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कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट: 2014 में 37 साल बाद खुला बीजेपी का खाता, नवीन जिंदल की हुई थी हार

2019 लोकसभा चुनाव के मौजूदा परिस्थिति की बात करें तो इस बार यहां की टक्कर काफी जबरदस्त और दिलचस्प होने वाली है 

कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट: 2014 में 37 साल बाद खुला बीजेपी का खाता, नवीन जिंदल की हुई थी हार
इस बार कुरुक्षेत्र की टक्कर काफी जबरदस्त और दिलचस्प होने वाली है इसमें कोई दो राय नहीं है.

कुरुक्षेत्र: ग्रीन लैंड के नाम से मशहूर हरियाणा भले अब पंजाब का हिस्सा नहीं है ब्रिटिश भारत में पंजाब प्रान्त का एक भाग रहा है और इसके इतिहास में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है. राज्य के दक्षिण में राजस्थान और पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और उत्तर में पंजाब की सीमा और पूर्व में दिल्ली क्षेत्र है. हरियाणा और पड़ोसी राज्य पंजाब की भी राजधानी चंडीगढ़ ही है. इस राज्य की स्थापना 1 नवम्बर 1966 को हुई. क्षेत्रफल के हिसाब से इसे भारत का 20 वां सबसे बड़ा राज्य बनाता है. लोकसभा चुनाव के मद्देनजर लोगों की निगाहें हरियाणा पर टिकी हुई है.

बात अगर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट की करें तो 1977 में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट का गठन हुआ था. कुरुक्षेत्र से धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि कुरुक्षेत्र में ही महाभारत की लड़ाई हुई थी, और भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहीं दिया था. 

 

2019 लोकसभा चुनाव के मौजूदा परिस्थिति की बात करें तो इस बार यहां की टक्कर काफी जबरदस्त और दिलचस्प होने वाली है इसमें कोई दो राय नहीं है. कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक जाट वोटर्स हैं लेकिन खास बात यह है कि कुरुक्षेत्र ने लंबे से जाट सांसद नहीं देखा है. 

भारतीय जनता पार्टी के राजकुमार सैनी ने 2014 में कुरुक्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा और उन्होंने कांग्रेस पार्टी से दो बार लगातार सांसद रह चुके उद्योगपति नवीन जिंदल को भारी मतों से हराया था. इस चुनाव में राज कुमार सैनी को करीब 37 फीसदी वोट के साथ 4,18,112 मत मिले थे. 

इस बार बीजेपी ने कुरुक्षेत्र में नायाब सिंह सैनी को टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस ने नवीन जिंदल को छोड़ निर्मल सिंह पर भरोसा किया है. आप ने कुरुक्षेत्र से जयभगवान शर्मा को टिकट दिया है तो वहीं आईएनएलडी से अर्जुन चौटाला को मैदान में उतारा है. 

हरियाणा के रण में बहरहाल जीत किसकी होती है यह देखना दिलटस्प होगा क्योंकि सभी पार्टियों ने चुनाव के लिए अपनी ताकत पूरी तरह से झोंक दी है. लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और 23 मई को जनता का फैसला लोगों के सामने होगा.