए साख बनी हुई है. क्योंकि अर्जुनराम मेघवाल मोदी सरकार में मंत्री हैं ओर मोदी अपने पांच साल के कामों को लेकर जनता को रिपोर्ट कार्ड दे रहे हैं. 

लोकसभा चुनाव 2019: बीकानेर क्षेत्र में एक ही नारा, 'हारे-जीते कोई, 'सांसद' तो भाई ही बनेगा'
बीकानेर सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए साख का विषय बनी हुई है.

बीकानेर/ रौनक व्यास: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में भी चुनाव प्रचार जोर पकड़ चुका है. बीकानेर क्षेर में इन दिनों एक ही नारा चल रहा है 'हारे-जीते कोई, 'सांसद' बनेगा भाई'. दरअसल, बीकानेर में कांग्रेस और भाजपा दोनों से टिकट पाने वाले प्रत्याशी 'मौसेरे भाई' हैं. दोनो भाइयों को अपने का ही विरोध सहना पड़ रहा हैं.

 

लोकसभा की सबसे हॉट सीटों में से एक इस बार की बीकानेर लोकसभा की सीट है. जहां एक तरफ भाजपा के कद्दावर नेता ओर मोदी सरकार में मंत्री अर्जुनराम मेघवाल हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने पूर्व आईएएस रहे अर्जुनराम के सामने उनके ही मोसेरे भाई और पूर्व आईपीएस मदन गोपाल मेघवाल को उतारा हैं. जहां राजनीतिक रूप से बीकानेर सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए साख का विषय बनी हुई है. 

यह बात अलग है कि दोनों भाइयों को अपनी ही पार्टी के खेवनहारों से डर लग रहा है. भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को जहां पार्टी छोड़ चुके कद्दावर नेता देवीसिंह भाटी के आक्रामक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार मदन मेघवाल के लिए भी कम मुश्किलें नहीं है. 

भाजपा के लिए बीकानेर सीट इस लिए साख बनी हुई है. क्योंकि अर्जुनराम मेघवाल मोदी सरकार में मंत्री हैं ओर मोदी अपने पांच साल के कामों को लेकर जनता को रिपोर्ट कार्ड दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस ने हाल ही में राजस्थान में सत्ता हासिल की हैं ओर दूसरी तरफ़ बीकानेर लोकसभा की आठ विधानसभा में दो बड़े मंत्री ओर विधायक हैं जिनकी साख इस चुनाव के चलते भी दांव पर हैं. जिनमे मंत्री बीडी कल्ला और भंवर सिंह भाटी शामिल हैं.

वहीं विधानसभा चुनाव में पुत्रवधु की हार का हिसाब चुकता करने के लिए पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी ने अर्जुनराम मेघवाल का खुल्लमखुला विरोध शुरू कर दिया है. भाटी ने चार दशक की राजनीति में कई पार्टियां बदलीं लेकिन कांग्रेस का विरोध हर हाल में किया. इस बार अर्जुनराम को हराने के लिए उन्होंने यहां तक कह दिया कि चाहे कांग्रेस को वोट दे दो. हालांकि भाटी के ऐसे बयान के बाद भाजपा ने भाटी का इस्तीफा स्वीकार करते हुए उनसे किनारा कर लिया हैं.

उधर, कांग्रेस ने भाजपा के आईएएस प्रत्याशी के सामने अपना आईपीएस उम्मीदवार उतार दिया है. हाल ही में आईएएस पद से सेवानिवृति लेने वाले मदन मेघवाल का भी विरोध हो रहा है. उनके विरोध में कांग्रेस के विधायक गोविन्द मेघवाल के समर्थक सबसे आगे हैं. उनका आरोप है कि मदन मेघवाल जीत की स्थिति में नहीं है. 

राजनीति के इस तमाशे को रेगिस्तानी सरहद के लोग बहुत ही रुचि के साथ देख रहे हैं. मौन साधक की तरह वो बोलने के लिए तैयार नहीं है. हालांकि, दूसरी तरफ मोदी के प्रति भक्ति में कोई खास कमी नहीं आई है. यही कारण है कि अर्जुनराम अब मोदी के नाम पर जीत की उम्मीद लगाकर बैठे हैं. वहीं मदन मेघवाल के पास गिनाने के लिए कुछ नहीं है, वो स्थानीय कांग्रेस नेताओं के हाथों की कटपुतली बनते नजर आ रहे हैं. 

अर्जुनराम पिछले दस साल से सांसद हैं और इस बार 'हैट्रिक' मारने की कोशिश में है. पांच साल विपक्ष में रहने के बाद अर्जुनराम पांच साल सत्ता में राज्यमंत्री रहे. बीकानेर को हवाई सेवा देने के साथ ही राजमार्गों का विस्तार उनके खाते में जाते हैं. इंदिरा गांधी नहर पानी में एक इंच की बढ़ोतरी नहीं होने को उनकी नाकामी बताया जा रहा है. हालांकि, मेघवाल ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को देश के हिस्से में मिलने का दावा किया हैं जो हकीकत में जनता तक कब पहुंचेगा वो समय बताएगा लेकिन बीकानेर की राजनीति में कोई भी जीते या हारे इस बार जीतेगा लेकिन भाई ही.