सुपौल लोकसभा सीट : 2014 में मोदी लहर के बावजूद तीसरे नंबर पर रही थी बीजेपी

कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन तीन लाख 32 हजार 927 मतों के साथ चुनाव जीतने में सफल रही थी.

सुपौल लोकसभा सीट : 2014 में मोदी लहर के बावजूद तीसरे नंबर पर रही थी बीजेपी
2014 के चुनाव में बीजेपी तीसरे नंबर पर रही थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुपौल : वर्ष 2008 में बिहार की सुपौल लोकसभा सीट का गठन हुआ और यहां 2009 के लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट डाले गए थे. इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने जीत दर्ज की थी. जेडीयू उम्मीदवार विश्व मोहन कुमार ने बाहुबली सांसद पप्पू यादव की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन को चुनाव में हराया था.

2009 से पहले पहले सहरसा जिला भी सुपौल लोकसभा क्षेत्र में शामिल था, जो नए परिसीमन के बाद मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गया. सुपौल लोकसभा में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज और छतरपुर शामिल है. 

2014 में हुए आम चुनाव में मोदी लहर के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) यहां तीसरे नंबर पर रही थी. कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन तीन लाख 32 हजार 927 मतों के साथ चुनाव जीतने में सफल रही थी. वहीं, जेडीयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत के खाते में 273255 वोट आए थे. रंजीत रंजन 56972 वोट से चुनाव जीतने में सफल रही थी और सांसद बनी.

1525583 मतदाताओं वाले सुपौल लोकसभा सीट पर 2014 में 63.62 प्रतिशत मतदान हुआ था. यहां 941249 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. कुल 12 उम्मीदवार ने अपना भाग्य आजमाया था. इस चुनाव में नोटा के खाते में 21996 वोट पड़े थे.

2014 के वोटिंग ट्रेंड पर गौर करें तो इस वर्ष रंजीत रंजन के लिए संसद भवन की राह आसान नहीं है. वजह है जेडीयू और बीजेपी का दोबारा साथ आना. पिछले चुनाव में दोनों पार्टियों को मिले वोट को मिला दें तो इस चुनाव में एनडीए यहां बीस साबित हो सकती है.