लोकसभा चुनाव 2019: किसका होगा गोंडा?, महागठबंधन से है बीजेपी की जोरदार टक्कर

इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एकबार फिर से कीर्ति वर्धन सिंह को मैदान में उतारा है. गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में आई है. सपा ने इस सीट पर विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने इस सीट पर कृष्णा पटेल को टिकट दिया है.

लोकसभा चुनाव 2019: किसका होगा गोंडा?, महागठबंधन से है बीजेपी की जोरदार टक्कर
1990 के दशक के बाद इस सीट पर ज्यादातर समय बीजेपी का कब्जा रहा है.

नई दिल्ली: गोंडा संसदीय क्षेत्र पर पहली बार 1952 में चुनाव हुआ था. 2014 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के कीर्ति वर्धन सिंह की जीत हुई थी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के नंदिता शुक्ला को हराया था. कीर्ति वर्धन सिंह को 3,59,643 और नंदिता शुक्ला को 1,99,227 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी अकबर अहमद को 1,16,178 वोट मिले थे.

इस चुनाव में कौन मैदान में?
इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एकबार फिर से कीर्ति वर्धन सिंह को मैदान में उतारा है. गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में आई है. सपा ने इस सीट पर विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने इस सीट पर कृष्णा पटेल को टिकट दिया है.

ऐसा है राजनीतिक इतिहास
1990 के दशक के बाद इस सीट पर ज्यादातर समय बीजेपी का कब्जा रहा है. 1991 से लेकर अब तक 7 लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें बीजेपी ने चार बार, सपा ने दो बार और कांग्रेस ने एक बार जीत दर्ज की है. इस सीट का अपना राजनीतिक महत्व है. देश की पहिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी 1967 में पहली बार इसी सीट से चुनाव लड़ी थीं. उन्होंने उस चुनाव में जीत भी दर्ज की थीं. 2009 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बेनी प्रसाद वर्मा ने यहां जीत दर्ज की थी. वर्तमान सांसद (बीजेपी) कीर्ति वर्धन सिंह इससे पहले 2004 और 1998 में सपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं.

 

2014 में ये थे आंकड़े 
2014 के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 17,10,827 है. इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 9,35,168 और महिला मतदाताओं की संख्या 7,75,659 है. उस चुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में थे. 2011 जनगणना के मुताबिक, जिले की आबादी 34.3 लाख के करीब है. जिले में 84 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग की है. बाकी, 15 फीसदी दलितों की आबादी है. धार्मिक जनसंख्या की बात करें तो हिंदुओं की आबादी करीब 80 फीसदी है, जबकि मुस्लिम 20 फीसदी हैं.