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गुना लोकसभा सीट, जहां आज भी दल या मुद्दे को नहीं, सिंधिया राजघराने को दी जाती है तरजीह

गुना लोकसभा सीट पर कांग्रेस अब तक कुल 9 बार जीत दर्ज करा चुकी है तो भाजपा 4 बार ही जीत हासिल कर पाई है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भाजपा गुना की सीट केवल तब ही जीत पाई जब राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा.

गुना लोकसभा सीट, जहां आज भी दल या मुद्दे को नहीं, सिंधिया राजघराने को दी जाती है तरजीह
ज्योतिरादित्य सिंधिया (फोटो साभारः twitter/@JM_Scindia)

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट एक ऐसी सीट है, जहां जनता मुद्दे या दल नहीं बल्कि सिंधिया राजघराने के लिए वोट करती है. गुना पर आजादी के बाद से ही सिंधिया राजघराने का वर्चस्व रहा है. यहां की जनता किसी दल को नहीं बल्की सिंधिया राजघराने के व्यक्ति को जिताती आई है. सिंधिया परिवार से राजमाता विजयाराजे सिंधिया भाजपा से तो माधवराव सिंधिया कांग्रेस और उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कांग्रेस से ही जीत दर्ज करा चुके हैं. गुना लोकसभा सीट पर कांग्रेस अब तक कुल 9 बार जीत दर्ज करा चुकी है तो भाजपा 4 बार ही जीत हासिल कर पाई है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भाजपा गुना की सीट केवल तब ही जीत पाई जब राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा.

राजनीतिक इतिहास
गुना लोकसभा सीट पर पहला लोकसभा चुनाव 1957 में हुआ. जिसमें ग्वालियर रियासत की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी. 1967 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतीं. 1971 में इस सीट से माधवराव सिंधिया ने जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ने का फैसला किया और जीत हासिल की. इसके बाद 1977 उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और जीत का परचम लहराया.

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1980 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ा और जीता भी, लेकिन इसके चलते परिवार में विवादों के बादल छा गए और मां-बेटे दोनों विरोधी पार्टी में शामिल हो गए. 1989 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. जिसके बाद 1999 के चुनाव में बेटे माधवराव सिंधिया ने जीत हासिल की. 2001 में माधवराव की एक प्लेन हादसे में मौत होने के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनका कार्यभार संभाला और 2002 में उपचुनाव में जीत हासिल की. जिसके बाद 2009 और 2014 में उन्होंने लगातार गुना लोकसभा सीट से जीत हासिल की.

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ऐसे में एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. यहां उनके खिलाफ बीजेपी ने केपी यादव को उम्मीदवार बनाया है. बता दें यादव कभी सिंधिया के करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद में कुछ कारणों के चलते उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और अब सिंधिया के ही संसदीय क्षेत्र में उन्हें चुनौती देने के लिए चुनावी मैदान में हैं.