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लोकसभा चुनाव 2019: टीडीपी का गढ़ है चित्तूर, 1996 से है पार्टी का इस सीट पर कब्जा

चित्तूर टीडीपी का अभेद दुर्ग है. पार्टी का पिछले 22 साल से इस सीट पर कब्जा है. टीडीपी के इस अभेद किले को भेद पाना विपक्षी पार्टियों के लिए टेढ़ी खीर है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चित्तूर सीट पर 11 अप्रैल को मतदान होना है.

लोकसभा चुनाव 2019: टीडीपी का गढ़ है चित्तूर, 1996 से है पार्टी का इस सीट पर कब्जा
2014 के चुनाव में टीडीपी ने बड़ी मुश्किल से जीत हासिल की थी.

चित्तूर: चित्तूर टीडीपी का अभेद दुर्ग है. पार्टी का पिछले 22 साल से इस सीट पर कब्जा है. टीडीपी के इस अभेद किले को भेद पाना विपक्षी पार्टियों के लिए टेढ़ी खीर है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चित्तूर सीट पर 11 अप्रैल को मतदान होना है. टीडीपी इस मुकाबले को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. 

2014 के चुनाव बड़ी मुश्किल से जीती थी टीडीपी
चित्तूर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2014 के चुनाव में टीडीपी ने बड़ी मुश्किल से जीत हासिल की थी. वाईएसआर ने कड़ी टक्कर दी थी. बीजेपी की ओर से जयराम दुग्गानी ताल ठोक रहे हैं. वहीं कांग्रेस ने डॉ. चीमाला रंगप्पा पर दांव लगाया है. वाईएसआर कांग्रेस ने रेद्दप्पा को टिकट दिया है. टीडीपी ने अपने मौजूदा सांसद नारामल्लाई शिवप्रसाद पर फिर से भरोसा जताया है. बीजेपी अभी तक यहां खोलने में कामयाब नहीं हो पाई है. पार्टी इस बार पूरे दमखम से मैदान में है. 

 

 
1991 में आखिरी बार जीती थी कांग्रेस
कांग्रेस इस सीट पर आखिरी बार 1991 में जीती थी. हालांकि टीडीपी ने कांग्रेस के इस किले को पहली बार 1984 में फतह किया था. तब टीडीपी की ओर से एनपी झांसी लक्ष्मी ने जीत दर्ज की थी. 1996 से टीडीपी लगातार यहां से चुनाव जीत रही है. 2014 के लोकसभा चुनाव में तो कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई थी. कांग्रेस 2004, 2009 में दूसरे नंबर पर रही. 

ढह सकता है टीडीपी का किला
आंध्रप्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं. टीडीपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है. ऐसे में चित्तूर सीट को बरकरार रख पाना टीडीपी के लिए बहुत चुनौतीभरा कार्य है. पिछले लोकसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस ने टीडीपी को कड़ी टक्कर दी थी और 44138 वोट से चुनाव हार गई थी. इस बार चित्तूर की जनता किसका साथ देगी, यह 23 मई को पता चल जाएगा.