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चुनाव 2019: रीवा लोकसभा सीट पर है सबकी नजर, यहां BSP भी दिखा चुकी है दम

2014 के चुनाव में बीजेपी के जनार्दन मिश्रा को रीवा की जनता ने रिकॉर्ड मतों से अपना प्रतिनिधि चुना था. जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे श्रीनिवास तिवारी के बेटे सुंदरलाल तिवारी को उन्होंने भारी मतों के अंतर से हराया था.

चुनाव 2019: रीवा लोकसभा सीट पर है सबकी नजर, यहां BSP भी दिखा चुकी है दम
फाइल फोटो

नई दिल्लीः विंध्य की पहचान कही जाने वाली रीवा संसदीय सीट ऐसी सीट है, जहां बीजेपी या कांग्रेस ही नहीं बसपा भी अपना दम-खम दिखाती रही है. रीवा में पहला चुनाव 1957 में हुआ, जिसमें कांग्रेस के शिवा दाता को जीत मिली थी. फिलहाल इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है और जनार्दन मिश्रा यहां से सांसद हैं. 2014 के चुनाव में बीजेपी के जनार्दन मिश्रा को रीवा की जनता ने रिकॉर्ड मतों से अपना प्रतिनिधि चुना था. जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे श्रीनिवास तिवारी के बेटे सुंदरलाल तिवारी को उन्होंने भारी मतों के अंतर से हराया था.

राजनीतिक इतिहास
रीवा के राजनीतिक इतिहास की बात की जाए तो, रीवा विंध्य की राजनीति का केंद्र रहा है. सफेद शेर के लिए जाना जाने वाला सियासी तौर पर कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए ही महत्वपूर्ण रहा है. रीवा में पहली बार 1957 में चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस को जीत मिली. जिसके बाद 1962 और 167 में भी कांग्रेस का ही परचम लहराया. 1977 में यहां भारतीय लोकदल की एंट्री हुई तो वहीं 1980 में रीवा के महाराजा मार्तंड सिंह ने यहां निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की.

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1984 में राजा मार्तंड सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे और जीत हासिल की. इसके बाद 1989 में यहां जनता पार्टी, 1991 और 1996 में बसपा ने यहां जीत हासिल की. इसके बाद 1999 में फिर कांग्रेस ने वापसी की, लेकिन 2004 के चुनाव में यहां बीजेपी के चंद्रमणि को जीत मिली. वहीं 2009 में बसपा तो 2014 में भाजपा प्रत्याशी जनार्दन मिश्रा यहां के सांसद चुने गए.

2014 के राजनीतिक समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता सुंदरलाल तिवारी को 1,68,726 मतों के अंतर से हराया था. इस चुनाव में जनार्दन मिश्रा को 3,83,320 वोट मिले थे. वहीं सुंदरलाल तिवारी को 2,14594 वोट ही मिल सके.

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सांसद जनार्दन मिश्रा का रिपोर्ट कार्ड
2014 के चुनाव में जीत हासिल कर सांसद चुने गए जनार्दन मिश्रा को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए 26.05 करोड़ की राशि आवंटित की गई थी, जिसमें से उन्होंने 23.38 करोड़ खर्च कर दिए. जबकि 2.67 करोड़ का फंड बिना खर्च किए रह गया.