हरियाणा में कुछ गांवों के नाम हैं इतने बदनाम, लोगों को बताने में भी आती है शर्म

ग्रामीण इन नामों को ‘शर्मनाक’ मानते हैं और दुर्जनपुर (जहां खराब लोग रहते हैं) का नाम बदलकर सज्जनपुर (जहां अच्छे लोग रहते हैं) करवाना चाहते हैं.

हरियाणा में कुछ गांवों के नाम हैं इतने बदनाम, लोगों को बताने में भी आती है शर्म
हिसार के ‘कुतियांवाली’ के लोग भी नाम बदलना चाहते हैं. इसका मतलब ‘कुतिया’ होता है. .फोटो साभारः Reuters

चंडीगढ़: अमेरिका के मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन जॉर्ज कार्लिन ने कहा था कि नाम में थोड़ी सी भावना जुड़ी होनी चाहिए और यह बात हरियाणा के उन गांवों के लोग अच्छी तरह महसूस करते हैं जिनका मानना है कि उनके गांवों के नाम उनकी भावना से मेल नहीं खाते हैं. हरियाणा में कुछ जगहों के नाम ऐसे हैं जैसे कुत्ताबाद, कुतियांवाली, कुतियाखेड़ी, लुला अहीर, दुर्जनपुर, चोरपुर और किन्नर. इन जगहों पर रहने वाले लोगों का कहना है कि वह इन नामों के साथ किसी भी तरह का संबंध महसूस नहीं करते हैं. ग्रामीण इन नामों को ‘शर्मनाक’ मानते हैं और दुर्जनपुर (जहां खराब लोग रहते हैं) का नाम बदलकर सज्जनपुर (जहां अच्छे लोग रहते हैं) करवाना चाहते हैं.

चोरपुर (ऐसी जगह जहां चोर रहते हैं) का नाम साधुपुर (ऐसी जगह जहां अच्छे लोग रहते हैं) करना चाहते हैं. नामों का बदलना इतना आसान काम नहीं है, यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी से लेकर केंद्र सरकार तक की मंजूरी शामिल है. हरियाणा के सिरसा जिले के ‘कुत्ताबाद’ गांव के रहने वाले ग्रामीण करीब एक दशक से मुख्यमंत्री कार्यालय में अपना प्रतिनिधि भेज रहे हैं.

इस गांव के अमन सिंह बरार ने बताया, ‘‘ पहले यह एक छोटा गांव था और इसे ढाणी कहा जाता था. लेकिन यहां के कुत्ते, लोगों को काट लेते थे इसलिए सभी ने इसका नाम कुत्ताबाद रख दिया. कुत्ता शब्द प्राय: गाली के लिए इस्तेमाल किया जाता है. हम अच्छा नाम चाहते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमने न सिर्फ भाजपा के शासनकाल में बल्कि उससे पहले भी मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रतिनिधि भेजे थे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.

हमने इस गांव का नाम ‘प्रेम नगर’ रखने का प्रस्ताव दिया है.’’ वहीं हिसार के ‘कुतियांवाली’ के लोग भी नाम बदलना चाहते हैं. इसका मतलब ‘कुतिया’ होता है. आजादी से पहले यह गांव पंजाब का हिस्सा था और इसका नाम शहजादपुर था. पूर्व सरपंच बीर सिंह ने बताया, ‘‘ एक अंग्रेज अधिकारी आजादी से पहले इस गांव में आया था और उसे एक कुतिया ने काट लिया. वह बहुत गुस्सा हो गया और उसने इस गांव का नाम कुतिया पर रखने का आदेश दे दिया.’’