लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस के गढ़ अमेठी में क्या इस बार खिल पाएगा BJP का कमल !

साल 2014 में कांग्रेस के राहुल गांधी बीजेपी की स्मृति ईरानी और आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास को मात देकर इस लोकसभा सीट से संसद तक पहुंचे. 

लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस के गढ़ अमेठी में क्या इस बार खिल पाएगा BJP का कमल !
साल 2014 में राहुल गांधी ने बीजेपी की स्मृति ईरानी को यहां पराजित किया था.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का राजनीति में अमेठी को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता है. अमेठी का इतिहास कहता है कि यहां कांग्रेस का यहां एकाधिकार रहा है और गांधी परिवार के सदस्य यहां रिकॉर्ड मतों से जीतकर संसद में पहुंचते रहे हैं. 2014 में चली मोदी लहर भी कांग्रेस के गढ़ को नहीं तोड़ सकी. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी कमल नहीं खिला सकी. वहीं, ताजा-ताजा सुर्खियों में आई 'आप' ने अपने प्रत्याशी कुमार विश्वास को मैदान में उतारकर चमत्कार करने की कोशिश की, लेकिन चमत्कार हो न सका.

कांग्रेस के राहुल गांधी  बीजेपी की स्मृति ईरानी और आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास को मात देकर इस लोकसभा सीट से संसद तक पहुंचे. यूं तो राजनीति के दम पर ही अमेठी को पहचाना जाता है, लेकिन प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर विश्व में आस्था का केंद्र है, जो यहीं है. 

2014 में ये था समीकरण
साल 2014 में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को पराजित किया था. आम आदमी पार्टी (आप) के कुमार विश्वास भी यहां से चुनाव लड़े थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई थी. समाजवादी पार्टी ने इस सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 408,651 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी को 300,74 वोट मिले थे. इस तरह जीत का अंतर 1,07,000 वोटों का ही रह गया. जबकि 2009 में कांग्रेस अध्यक्ष की जीत का अंतर 3,50,000 से भी ज्यादा का रहा था.

कुछ ऐसा है राजनीतिक इतिहास 
अमेठी लोकसभा सीट साल 1967 में परिसीमन के बाद वजूद में आई. अमेठी से पहली बार कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सासंद बने. इसके बाद उन्होंने साल 1971 में भी उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन साल 1977 में कांग्रेस ने संजय सिंह को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन जीत कांग्रेस को नसीब न हो सकी. साल 1980 में इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी चुनावी मैदान में उतरे और इस तरह से इस सीट को गांधी परिवार की सीट में तब्दील कर दिया. हालांकि, साल 1980 में ही उनका विमान दुर्घटना में निधन हो गया. इसके बाद 1981 में हुए उपचुनाव में इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी अमेठी से सांसद चुने गए.

साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में राजीव गांधी एक बार फिर उतरे, जिनको टक्कर देने के लिए संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी भी मैदान में उतरी. उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा. लेकिन जीत नहीं सकीं, राजीव गांधी 3 लाख वोटों से जीते जबकि उन्हें महज 50 हजार ही वोट मिल सके. कांग्रेस नेता और प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने साल 1989 और साल 1991 में चुनाव जीते. लेकिन, साल 1991 के नतीजे आने से पहले उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा चुनाव लड़े और जीतकर लोकसभा पहुंचे. साल 1996 में कैप्टन सतीश शर्मा फिर यहां से लड़े और संसद तक पहुंचे. साल 1998 में हुए चुनावों में बीजेपी ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया और संजय सिंह यहां से सांसद चुने गए. 

साल 1999 में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी चुनाव मैदान में उतरीं और अमेठी की सांसद बनीं और संजय सिंह भारी मतों से यहां हारे. साल 2004 में अमेठी से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी पहली बार सांसद चुने गए. साल 2009 और 2014 के चुनाव में भी फिर राहुल गांधी यहां से सांसद चुने गए. वह तीन बार से लगातार यहां से सांसद हैं.